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Gonda News: बृजभूषण के समर्थक मान रहे नई शुरुआत
Mon, 03 Aug 2026 11:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:32 PM IST
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गोंडा। महिला पहलवानों के कथित यौन शोषण मामले में अदालत से बरी होने के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वांचल की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। करीब साढ़े तीन वर्ष तक चले इस प्रकरण के शुरुआत में ही उन्होंने खुद को निर्दाेष बताते हुए कहा था कि यदि आरोप सिद्ध हुए तो वह खुद फांसी पर लटक जाएंगे। अदालत के फैसले के बाद समर्थक इसे उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष की परिणति के रूप में देख रहे हैं।
आरोप लगने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सांसद रहते हुए उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया था। इसके बावजूद बृजभूषण ने न तो पार्टी के खिलाफ कोई मोर्चा खोला और न ही राजनीतिक सक्रियता कम की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों समेत पड़ोसी राज्यों में लगातार जनसंपर्क किया और अपने समर्थकों, विशेषकर क्षत्रिय समाज तथा खेल जगत से जुड़े लोगों के बीच संवाद बनाए रखा।
गोंडा के नंदिनी नगर में आयोजित राष्ट्रकथा के दौरान प्रतिदिन हजारों लोगों की उपस्थिति और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों को बुलाकर वह यह संदेश देने में कामयाब रहे कि क्षेत्र में उनका जनाधार अब भी प्रभावी है। इस कथा में धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, सुशील सिंह, पवन सिंह समेत पूर्वांचल के कई क्षत्रप और अयोध्या के चार दर्जन से अधिक मठों के मठाधीश शामिल हुए थे। कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों, विशेषकर राजपूत नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं तेज रही हैं। ऐसे माहौल में अदालत से मिली राहत ने बृजभूषण की राजनीतिक संभावनाओं को नया आयाम दिया है।
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स्वयं बृजभूषण कई बार कह चुके हैं, ‘मैं जीवित रहा तो दुनिया की कोई ताकत हमें चुनाव लड़ने से रोक नहीं पाएगी। हम किस पार्टी से और कहां से चुनाव लड़ेंगे, यह छह महीने पहले बताएंगे।’ इससे पूर्व उनके सांसद पुत्र करण भूषण सिंह कह चुके हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में वह और उनके पिता (बृजभूषण शरण सिंह) दोनों भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे और जीतकर एकसाथ लोकसभा जाएंगे। फिलहाल, अदालत के फैसले के बाद पूर्वांचल की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह का नाम एक बार फिर निर्णायक चर्चा का विषय बन गया है। (संवाद)
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आरोप लगने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सांसद रहते हुए उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया था। इसके बावजूद बृजभूषण ने न तो पार्टी के खिलाफ कोई मोर्चा खोला और न ही राजनीतिक सक्रियता कम की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों समेत पड़ोसी राज्यों में लगातार जनसंपर्क किया और अपने समर्थकों, विशेषकर क्षत्रिय समाज तथा खेल जगत से जुड़े लोगों के बीच संवाद बनाए रखा।
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गोंडा के नंदिनी नगर में आयोजित राष्ट्रकथा के दौरान प्रतिदिन हजारों लोगों की उपस्थिति और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों को बुलाकर वह यह संदेश देने में कामयाब रहे कि क्षेत्र में उनका जनाधार अब भी प्रभावी है। इस कथा में धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, सुशील सिंह, पवन सिंह समेत पूर्वांचल के कई क्षत्रप और अयोध्या के चार दर्जन से अधिक मठों के मठाधीश शामिल हुए थे। कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों, विशेषकर राजपूत नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं तेज रही हैं। ऐसे माहौल में अदालत से मिली राहत ने बृजभूषण की राजनीतिक संभावनाओं को नया आयाम दिया है।
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स्वयं बृजभूषण कई बार कह चुके हैं, ‘मैं जीवित रहा तो दुनिया की कोई ताकत हमें चुनाव लड़ने से रोक नहीं पाएगी। हम किस पार्टी से और कहां से चुनाव लड़ेंगे, यह छह महीने पहले बताएंगे।’ इससे पूर्व उनके सांसद पुत्र करण भूषण सिंह कह चुके हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में वह और उनके पिता (बृजभूषण शरण सिंह) दोनों भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे और जीतकर एकसाथ लोकसभा जाएंगे। फिलहाल, अदालत के फैसले के बाद पूर्वांचल की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह का नाम एक बार फिर निर्णायक चर्चा का विषय बन गया है। (संवाद)