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Gonda News: कितने रुपये लेकर नर्सिंग होम में करते हैं ऑपरेशन
Sat, 08 Jul 2023 11:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 08 Jul 2023 11:14 PM IST
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जिला महिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान सीएमएस से बात करते प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी स
गोंडा। प्रमुख सचिव (चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पार्थसारथी सेन शर्मा ने शनिवार को विभिन्न अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया मगर उन्हें कहीं कोई कमी नहीं मिली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ''ऑल इज वेल'' दिखाने के लिए मरीजों के तीमारदारों को पहले से ही चुप्पी साधने का निर्देश दिया था। कुछ तीमारदारों ने प्रमुख सचिव से अपना दर्द कहना भी चाहा तो उन्होंने डाॅक्टर से बात करने की नसीहत दे डाली। हालांकि, अभी भी समस्याएं जस की तस हैं।
आईएएस पार्थसारथी सेन शर्मा ने शनिवार को सबसे पहले सीएचसी करनैलगंज व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर मसोलिया का निरीक्षण किया। यहां इंतजामात चाक-चौबंद दिखे। इसके बाद उन्होंने जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इमरजेंसी का निरीक्षण कर डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों के बारे में जानकारी ली। प्रभारी सीएमएस डॉ. अमित त्रिपाठी से पूछा कि यहां के डॉक्टर रात में नर्सिंग होम में ऑपरेशन करने जाते हैं क्या...? अगर जाते हैं तो कितनी फीस लेते हैं। इस सवाल से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए। सीएमएस ने कहा- ऐसा नहीं होता है, फिर भी निगरानी की जाएगी।
प्रमुख सचिव ने ओपीडी का निरीक्षण किया, जहां नाममात्र ही मरीज दिखाई पड़े। प्रसव कक्ष, ऑपरेशन कक्ष और पीआईसीयूू का निरीक्षण किया मगर इस दौरान कोई कमी नजर नहीं आई।
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बड़गांव पुलिस चौकी के पास रहने वाले मदनलाल शर्मा ने प्रमुख सचिव को बताया कि उसकी पत्नी कमलेश तीन जुलाई से भर्ती है। सही से उपचार नहीं हो रहा है। ऑपरेशन के लिए सारा सामान बाहर से लाना पड़ा। इस पर प्रभारी सीएमएस ने तुरंत उनकी बात काटते हुए कहा कि सब मिल रहा है। प्रमुख सचिव ने भी मदनलाल को डॉक्टरों से बात करने की नसीहत दी। वहीं, तीमारदार शांति देवी अपनी बात कहना चाहती थीं मगर स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें प्रमुख सचिव तक जाने ही नहीं दिया।
प्रमुख सचिव के सामने व्यवस्थाएं बेहतर दिखाने के लिए अस्पताल प्रशासन बिल्कुल सख्त रहा। गेट पर दो सुरक्षा गार्ड तैनात करके बिना काम के आने वाली आशाओं व तीमारदारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। पुरानी बिल्डिंग के पास कुछ महिलाएं जमीन पर बैठी रहीं, जिन्हें अस्पताल से बाहर जाने का निर्देश दिया गया। तीमारदार सुमित्रा ने कहा- वार्ड में बैठने नहीं दिया, अब बाहर से भी भगाया जा रहा है।
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आईएएस पार्थसारथी सेन शर्मा ने शनिवार को सबसे पहले सीएचसी करनैलगंज व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर मसोलिया का निरीक्षण किया। यहां इंतजामात चाक-चौबंद दिखे। इसके बाद उन्होंने जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इमरजेंसी का निरीक्षण कर डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों के बारे में जानकारी ली। प्रभारी सीएमएस डॉ. अमित त्रिपाठी से पूछा कि यहां के डॉक्टर रात में नर्सिंग होम में ऑपरेशन करने जाते हैं क्या...? अगर जाते हैं तो कितनी फीस लेते हैं। इस सवाल से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए। सीएमएस ने कहा- ऐसा नहीं होता है, फिर भी निगरानी की जाएगी।
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प्रमुख सचिव ने ओपीडी का निरीक्षण किया, जहां नाममात्र ही मरीज दिखाई पड़े। प्रसव कक्ष, ऑपरेशन कक्ष और पीआईसीयूू का निरीक्षण किया मगर इस दौरान कोई कमी नजर नहीं आई।
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बड़गांव पुलिस चौकी के पास रहने वाले मदनलाल शर्मा ने प्रमुख सचिव को बताया कि उसकी पत्नी कमलेश तीन जुलाई से भर्ती है। सही से उपचार नहीं हो रहा है। ऑपरेशन के लिए सारा सामान बाहर से लाना पड़ा। इस पर प्रभारी सीएमएस ने तुरंत उनकी बात काटते हुए कहा कि सब मिल रहा है। प्रमुख सचिव ने भी मदनलाल को डॉक्टरों से बात करने की नसीहत दी। वहीं, तीमारदार शांति देवी अपनी बात कहना चाहती थीं मगर स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें प्रमुख सचिव तक जाने ही नहीं दिया।
प्रमुख सचिव के सामने व्यवस्थाएं बेहतर दिखाने के लिए अस्पताल प्रशासन बिल्कुल सख्त रहा। गेट पर दो सुरक्षा गार्ड तैनात करके बिना काम के आने वाली आशाओं व तीमारदारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। पुरानी बिल्डिंग के पास कुछ महिलाएं जमीन पर बैठी रहीं, जिन्हें अस्पताल से बाहर जाने का निर्देश दिया गया। तीमारदार सुमित्रा ने कहा- वार्ड में बैठने नहीं दिया, अब बाहर से भी भगाया जा रहा है।