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घटिया ड्रेस मिली तो अफसरों पर केस

Sat, 25 Jun 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Sat, 25 Jun 2016 11:39 PM IST
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Case on officers have received shoddy dress
सीबीएसई 10 वीं‌ रिजल्ट, माउंट कार्मेल चंडीगड़ की छात्राएं - फोटो : amar ujala
नए शैक्षिक सत्र में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल के प्रधानाध्यापक घटिया ड्रेस नहीं दे सकेंगे। साथ ही बच्चों की संख्या में हेरफेर करना भी इस बार मंहगा पड़ेगा। यूनिफार्म की गुणवत्ता में सुधार को लेकर शासन ने ड्रेस वितरित करने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच कराने का निर्णय लिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर जांच में ड्रेस की गुणवत्ता खराब मिली तो संबंधित प्रधानाध्यापक व विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष समेत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। 
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परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रा-छात्राओं को शासन निशुल्क ड्रेस मुहैया कराता है। इन ड्रेसों की खरीदारी विद्यालय स्तर पर विद्यालय प्रबंध समिति की देखरेख में की जाती है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अक्सर ड्रेस की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़ा करते हैं और इसकी तमाम शिकायतें बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर अन्य अधिकारियों के पास पहुंचती हैं।
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इन शिकायतों को रोकने के लिए इस बार शासन ने परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस वितरण से पहले ही उसकी जांच कराने का निर्णय लिया है। प्रमुख सचिव ने इस संबंध में बीएसए को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत ड्रेस की खरीद के बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक को इसकी सूचना बेसिक शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय कंट्रोल रूम को देनी होगी। सूचना मिलने के तीन दिन के भीतर बेसिक शिक्षा विभाग अपने स्तर से इस ड्रेस की गुणवत्ता की जांच कराएगा।
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जांच में ड्रेस की गुणवत्ता सही मिलने के बाद ही इसे बच्चों को दिया जाएगा। अगर इसके बाद भी ड्रेस की गुणवत्ता खराब मिली तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक व विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष समेत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और साथ ही खर्च की गई राशि की वसूली भी की जाएगी। 

विद्यालयों में ड्रेस वितरण से पहले जिले के सांसद, क्षेत्रीय विधायक को सूचना दी जाएगी और ड्रेस क ा वितरण ग्राम प्रधान व अभिभावकों की मौजूदगी में किया जाएगा। इससे ड्रेस वितरण में पारदर्शिता आएगी, साथ ही बच्चों की फर्जी संख्या दिखाने की समस्या से भी निजात मिल सकेगी। 


परिषदीय विद्यालयों में शत-प्रतिशत बच्चों को ड्रेस वितरण के बाद जिलाधिकारी की टास्क फोर्स विद्यालयों का निरीक्षण करेगी और बांटी गई ड्रेस का सत्यापन करेगी। ड्रेस वितरण के एक सप्ताह के भीतर हर हाल में विद्यालय का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
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