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राजस्व निरीक्षक सहित तीन पर जालसाजी का केस
Amar ujala Bureau
Updated Wed, 29 Jun 2016 11:25 PM IST
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आईजी के आदेश पर पुलिस ने राजस्व निरीक्षक, लेखपाल सहित तीन लोगों के विरुद्ध जालसाजी, धोखाधड़ी आदि धाराओं में केस दर्ज किया है। इसमें सरकारी अभिलेखों में मृत दिखाकर एक व्यक्ति की भूमि को दूसरे के नाम दर्ज करने का आरोप लगाया गया है।
मामला स्थानीय विकासखंड के ग्राम पूरे अंगद से जुड़ा है। जनपद बहराइच के ब्लॉक हुजूरपुर के ग्राम छिदकुरी निवासी रामपाल यादव ने पुलिस महानिरीक्षक को एक प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें कहा गया है कि वह विकासखंड करनैलगंज के ग्राम पूरे अंगद का निवासी है।
क्षेत्र बाढ़ग्रस्त होने के नाते उसने यहां से पलायन किया और छिदकुरी में जाकर बस गया। इसी का फायदा उठाकर गांव के एक व्यक्ति ने तत्कालीन लेखपाल व राजस्व निरीक्षक को मिला लिया और उसकी सारी संपत्ति अपने नाम दर्ज करवा ली। उसके बाद तहसील में वाद प्रस्तुत कर अपने को जीवित साबित करने का प्रयास करने लगा।
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नायब तहसीलदार ने दस्तावेजों को देखा। इसके बाद फरवरी 2016 में आदेश पारित किया कि श्यामनाथ पुत्र गंगा प्रसाद का नाम गाटा संख्या 45 से खारिज कर रामपाल यादव पुत्र शिवप्रसाद यादव का नाम दर्ज किया जाए।
इस आदेश के विरुद्ध श्यामनाथ ने उप जिला मजिस्ट्रेट के यहां अपील प्रस्तुत की, जहां अपील स्वीकार कर नायब तहसीलदार के आदेश को स्थगित कर दिया गया। तभी से वह लगातार न्याय पाने व अभिलेखों में जीवित होने के लिए तहसील व जिला स्तर के अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहा है।
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मामला स्थानीय विकासखंड के ग्राम पूरे अंगद से जुड़ा है। जनपद बहराइच के ब्लॉक हुजूरपुर के ग्राम छिदकुरी निवासी रामपाल यादव ने पुलिस महानिरीक्षक को एक प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें कहा गया है कि वह विकासखंड करनैलगंज के ग्राम पूरे अंगद का निवासी है।
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क्षेत्र बाढ़ग्रस्त होने के नाते उसने यहां से पलायन किया और छिदकुरी में जाकर बस गया। इसी का फायदा उठाकर गांव के एक व्यक्ति ने तत्कालीन लेखपाल व राजस्व निरीक्षक को मिला लिया और उसकी सारी संपत्ति अपने नाम दर्ज करवा ली। उसके बाद तहसील में वाद प्रस्तुत कर अपने को जीवित साबित करने का प्रयास करने लगा।
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नायब तहसीलदार ने दस्तावेजों को देखा। इसके बाद फरवरी 2016 में आदेश पारित किया कि श्यामनाथ पुत्र गंगा प्रसाद का नाम गाटा संख्या 45 से खारिज कर रामपाल यादव पुत्र शिवप्रसाद यादव का नाम दर्ज किया जाए।
इस आदेश के विरुद्ध श्यामनाथ ने उप जिला मजिस्ट्रेट के यहां अपील प्रस्तुत की, जहां अपील स्वीकार कर नायब तहसीलदार के आदेश को स्थगित कर दिया गया। तभी से वह लगातार न्याय पाने व अभिलेखों में जीवित होने के लिए तहसील व जिला स्तर के अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहा है।