फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Budget not received for three years, how Krishna and Sudama read together

तीन साल से नहीं मिला बजट, कैसे साथ पढ़ें कृष्ण और सुदामा

Tue, 14 Jun 2022 11:21 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jun 2022 11:21 PM IST
विज्ञापन
Budget not received for three years, how Krishna and Sudama read together
गोंडा। गरीब बच्चों को उनकी पसंद के कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षा देने की योजना बजट की कमी से प्रभावित हो रही है। जिले के दो सौ से अधिक कॉन्वेंट स्कूलों में चार हजार गरीब बच्चों को प्रवेश तो दिला दिया गया मगर उनकी फीस ही नहीं आ रही है। ऐसे में इन चार हजार बच्चों की पढ़ाई पर संकट गहरा गया है। शासन से बजट न मिलने के कारण विभाग फीस नहीं दे पा रहा है। इसके साथ ही नए सत्र में भी 722 बच्चों का प्रवेश कराने के लिए कॉन्वेंट स्कूल तय किए गये हैं, मगर इन स्कूलों ने दाखिला करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शासन से बजट नहीं मिला तो कृष्ण और सुदामा एकसाथ नहीं पढ़ सकेंगे।
विज्ञापन

गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए शुरू की गई अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग योजना जिले में बजट की कमी से सिसक रही है। विभाग अब तक करीब चार हजार गरीब बच्चों का कान्वेंट स्कूलों में प्रवेश करा चुका है। प्रत्येक छात्र की 450 रुपये प्रतिमाह फीस चुकानी होती है। ऐसे में जिले के कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले चार हजार छात्र-छात्राआें के लिए हर महीने 18 लाख रुपये बजट की जरूरत है।
विज्ञापन

इसी तरह साल भर में दो करोड़ 16 लाख रुपये बजट चाहिए। मगर बीते तीन साल से एक फीसदी बजट ही मिल पा रहा है। वो भी हर महीने तो बजट कभी आया ही नहीं। शासन से दो साल बाद सात लाख रुपये बजट ही मिला है। इसके चलते विभाग कॉन्वेंट स्कूलों को फीस ही नहीं दे पा रहा है। वहीं, कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को रोज बकाया फीस के बारे में न सिर्फ बातें सुनने को मिलती हैं, बल्कि नाम काटने तक की चेतावनी भी मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मनकापुर के रमेश पांडेय ने बताया कि उनका बेटा एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ता है। विभाग से फीस नहीं आने के कारण बच्चे को स्कूल से बार-बार चेतावनी दी जा रही है। वहीं, कान्वेंट स्कूलों के प्रधानाचार्यों का कहना है कि एक तो सरकार ने पहले ही निर्धारित फीस से काफी कम तय कर रखी है, उसके बाद वो भी फीस नहीं दी जा रही है। निर्धारित फीस 450 के बजाय कभी-कभी दो-दो सौ रुपये प्रति छात्र के हिसाब से फीस मिल जाती है। ऐसे में निजी स्कूल गरीब बच्चों का पढ़ाई का बोझ भला कैसे वहन करें? ऐसे में बजट नहीं मिलने से गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
नए शैक्षिक सत्र में भी गरीब बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया माह मार्च से शुरू हो गई है। लॉटरी के माध्यम से अब तक 722 बच्चों का चयन करके दाखिला कराया जा चुका है। इसी माह एक और लॉटरी निकलनी है। जिसमें 278 बच्चों का चयन होना है। इस तरह नए सत्र में भी एक हजार बच्चों के प्रवेश की तैयारी पूरी हो चुकी है। मगर अनुदान पर विभाग चुप्पी साधे है।
प्रत्येक छात्र को पांच-पांच हजार रुपये शिक्षण सामग्री के लिए दिए जाने हैं। इनमें बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस के साथ ही किताबों के लिए अनुदान शामिल है। इसके लिए करीब 50 लाख रुपये का बजट चाहिए। फीस के लिए भी बजट की जरूरत है। इस तरह करीब 79 लाख रुपये की मांग की गई है। मगर अभी तक बजट नहीं मिल सका है। इससे विभाग में बेचैनी है।
योजना में दो श्रेणी के लोगों को लाभ दिया जाना है। पहला अलाभित समूह है जिसमें दलित, पिछड़े वर्ग के बच्चे, निशक्त, एचआईवी व कैंसर पीड़ित अभिभावकों के बच्चे, निराश्रित व बेघर बच्चे पात्रता श्रेणी में आएंगे। दूसरी श्रेणी में दुर्बल वर्ग के ऐसे माता-पिता या संरक्षक जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल कार्ड धारक) जीवन-यापन करने वाले हैं, दिव्यांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन प्राप्त करने वाले या एक लाख से कम वार्षिक आय वाले अभिभावकों के बच्चे शामिल हैं। इसके तहत इस श्रेणी के गरीब बच्चों का गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्री-प्राइमरी व कक्षा एक में दाखिला कराया जाता है।

बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि कॉन्वेंट स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बजट न मिलने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। फिर से बजट देने की मांग की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed