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Gonda News: बारिश के सीजन में 30 फीसदी मंदी से नहीं उबर पाए कारोबारी

Thu, 07 Aug 2025 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Thu, 07 Aug 2025 12:05 AM IST
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Businessmen could not recover from 30% recession during the rainy season
पटेलनगर में बारिश के कारण भरा पानी। फाइल फोटो 
गोंडा। बारिश का सीजन कारोबारियों के लिए आर्थिक चोट पहुंचाने वाला रहता है। बारिश के तीन महीने बाजार की रौनक भी कम हो जाती है। खरीदार बारिश में कम निकलते हैं। वहीं, त्योहार और सहालग भी इन दिनों नहीं रहती। इससे पिछले 30 साल से 30 फीसदी मंदी से कारोबारी नहीं उबर पा रहे हैं। इसे आंकड़े में देखें तो करीब 50 करोड़ का व्यापारियों को नुकसान होता है। बाजार पर ऑनलाइन कारोबार का भी बड़ा असर हुआ है।
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शहर का पटेलनगर इलाका गुड्डूमल चौराहे से दुखहरणनाथ मंदिर तक बारिश के बीच सड़क पर ही नहीं, दोनों पटरी की दुकानें पानी से लबालब हो जाती हैं। इससे बिक्री चौपट हो जाती है। पानी के कारण खरीदार भी नहीं आते। यह हाल यहां पिछले 20 साल से है। नगर पालिका परिषद ने नालियों पर पत्थर तो रखवा दिए पर सड़कें ऊंची नहीं कराईं। कुछ घंटों की बारिश में ही सड़क लबालब हो जाती है। पानी को निकलने में तीन से चार घंटे लगते हैं। इससे इलाके का कारोबार मंदा पड़ा है। यही हाल, उतरौला रोड से महाराजगंज के फातिमा कॉलेज मार्ग का है। इस मार्ग के कारोबारियों के लिए बारिश का सीजन दर्द लेकर आता है। यहां अधिकांश कारोबारी थोक का व्यापार करते हैं। इनमें आढ़ती से लेकर फर्नीचर, बिल्डिंग मैटेरियल और फूड आइटम के कारोबारी हैं। इन्हें भी बारिश के सीजन में पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता है।
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व्यापारी बोले- तीन महीने चौपट रहता कारोबार
पटेलनगर में टेलरिंग की दुकान करने वाले मो. मोबीन का कहना है कि वह 30 साल से यहां दुकान कर रहे हैं। सड़कें और नालियां कई बार बनीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। बारिश के तीन माह में पूरा कारोबार चौपट रहता है।
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कंप्यूटर की दुकानदार श्यामपाल कश्यप ने बताया कि 10 साल से यहां कारोबार कर रहे हैं। दुकान के ठीक सामने पांडेय तालाब है। जिसमें हमेशा पानी रहता है। पटेलनगर सहित छेदीपुरवा आदि का कचरा यहां पानी के साथ बहकर आता है। बारिश में सड़क और तालाब एक हो जाता है। इससे खरीदार नहीं आते।


चायपत्ती विक्रेता अजय श्रीवास्तव का कहना है कि जलभराव की समस्या यहां वर्षों से बनी हुई है। अगर एक घंटे भी बारिश हो जाए तो सड़क तालाब का रूप ले लेती है। इसलिए इधर, ग्राहक आना नहीं चाहते। पूरे तीन महीने धंधा मंदा पड़ जाता है।


उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष आदित्य पाल का कहना है कि जलभराव से होने वाले नुकसान से नगर पालिका के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी जानते हैं। बारिश के तीन महीने में व्यापारियों को 30 फीसदी से अधिक का नुकसान झेलना पड़ता है। शहरी क्षेत्र में बारिश के सीजन में 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित रहता है। यदि बारिश के मौसम से पहले जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त हो जाए तो व्यापार में मंदी कम हो सकती है।

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र आर्य का कहना है कि बारिश का महीना व्यापार के लिहाज से सही नहीं रहता। जलभराव से व्यापार पर प्रभाव पड़ता है। ऑनलाइन खरीदारी के कारण भी स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक चोट पहुंच रही है।
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