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चुनाव चिह्न को लेकर दुविधा में उम्मीदवार
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2015 11:31 PM IST
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प्रधानी चुनाव में उम्मीदवारों के साथ लोगों की निगाहें उनके चुनाव चिन्हों पर टिकी हुई हैं। किसे कार मिलेगी और किसे अनाज ओसाता किसान, किसे मिलेगी आरी और कौन कुर्सी रखेगा। चुनाव चिह्न को लेकर उम्मीदवारों के दिल में हलचल मची है। हर कोई सरल व चर्चित चुनाव चिह्न पाने को लेकर बेकरार है।
चुनाव चिह्न ही कभी लोगों की हार-जीत का कारण बन जाता है। वहीं कई उम्मीदवार चौकन्ना व सहमे हैं कि उन्हें कहीं चुनाव चिह्न चारपाई न मिल जाए।
ग्राम प्रधान पद को लेकर प्रथम चरण में नामांकन प्रक्रिया शुरू है। 18 व 19 नवबर ंको नामांकन पत्रों की जांच होनी है। 20 नम्बर ंको उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किये जाएंगे।
बेहतर चुनाव पाने के लिए हर कोई उम्मीदवार परेशान है। लगभग सभी उम्मीदवार सरल व चर्चित चुनाव चिह्न की दिल में चाहत पाले हुए हैं।
गांव के तमाम वोटर अनपढ़ हैं। इसमें महिलाओं की तादाद ज्यादा है, जबकि महिलाएं वोट डालने में पुरुषों से पीछे नही रहती हैं। दूसरी ओर वृद्ध वोटरों की तादाद भी कम नहीं है।
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सरल व चर्चित चुनाव चिह्न न मिलने से उम्मीदवार बेहतर तरीके से अपने वोटरों को अपने चुनाव चिह्न की पहचान नहीं करा पाते।
नतीजा यह होता है कि वोटर गफलत में आकर दूसरे सिंबल पर मुहर लगा देते हैं, जिसका फायदा किसी दूसरे उम्मीदवार के खाते में चला जाता है।
वहीं मजे कि बात तो यह है कि उम्मीदवारों को चारपाई चुनाव चिह्न सपने में आकर भी डरा रहा है। लोगों का मानना है कि थोड़ा कम फेमस चुनाव चिह्न मिलने पर भी वोटरों को मेहनत करके कनवेंस किया जा सकता है, लेकिन चारपाई चुनाव चिह्न मिलने पर समर्थक तो चाहे कभी किसी से मजाक में कोई टिप्पणी करें।
लेकिन विरोधी उम्मीदवार व उसके समर्थक वोटरों को टोक कर वोटरों को मजाक का पात्र न बनने से उस उम्मीदवार से दूर रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर देते हैं। प्रधान पद के कई उम्मीदवारों ने बातचीत में बताया कि चारपाई चुनाव चिह्न न मिले भले ही कोई और मिल जाए।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव से चारपाई चुनाव चिह्नको हमेशा के लिए हटा दिया है। हमेशा चुनाव में चारपाई चुनाव चिह्न पाने वाले उम्मीदवार जहां हास्य का पात्र बन जाते थे,वहीं प्रचार के दौरान लोगों से समर्थन मांगने के दौरान दो अर्थी व मजाक का भाव पैदा होने से कई बार क्षेत्र में मारपीट तक हो जाती थी।
इस तरह के मामलों की शिकायतें काफी दिनों से आयोग को अलग अलग स्थानों से मिल रही थी। जिसे निर्वाचन आयोग ने गंभीरता से लिया और चारपाई चुनाव चिह्न को हमेशा के लिए एजेंडे से बाहर कर दिया है।
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चुनाव चिह्न ही कभी लोगों की हार-जीत का कारण बन जाता है। वहीं कई उम्मीदवार चौकन्ना व सहमे हैं कि उन्हें कहीं चुनाव चिह्न चारपाई न मिल जाए।
ग्राम प्रधान पद को लेकर प्रथम चरण में नामांकन प्रक्रिया शुरू है। 18 व 19 नवबर ंको नामांकन पत्रों की जांच होनी है। 20 नम्बर ंको उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किये जाएंगे।
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बेहतर चुनाव पाने के लिए हर कोई उम्मीदवार परेशान है। लगभग सभी उम्मीदवार सरल व चर्चित चुनाव चिह्न की दिल में चाहत पाले हुए हैं।
गांव के तमाम वोटर अनपढ़ हैं। इसमें महिलाओं की तादाद ज्यादा है, जबकि महिलाएं वोट डालने में पुरुषों से पीछे नही रहती हैं। दूसरी ओर वृद्ध वोटरों की तादाद भी कम नहीं है।
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सरल व चर्चित चुनाव चिह्न न मिलने से उम्मीदवार बेहतर तरीके से अपने वोटरों को अपने चुनाव चिह्न की पहचान नहीं करा पाते।
नतीजा यह होता है कि वोटर गफलत में आकर दूसरे सिंबल पर मुहर लगा देते हैं, जिसका फायदा किसी दूसरे उम्मीदवार के खाते में चला जाता है।
वहीं मजे कि बात तो यह है कि उम्मीदवारों को चारपाई चुनाव चिह्न सपने में आकर भी डरा रहा है। लोगों का मानना है कि थोड़ा कम फेमस चुनाव चिह्न मिलने पर भी वोटरों को मेहनत करके कनवेंस किया जा सकता है, लेकिन चारपाई चुनाव चिह्न मिलने पर समर्थक तो चाहे कभी किसी से मजाक में कोई टिप्पणी करें।
लेकिन विरोधी उम्मीदवार व उसके समर्थक वोटरों को टोक कर वोटरों को मजाक का पात्र न बनने से उस उम्मीदवार से दूर रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर देते हैं। प्रधान पद के कई उम्मीदवारों ने बातचीत में बताया कि चारपाई चुनाव चिह्न न मिले भले ही कोई और मिल जाए।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव से चारपाई चुनाव चिह्नको हमेशा के लिए हटा दिया है। हमेशा चुनाव में चारपाई चुनाव चिह्न पाने वाले उम्मीदवार जहां हास्य का पात्र बन जाते थे,वहीं प्रचार के दौरान लोगों से समर्थन मांगने के दौरान दो अर्थी व मजाक का भाव पैदा होने से कई बार क्षेत्र में मारपीट तक हो जाती थी।
इस तरह के मामलों की शिकायतें काफी दिनों से आयोग को अलग अलग स्थानों से मिल रही थी। जिसे निर्वाचन आयोग ने गंभीरता से लिया और चारपाई चुनाव चिह्न को हमेशा के लिए एजेंडे से बाहर कर दिया है।