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पुलिस की गोपनीय छापेमारी में दो हजार लीटर शराब बरामद
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कार्रवाई में तीन सौ क्विंटल लहन व शराब बनाने के उपकरण जब्त
करनैलगंज (गोंडा)। कोतवाली पुलिस को दो जिलों की सीमा पर अवैध शराब बनाने के बड़े धंधे का भंडाफोड़ किया है। इसमें भारी मात्रा में शराब तो मिली मगर धंधे में शामिल लोग भाग गए। पुलिस अब उनकी तलाश में जुट गई है।
गोंडा-बाराबंकी जिलों की सीमा पर बाढ़ प्रभावित इलाके में घाघरा नदी के साथ-साथ कच्ची शराब की दरिया भी काफी अरसे से बह रही है। पुलिस के सीमा विवाद का फायदा उठाकर अवैध शराब का धंधा यहाँ सालों से चल रहा था।
कुटीर उद्योग के रूप में पांव पसार चुके इस कारोबार में दोनों ही जिलों गोंडा व बाराबंकी की पुलिस सहित आबकारी विभाग की हिस्सेदारी रहती है। यही वजह है कि शासन प्रशासन के निर्देशों के बावजूद इन शराब कारोबारियों के प्रति नरम रुख अपनाया जाता है।
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गत दिनों बाराबंकी जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद जागी पुलिस अब हरकत में दिखाई देने लगी है। सोमवार की देर शाम कोतवाल करनैलगंज की अगुवाई में की गयी छापेमारी के दौरान इसी इलाके में करीब तीन सौ क्विंटल लहन सहित निर्मित शराब 500 लीटर व अर्धनिर्मित शराब करीब 1500 लीटर तथा शराब बनाने के उपकरण बरामद हुए।
अचानक हुई इस कार्रवाई से कच्ची शराब से जुड़े धंधेबाजों में हड़कम्प मच गया है। सोमवार की देर शाम एक सूचना पर कार्यवाही करते हुए कोतवाल करनैलगंज राजेश कुमार सिंह ने कोतवाली इलाके के काशीपुर में बड़ी छापेमारी की। बहुत ही गोपनीय तरीके से की गयी इस छापेमारी में टीम के पुलिस कर्मियों तक को नहीं पता था कि कहां जाना है और क्या करना है।
शाम आठ बजे से शुरू हुई छापेमारी का अभियान रात करीब 12 बजे तक चलता रहा। इस दौरान पुलिस ने कच्ची शराब बनाने की आधा दर्जन भट्ठियां, 500 लीटर निर्मित शराब, कई क्विंटल गुड़ व शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले कई उपकरणों को नष्ट किया। छापेमारी की भनक लगते ही शराब बनाने वाले लोग भाग खड़े हुए।
बताया जाता है कि पुलिस के नाकों तले यह खेल काफी पुराना है। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर काफी दिनों से यहां दर्जनों भट्ठियां संचालित हो रही थी। जिसकी जानकारी स्थानीय पुलिस से लेकर आबकारी विभाग तक को थी। छापेमारी में कोतवाल के अलावा आरक्षी जयप्रकाश यादव, आरक्षी जितेंद्र सिंह, अखिलेश चौहान, महिला आरक्षी सुषमा व सत्यकला आदि शामिल रहे।
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करनैलगंज (गोंडा)। कोतवाली पुलिस को दो जिलों की सीमा पर अवैध शराब बनाने के बड़े धंधे का भंडाफोड़ किया है। इसमें भारी मात्रा में शराब तो मिली मगर धंधे में शामिल लोग भाग गए। पुलिस अब उनकी तलाश में जुट गई है।
गोंडा-बाराबंकी जिलों की सीमा पर बाढ़ प्रभावित इलाके में घाघरा नदी के साथ-साथ कच्ची शराब की दरिया भी काफी अरसे से बह रही है। पुलिस के सीमा विवाद का फायदा उठाकर अवैध शराब का धंधा यहाँ सालों से चल रहा था।
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कुटीर उद्योग के रूप में पांव पसार चुके इस कारोबार में दोनों ही जिलों गोंडा व बाराबंकी की पुलिस सहित आबकारी विभाग की हिस्सेदारी रहती है। यही वजह है कि शासन प्रशासन के निर्देशों के बावजूद इन शराब कारोबारियों के प्रति नरम रुख अपनाया जाता है।
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गत दिनों बाराबंकी जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद जागी पुलिस अब हरकत में दिखाई देने लगी है। सोमवार की देर शाम कोतवाल करनैलगंज की अगुवाई में की गयी छापेमारी के दौरान इसी इलाके में करीब तीन सौ क्विंटल लहन सहित निर्मित शराब 500 लीटर व अर्धनिर्मित शराब करीब 1500 लीटर तथा शराब बनाने के उपकरण बरामद हुए।
अचानक हुई इस कार्रवाई से कच्ची शराब से जुड़े धंधेबाजों में हड़कम्प मच गया है। सोमवार की देर शाम एक सूचना पर कार्यवाही करते हुए कोतवाल करनैलगंज राजेश कुमार सिंह ने कोतवाली इलाके के काशीपुर में बड़ी छापेमारी की। बहुत ही गोपनीय तरीके से की गयी इस छापेमारी में टीम के पुलिस कर्मियों तक को नहीं पता था कि कहां जाना है और क्या करना है।
शाम आठ बजे से शुरू हुई छापेमारी का अभियान रात करीब 12 बजे तक चलता रहा। इस दौरान पुलिस ने कच्ची शराब बनाने की आधा दर्जन भट्ठियां, 500 लीटर निर्मित शराब, कई क्विंटल गुड़ व शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले कई उपकरणों को नष्ट किया। छापेमारी की भनक लगते ही शराब बनाने वाले लोग भाग खड़े हुए।
बताया जाता है कि पुलिस के नाकों तले यह खेल काफी पुराना है। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर काफी दिनों से यहां दर्जनों भट्ठियां संचालित हो रही थी। जिसकी जानकारी स्थानीय पुलिस से लेकर आबकारी विभाग तक को थी। छापेमारी में कोतवाल के अलावा आरक्षी जयप्रकाश यादव, आरक्षी जितेंद्र सिंह, अखिलेश चौहान, महिला आरक्षी सुषमा व सत्यकला आदि शामिल रहे।