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पंचायत चुनाव के अधिकारियों व कर्मियों पर टूटा कोरोना का कहर
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गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोरोना का असर अब दिखने लगा है। चुनाव ड्यूटी करने वाले करीब 20 कर्मचारियों की मौत अब तक हो चुकी है। जिसमें ज्यादातर कोरोना पॉजिटिव थे और जिंदगी की जंग हार गए।
इसके अलावा लगातार चुनाव ड्यूटी करने वाले कोरोना से प्रभावित हो रहे हैं। मतगणना की तैयारियों के ठीक पहले दो निर्वाचन अधिकारी के साथ ही 12 सहायक निर्वाचन अधिकारी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इनके स्थान पर दूसरे अधिकारियों की अब ड्यूटी लगाई है।
कोरोना संकट के बीच पंचायत चुनाव कराना अब भारी पड़ रहा है। पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले कई कर्मचारी प्रशिक्षण के बाद से ही कोरोना पाजिटिव होने लगे थे। इसके बाद कईयों की मौत भी चुनाव बाद होनी शुरू हो गई। बेसिक शिक्षा के ही करीब 17 शिक्षक, शिक्षामित्र व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मौत अब तक हो चुकी है।
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इसमें ज्यादातर की मौत कोरोना के चलते ही हुई है। इसके अलावा भूमि संरक्षण विभाग के एक अधिकारी के साथ ही विकास विभाग के एक बाबू और ग्राम विकास अधिकारी की मौत हो चुकी है। दो शिक्षकों की मौत हो तो शुक्रवार को ही इलाज के दौरान हो गई है।
इसके अलावा इंटर कालेज के भी एक शिक्षक की मौत हो चुकी है। इसी बीच मतगणना कराने की तैयारी कर रहे दो ब्लाकों के निर्वाचन अधिकारी और 12 सहायक निर्वाचन अधिकारी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। अब मतगणना कराने के लिए इन अधिकारियों के स्थान पर दूसरों की ड्यूटी लगाई गई है, वहीं इनके साथ काम करने वाले भी सहमे हुए हैं।
कोरोना पॉजिटिव होने के कारण उनमें भी असर हो सकता है। फिलहाल अधिकारी पंचायत चुनाव की मतगणना कराने में जुटे हैं, उनका कहना है कि अब जो जिम्मेदारी मिली है उसे तो पूरा ही करना है। बाकी जो होगा, देखा जाएगा।
पंचायत चुनाव के दौरान कई बार कोविड प्रोटोकाल टूटता रहा। नामांकन के दौरान तो भीड़ रही ही और कोई भी सोशल डिस्टेसिंग भी कहीं न दिखी। इसके अलावा मतदान के लिए प्रशिक्षण में भी मानक की अनदेखी हुई।
एक-एक सीट पर तीन- तीन लोगों को बैठाया गया और एक- एक कमरे में 50 के करीब लोग एक साथ बैठे। इसके बाद कइयों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यही नहीं पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दिन तो कोई मानक ही नही रहा। अपनी ड्यूटी के लिए मतदान अधिकारियों को भीड़ में ही पूरे समय रहना पड़ा। इस दौरान ब्लाक पर नियुक्त निर्वाचन अधिकारियों को भी दिक्कत हुई।
पंचायत चुनाव में कार्मिक का काम देख रहे मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी प्रशिक्षण के समय ही पाजिटिव हो गए थे। फिलहाल मतदान के दिन उनकी तबीयत में सुधार हो गया और अब वह स्वस्थ हैं।
इसके बाद कार्मिक और प्रशिक्षण करा रहे परियोजना निदेशक सेवाराम चौधरी कोरोना पाजिटिव हुई और एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती हैं। पंचायत चुनाव में यातायात का प्रबंध देख रहीं सिटी मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी भी कोरोना पॉजिटिव हैं।
पंचायत निर्वाचन में सहायक निर्वाचन अधिकारी रहे देवेंद्र कुमार गुप्त सुपरवाइजर समाज कल्याण के डेढ़ साल के बेटे की इलाज के अभाव में मौत हो गई। एआरओ देवेंद्र कुमार पंचायत चुनाव में व्यस्त रहे।
उनको ड्यूटी से भी मुक्ति नही मिली। जिससे वह अपने बीमार बेटे का सही समय पर इलाज नही करा सके। इससे उनके डेढ़ साल के बेटे की मौत हो गई। अब जाकर उन्हें भी ड्यूटी से मुक्त किया गया है। अब पूरे परिवार में शोक की लहर है।
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इसके अलावा लगातार चुनाव ड्यूटी करने वाले कोरोना से प्रभावित हो रहे हैं। मतगणना की तैयारियों के ठीक पहले दो निर्वाचन अधिकारी के साथ ही 12 सहायक निर्वाचन अधिकारी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इनके स्थान पर दूसरे अधिकारियों की अब ड्यूटी लगाई है।
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कोरोना संकट के बीच पंचायत चुनाव कराना अब भारी पड़ रहा है। पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले कई कर्मचारी प्रशिक्षण के बाद से ही कोरोना पाजिटिव होने लगे थे। इसके बाद कईयों की मौत भी चुनाव बाद होनी शुरू हो गई। बेसिक शिक्षा के ही करीब 17 शिक्षक, शिक्षामित्र व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मौत अब तक हो चुकी है।
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इसमें ज्यादातर की मौत कोरोना के चलते ही हुई है। इसके अलावा भूमि संरक्षण विभाग के एक अधिकारी के साथ ही विकास विभाग के एक बाबू और ग्राम विकास अधिकारी की मौत हो चुकी है। दो शिक्षकों की मौत हो तो शुक्रवार को ही इलाज के दौरान हो गई है।
इसके अलावा इंटर कालेज के भी एक शिक्षक की मौत हो चुकी है। इसी बीच मतगणना कराने की तैयारी कर रहे दो ब्लाकों के निर्वाचन अधिकारी और 12 सहायक निर्वाचन अधिकारी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। अब मतगणना कराने के लिए इन अधिकारियों के स्थान पर दूसरों की ड्यूटी लगाई गई है, वहीं इनके साथ काम करने वाले भी सहमे हुए हैं।
कोरोना पॉजिटिव होने के कारण उनमें भी असर हो सकता है। फिलहाल अधिकारी पंचायत चुनाव की मतगणना कराने में जुटे हैं, उनका कहना है कि अब जो जिम्मेदारी मिली है उसे तो पूरा ही करना है। बाकी जो होगा, देखा जाएगा।
पंचायत चुनाव के दौरान कई बार कोविड प्रोटोकाल टूटता रहा। नामांकन के दौरान तो भीड़ रही ही और कोई भी सोशल डिस्टेसिंग भी कहीं न दिखी। इसके अलावा मतदान के लिए प्रशिक्षण में भी मानक की अनदेखी हुई।
एक-एक सीट पर तीन- तीन लोगों को बैठाया गया और एक- एक कमरे में 50 के करीब लोग एक साथ बैठे। इसके बाद कइयों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यही नहीं पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दिन तो कोई मानक ही नही रहा। अपनी ड्यूटी के लिए मतदान अधिकारियों को भीड़ में ही पूरे समय रहना पड़ा। इस दौरान ब्लाक पर नियुक्त निर्वाचन अधिकारियों को भी दिक्कत हुई।
पंचायत चुनाव में कार्मिक का काम देख रहे मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी प्रशिक्षण के समय ही पाजिटिव हो गए थे। फिलहाल मतदान के दिन उनकी तबीयत में सुधार हो गया और अब वह स्वस्थ हैं।
इसके बाद कार्मिक और प्रशिक्षण करा रहे परियोजना निदेशक सेवाराम चौधरी कोरोना पाजिटिव हुई और एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती हैं। पंचायत चुनाव में यातायात का प्रबंध देख रहीं सिटी मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी भी कोरोना पॉजिटिव हैं।
पंचायत निर्वाचन में सहायक निर्वाचन अधिकारी रहे देवेंद्र कुमार गुप्त सुपरवाइजर समाज कल्याण के डेढ़ साल के बेटे की इलाज के अभाव में मौत हो गई। एआरओ देवेंद्र कुमार पंचायत चुनाव में व्यस्त रहे।
उनको ड्यूटी से भी मुक्ति नही मिली। जिससे वह अपने बीमार बेटे का सही समय पर इलाज नही करा सके। इससे उनके डेढ़ साल के बेटे की मौत हो गई। अब जाकर उन्हें भी ड्यूटी से मुक्त किया गया है। अब पूरे परिवार में शोक की लहर है।