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तीन करोड़ का भुगतान हड़पने में दो अफसरों पर केस
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गोंडा। नवाबगंज के होल्लापुर काजी स्थित मदरसा हनीफिया हिदायतुल उलूम में जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से अध्यापक पद पर आधा दर्जन से अधिक लोगों की फर्जी तरीके से नियुक्ति कर तीन करोड़ रुपये का भुगतान भी ले लिया गया। शासन से हुई जांच में कई अधिकारी व कर्मचारी फंसे तो रसूख पर जांच दबा दी गई। अब जाकर मदरसा में शिक्षक भर्ती के फर्जीवाड़े का केस दर्ज हुआ है।
जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के मोहल्ला मुट्ठीगंज निवासी करीम मोहम्मद खां पुत्र रहीम बक्श को मदरसा हनीफिया हिदायतुल उलूम होलापुर काजी में एक जनवरी 1995 को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त किया गया था। इस मदरसा को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 अप्रैल 1996 को अनुदान पर लिया गया तथा संस्था की तरफ से 15 कर्मचारियों, शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर की सूची रजिस्ट्रार अरबी-फारसी मदरसा को 4 मार्च 1997 को दी गई। जिसमें करीम मोहम्मद खां का नाम क्रमांक संख्या 13 पर है, जबकि उक्त सूची में गुलाम मोहयुद्दीन, असरार अहमद, याद अली, मोहम्मद सईद, मोहम्मद अतीक एवं मोहम्मद शमीम का नाम उल्लिखित नहीं था। इनकी फर्जी तरीके से नियुक्ति की गई, जिसमें विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी अहम भूमिका निभाई। फर्जी नियुक्ति की शिकायत जरूरी दस्तावेजों के साथ जिलाधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के साथ ही शासन स्तर पर की गई। शासन से जब जांच शुरू हुई तो अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की अधिकारियों व कर्मचारियों की गर्दन फंसती नजर आई।
वर्ष 2016 में छह शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी पाई गई। बाद में विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जांच में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत कई लोग दोषी पाए गए। इन फर्जी शिक्षकों के वेतन के तौर पर तीन करोड़ रुपये का गबन करके सरकारी राजस्व को चूना लगाया गया। इस बाबत की गई शिकायतों पर तमाम जांचें हुईं लेकिन दोषी पाए जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया। अदालत के आदेश पर शिकायतकर्ता ने 19 अगस्त 2020 को अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। बीते 23 अगस्त को एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए। अब जिले के दो तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत दर्जन भर लोगों के विरुद्ध नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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इनके विरूद्ध दर्ज हुआ केस
जिले के तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रविकांत व अमीर उल्ला के अलावा गुलाम मोहयुद्दीन, असरार अहमद, याद अली, मोहम्मद सईद, मोहम्मद अतीक, खुर्शिद अहमद, मोहम्मद आदिल, लियाकत अली, अल्पसंख्यक कल्याण के कनिष्ठ लिपिक शमीम अहमद, प्रबंधक निलंबित मो. शरीफ खां तथा उक्त अवैध कार्य में सहयोग करने वाले अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी और गबन समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया है। इसमें अभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के कई कर्मचारी और लिपिक भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
मदरसे में फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी, शिकायतकर्त्ता की तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मामले की जांच कराई जा रही है। - भानु प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक थाना नवाबगंज
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जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के मोहल्ला मुट्ठीगंज निवासी करीम मोहम्मद खां पुत्र रहीम बक्श को मदरसा हनीफिया हिदायतुल उलूम होलापुर काजी में एक जनवरी 1995 को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त किया गया था। इस मदरसा को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 अप्रैल 1996 को अनुदान पर लिया गया तथा संस्था की तरफ से 15 कर्मचारियों, शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर की सूची रजिस्ट्रार अरबी-फारसी मदरसा को 4 मार्च 1997 को दी गई। जिसमें करीम मोहम्मद खां का नाम क्रमांक संख्या 13 पर है, जबकि उक्त सूची में गुलाम मोहयुद्दीन, असरार अहमद, याद अली, मोहम्मद सईद, मोहम्मद अतीक एवं मोहम्मद शमीम का नाम उल्लिखित नहीं था। इनकी फर्जी तरीके से नियुक्ति की गई, जिसमें विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी अहम भूमिका निभाई। फर्जी नियुक्ति की शिकायत जरूरी दस्तावेजों के साथ जिलाधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के साथ ही शासन स्तर पर की गई। शासन से जब जांच शुरू हुई तो अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की अधिकारियों व कर्मचारियों की गर्दन फंसती नजर आई।
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वर्ष 2016 में छह शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी पाई गई। बाद में विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जांच में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत कई लोग दोषी पाए गए। इन फर्जी शिक्षकों के वेतन के तौर पर तीन करोड़ रुपये का गबन करके सरकारी राजस्व को चूना लगाया गया। इस बाबत की गई शिकायतों पर तमाम जांचें हुईं लेकिन दोषी पाए जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया। अदालत के आदेश पर शिकायतकर्ता ने 19 अगस्त 2020 को अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। बीते 23 अगस्त को एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए। अब जिले के दो तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत दर्जन भर लोगों के विरुद्ध नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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इनके विरूद्ध दर्ज हुआ केस
जिले के तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रविकांत व अमीर उल्ला के अलावा गुलाम मोहयुद्दीन, असरार अहमद, याद अली, मोहम्मद सईद, मोहम्मद अतीक, खुर्शिद अहमद, मोहम्मद आदिल, लियाकत अली, अल्पसंख्यक कल्याण के कनिष्ठ लिपिक शमीम अहमद, प्रबंधक निलंबित मो. शरीफ खां तथा उक्त अवैध कार्य में सहयोग करने वाले अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी और गबन समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया है। इसमें अभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के कई कर्मचारी और लिपिक भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
मदरसे में फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी, शिकायतकर्त्ता की तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मामले की जांच कराई जा रही है। - भानु प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक थाना नवाबगंज