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Gonda News: दिल के मरीजों पर भारी पड़ रही ठंड, तीन दिन में 7 मरे

Tue, 03 Jan 2023 11:25 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2023 11:25 PM IST
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गोंडा के जिला अस्पताल में बच्चे का इलाज करते डॉ.आफताब आलम। -संवाद - फोटो : GONDA
गोंडा। कड़ाके की ठंड के बीच दिल के इलाज के लिए जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों पर डॉक्टर की कमी आफत बन कर टूट रही है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने से बीते तीन दिनों में सात हृदय रोगी समय पर उचित इलाज न मिलने से अपनी जान गवां चुके हैं। बीते तीन साल से कार्डियोलाजिस्ट की कुर्सी खाली पड़ी है। ऐसे में जिला अस्पताल में न तो दिल के मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टर है और न ही जांच सुविधा। ऐसे में हृदयरोग विभाग के स्वरूप को भी अब बदलकर डायलिसिस यूनिट में तब्दील कर दिया गया है।
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ठंड के बढ़ते प्रकोप के साथ ही हृदय व सांस रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। जिला अस्पताल में हर रोज करीब 30 से अधिक मरीज हृदय रोग संबंधी परेशानी के इलाज के लिए ओपीडी में आ रहे हैं। मगर अस्पताल में बीते तीन सालों से खाली पड़े हृदय रोग विशेषज्ञ के पद के कारण उन्हें अपनी बीमारी का उचित इलाज नहीं पाता है। इसके चलते ही एक जनवरी को जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ लिपिक हसीबुद्दीन सिद्दीकी को दिल का दौरा पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल का डॉक्टर अस्पताल में न होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उन्हें बहराइच ले जाने को विवश हुए। जहां इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
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एक जनवरी को ही परसपुर के पूरे खाल निवासी रामनाथ को भी परिजनों ने हृदय रोग संबंधी समस्या के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद दो जनवरी को फरेंदा शुक्ल निवासी सांवल प्रसाद को हार्ट अटैक पड़ने पर जिला अस्पताल से ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। इसी तरह जगतापुर निवासी बुधसागर व उजारपुरवा निवासी विमला देवी की मौत भी हार्ट अटैक के बाद समय पर उचित इलाज व जांच सुविधा न मिल पाने से हुई। इन दोनों मरीजों को परिजन इलाज के लिए लखनऊ ले जा रहे थे।
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मंगलवार को भी जिला अस्पताल में हृदय रोग व सांस की बीमारी के इलाज के लिए भर्ती धानेपुर निवासी बब्लू मौर्य व तरबगंज के भैरमपुर निवासी वंदना ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
डॉक्टर का इंतजार, गोल्डन ऑवर बेकार
करीब तीन साल पहले 30 अप्रैल 2020 को हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद से जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का कमरा नंबर 25 खाली पड़ा है। जिम्मेदारों ने खाली पड़े पद पर किसी हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती करने की जगह पूरे हृदयरोग विभाग का ही रंगरोगन कर इसे डायलिसिस यूनिट में तब्दील कर दिया।
जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मरीजों का प्राथमिक इलाज कर लखनऊ के लिए रिफर कर दिया जाता है। जहां तक पहुंचने में करीब तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। ऐसे में गोल्डन ऑवर में इलाज की सुविधा न मिल पाने से हृदय रोगी की जान जाने का शत प्रतिशत खतरा रहता है। जिला अस्पताल में तैनात डॉ. कुलदीप पांडेय ने बताया कि हृदय घात पड़ने के बाद इलाज के लिए पहला एक घंटा गोल्डन ऑवर कहलाता है। इस दौरान उचित इलाज मिल जाने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डिब्बे में ही बेकार हो गई जांच मशीनें
जिला अस्पताल में करीब दस साल पहले हृदयरोग की जांच के लिए टीएमटी व टू-डी इको मशीनों की खरीद हुई थी। इससे मरीजों की हार्ट बीट मापकर हार्टअटैक की आशंका का आंकलन होना था। विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते इन मशीनों को स्थापित न किए जाने से यह डिब्बे में रखे रखे ही बेकार हो गई।
ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज सिर्फ ईसीजी के सहारे होता है। बीते साल तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. घनश्याम सिंह ने जांच से जुड़ी कई मशीनों को कंडम घोषित कर दिया था।
हृदयरोगी ठंड से करें बचाव
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शोएब इकबाल ने बताया कि ठंड के दौरान हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को अपने बचाव के लिए विशेषतौर पर सावधानी बरतना चाहिए। इसके लिए ठंड में पर्याप्त ऊनी कपड़ों से शरीर ढक कर रखे और अचानक ठंड में बाहर न निकले। दिल की बीमारी से संबंधित दवाएं हमेशा अपने पास रखते हुए उनका सेवन तय समय पर अवश्य करें। इस मौसम में हृदय रोगियों को उच्च कैलोरी वाले भोजन तथा शराब के सेवन से भी बचना चाहिए। स्नान गर्म पानी से ही करे और बुखार या गले में खराश होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

जिला अस्पताल में हृदयरोग, नेत्र विभाग सहित कई विभागों में डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टरों के तैनाती के लिए मुख्यालय स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही रिक्त पदों पर डॉक्टरों की नई तैनाती होगी। डॉ. पीडी गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल
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