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Gonda News: झूठा साक्ष्य देने के मामले में बृजभूषण को राहत
Mon, 17 Mar 2025 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 17 Mar 2025 11:46 PM IST
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गोंडा। अदालत में झूठा साक्ष्य देने के मामले में फंसे कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को फौरी तौर पर राहत मिल गई है। सोमवार को अदालत में हाजिर हुए पूर्व सांसद की क्षमा याचना पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जारी गैर जमानती वारंट को निरस्त कर दिया। हालांकि पूर्व सांसद के जुर्म इकबाल करने के प्रार्थनापत्र पर मंगलवार को सुनवाई होनी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार साल 1990 में नवाबगंज थाने में दर्ज कराए गए केस में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि आठ सितंबर 1990 को शाम चार बजे वह मोहल्ला पड़ाव स्थित अपने घर में साथियों के साथ बैठे थे। तभी नगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रुद्रपुर विसेन निवासी उग्रसेन सिंह, देहात कोतवाली क्षेत्र के पंडरी कृपाल निवासी वीरेंद्र कुमार मिश्र और पाठकपुरवा खैरा काॅलोनी निवासी रमेश चंद्र मिश्र आए और बातचीत करने लगे। इसी बीच तैश में आकर उग्रसेन सिंह ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर कर दिया, लेकिन वह बच गए। उग्रसेन के उकसाने पर वीरेंद्र कुमार मिश्र और रमेश चंद्र मिश्र ने चाकू से हमला कर दिया। जिससे उनकी बांह पर चोट आई। इस बीच कई लोग आ गए और सभी को पकड़ लिया गया।
विवेचना में साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान आरोपी अभियुक्त उग्रसेन सिंह और रमेश चंद्र मिश्र की मृत्यु हो गई। ट्रायल के दौरान वादी मुकदमा बृजभूषण शरण सिंह अपने पूर्व के बयान से मुकर गए और अभियुक्त वीरेंद्र कुमार मिश्र को देखकर कहा कि इन्होंने उन पर जानलेवा हमला नहीं किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को दोषमुक्त करने की मांग की तो 11 सितंबर 2024 को मामले में निर्णय सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने आरोपी वीरेंद्र कुमार मिश्र को दोषमुक्त कर दिया।
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न्यायालय ने आरोपी अभियुक्त के विरुद्ध अदालत के समक्ष झूठा साक्ष्य देने के संबंध में वादी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रकीर्ण दांडिक वाद दर्ज करने का आदेश दिया। 17 सितंबर 2024 को केस दर्ज कर न्यायालय ने बृजभूषण शरण सिंह को हाजिर होने के लिए सम्मन जारी किया। वह अदालत में हाजिर नहीं हुए तो कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। हालांकि सोमवार को उन्होंने अदालत में उपस्थित होकर क्षमा याचना की तो अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार ने वारंट निरस्त कर दिया। अदालत ने जुर्म इकबाल के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिए 18 मार्च 2025 को तिथि मुकर्रर की है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार साल 1990 में नवाबगंज थाने में दर्ज कराए गए केस में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि आठ सितंबर 1990 को शाम चार बजे वह मोहल्ला पड़ाव स्थित अपने घर में साथियों के साथ बैठे थे। तभी नगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रुद्रपुर विसेन निवासी उग्रसेन सिंह, देहात कोतवाली क्षेत्र के पंडरी कृपाल निवासी वीरेंद्र कुमार मिश्र और पाठकपुरवा खैरा काॅलोनी निवासी रमेश चंद्र मिश्र आए और बातचीत करने लगे। इसी बीच तैश में आकर उग्रसेन सिंह ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर कर दिया, लेकिन वह बच गए। उग्रसेन के उकसाने पर वीरेंद्र कुमार मिश्र और रमेश चंद्र मिश्र ने चाकू से हमला कर दिया। जिससे उनकी बांह पर चोट आई। इस बीच कई लोग आ गए और सभी को पकड़ लिया गया।
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विवेचना में साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान आरोपी अभियुक्त उग्रसेन सिंह और रमेश चंद्र मिश्र की मृत्यु हो गई। ट्रायल के दौरान वादी मुकदमा बृजभूषण शरण सिंह अपने पूर्व के बयान से मुकर गए और अभियुक्त वीरेंद्र कुमार मिश्र को देखकर कहा कि इन्होंने उन पर जानलेवा हमला नहीं किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को दोषमुक्त करने की मांग की तो 11 सितंबर 2024 को मामले में निर्णय सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने आरोपी वीरेंद्र कुमार मिश्र को दोषमुक्त कर दिया।
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न्यायालय ने आरोपी अभियुक्त के विरुद्ध अदालत के समक्ष झूठा साक्ष्य देने के संबंध में वादी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रकीर्ण दांडिक वाद दर्ज करने का आदेश दिया। 17 सितंबर 2024 को केस दर्ज कर न्यायालय ने बृजभूषण शरण सिंह को हाजिर होने के लिए सम्मन जारी किया। वह अदालत में हाजिर नहीं हुए तो कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। हालांकि सोमवार को उन्होंने अदालत में उपस्थित होकर क्षमा याचना की तो अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार ने वारंट निरस्त कर दिया। अदालत ने जुर्म इकबाल के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिए 18 मार्च 2025 को तिथि मुकर्रर की है।