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गोंडा महोत्सव का समापन
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Feb 2016 11:59 PM IST
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हर जुबां पर अद्भुत, अद्वितीय व अकल्पनीय की भावना के साथ दूसरे वर्ष भी गोंडा महोत्सव सोमवार की भोर में धूमधाम से संपन्न हो गया। अंतिम दिन टीना परवीन की कव्वाली व आल इंडिया मुशायरा हुआ। इसके मुख्य अतिथि पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र रहे। एपी मिश्र व डीएम अजय कुमार उपाध्याय ने महोत्सव समापन की घोषणा की।
महोत्सव के आखिरी दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुति देकर महोत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। एक ओर जहां आखिरी दिन दोपहर से लेकर शाम 6 बजे तक स्थानीय कलाकारों ने मंच पर धूम मचाई तो दूसरी ओर महोत्सव की शाम बाहरी कलाकारों के हुनर से रंगीन हुई।
रस्साकसी के फाइनल मैच में सदर प्रशासन व पुलिस की टीम संयुक्त विजेता रही। मुंबई की कलाकार वैष्णवी ने हाथ में दीपक लेकर चलो हिमाचल द्वार आज है शिव विवाह तथा भोजपुरी गीत तनी होखे दा जवान पिया हमरा के पर खूबसूरत नृत्य से दर्शकों को खूब झुमाया।
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हैरतअंगेज करतब के लिए मशहूर मुंबई से ही आए अजीत डैंजर ने करतब दिखाए। इसके बाद विमल बावरा द्वारा सूफी भजन साहिब तेरा भेद न जानै कोय तथा गजल गायक इलियास खां ने हंगामा है क्यों बरपा की मनमोहक प्रस्तुति दी।
मशहूर कव्वाली गायिका टीना परवीन ने छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नयना मिलायके पर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
इसके बाद महोत्सव की आखिरी शाम में आयोजित मुशायरे में देश के मशहूर शायरों ने शिरकत कर महोत्सव को अविस्मरणीय बना दिया। मुशायरे का शुभारंभ पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र के संबोधन से शुरू हुआ।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी गोंडा की प्रबल इच्छाशक्ति और जनपद की जनता के प्रति कुछ करने की भावना की बदौलत गोंडा महोत्सव दोबारा बुलंदियों पर पहुंच गया है।
गोंडा महोत्सव समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने शानदार मुशायरे का आयोजन कराने के लिए एमडी मिश्र का धन्यवाद व्यक्त किया।
डीएम ने कहा कि जिले की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर और प्रतिभाओं को एक बेहतर मंच दिलाने की मंशा से गोंडा महोत्सव की पटकथा लिखी गयी थी, लेकिन उनके द्वारा ऐसी व्यवस्था बना दी गई है कि वे इस जनपद में रहें या न रहें, गोंडावासियों को हर वर्ष गोंडा महोत्सव का आनंद मिल सकेगा।
मुशायरे में देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना की मां पर दिल को छू लेने वाली पंक्तियां सुनकर लोग भावुक हो गए। राहत इंदौरी ने शायरी दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इस मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं सुनाई, तो अना देहलवी ने दिल जिस मकाम पर था वहां दिल नहीं रहा, कमबख्त खो गया कहीं मिल नहीं रहा।
शकील आजमी ने छत दुआ देगी किसी के लिए जीना बन जाए, डूबता देख किसी को तो शफीना बन जाए, हैदर अली ने झूठ बोलूं तो जुबां पे मेरी छाले पड़ जाएं और सच बोल दूं तो जान के लाले पड़ जाएं जैसी शानदार लाइनें पढ़ीं।
महोत्सव में सरफ नानपारवी, नुसरत मेहंदी, तारिक कमर, सुरेंद्र सजर, बाबर, अशोक साहिल, इकबाल असर, मलिक जावेद, पप्लू लखनवीे, लियाकत जाफरी ने शानदार मुशायरा पेश किया। मुशायरे का समापन अनवर हाशमी के मुशायरे से हुआ। मुशायरे का संचालन नदीम फरुख ने किया।
महोत्सव समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने महोत्सव के समापन की औपचारिक घोषणा की। डीएम ने महोत्सव की व्यवस्था में कड़ी मेहनत व लगन के साथ काम करने के लिए अकील फाउंडेशन के अध्यक्ष अकील सिद्दीकी सहित फाउंडेशन के तीस वालेंटियर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
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महोत्सव के आखिरी दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुति देकर महोत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। एक ओर जहां आखिरी दिन दोपहर से लेकर शाम 6 बजे तक स्थानीय कलाकारों ने मंच पर धूम मचाई तो दूसरी ओर महोत्सव की शाम बाहरी कलाकारों के हुनर से रंगीन हुई।
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रस्साकसी के फाइनल मैच में सदर प्रशासन व पुलिस की टीम संयुक्त विजेता रही। मुंबई की कलाकार वैष्णवी ने हाथ में दीपक लेकर चलो हिमाचल द्वार आज है शिव विवाह तथा भोजपुरी गीत तनी होखे दा जवान पिया हमरा के पर खूबसूरत नृत्य से दर्शकों को खूब झुमाया।
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हैरतअंगेज करतब के लिए मशहूर मुंबई से ही आए अजीत डैंजर ने करतब दिखाए। इसके बाद विमल बावरा द्वारा सूफी भजन साहिब तेरा भेद न जानै कोय तथा गजल गायक इलियास खां ने हंगामा है क्यों बरपा की मनमोहक प्रस्तुति दी।
मशहूर कव्वाली गायिका टीना परवीन ने छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नयना मिलायके पर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
इसके बाद महोत्सव की आखिरी शाम में आयोजित मुशायरे में देश के मशहूर शायरों ने शिरकत कर महोत्सव को अविस्मरणीय बना दिया। मुशायरे का शुभारंभ पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र के संबोधन से शुरू हुआ।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी गोंडा की प्रबल इच्छाशक्ति और जनपद की जनता के प्रति कुछ करने की भावना की बदौलत गोंडा महोत्सव दोबारा बुलंदियों पर पहुंच गया है।
गोंडा महोत्सव समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने शानदार मुशायरे का आयोजन कराने के लिए एमडी मिश्र का धन्यवाद व्यक्त किया।
डीएम ने कहा कि जिले की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर और प्रतिभाओं को एक बेहतर मंच दिलाने की मंशा से गोंडा महोत्सव की पटकथा लिखी गयी थी, लेकिन उनके द्वारा ऐसी व्यवस्था बना दी गई है कि वे इस जनपद में रहें या न रहें, गोंडावासियों को हर वर्ष गोंडा महोत्सव का आनंद मिल सकेगा।
मुशायरे में देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना की मां पर दिल को छू लेने वाली पंक्तियां सुनकर लोग भावुक हो गए। राहत इंदौरी ने शायरी दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इस मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं सुनाई, तो अना देहलवी ने दिल जिस मकाम पर था वहां दिल नहीं रहा, कमबख्त खो गया कहीं मिल नहीं रहा।
शकील आजमी ने छत दुआ देगी किसी के लिए जीना बन जाए, डूबता देख किसी को तो शफीना बन जाए, हैदर अली ने झूठ बोलूं तो जुबां पे मेरी छाले पड़ जाएं और सच बोल दूं तो जान के लाले पड़ जाएं जैसी शानदार लाइनें पढ़ीं।
महोत्सव में सरफ नानपारवी, नुसरत मेहंदी, तारिक कमर, सुरेंद्र सजर, बाबर, अशोक साहिल, इकबाल असर, मलिक जावेद, पप्लू लखनवीे, लियाकत जाफरी ने शानदार मुशायरा पेश किया। मुशायरे का समापन अनवर हाशमी के मुशायरे से हुआ। मुशायरे का संचालन नदीम फरुख ने किया।
महोत्सव समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने महोत्सव के समापन की औपचारिक घोषणा की। डीएम ने महोत्सव की व्यवस्था में कड़ी मेहनत व लगन के साथ काम करने के लिए अकील फाउंडेशन के अध्यक्ष अकील सिद्दीकी सहित फाउंडेशन के तीस वालेंटियर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।