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शाम होते ही इमरजेंसी सेवाओं पर लग जाता ब्रेक,सीएचसी पर भटकते रहते मरीज

Mon, 08 Nov 2021 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 10:48 PM IST
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Brake on emergency service at dusk, patients wandering
गोंडा के परसपुर सीएचसी पर जमीन पर लेटे तीमारदार। - फोटो : GONDA
गोंडा। सभी को बेहतर व मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए बनाए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर शाम होते ही इमरजेंसी सेवाओं पर ब्रेक लग जाता है। सूरज ढलते ही यहां की इमरजेंसी सेवा भगवान भरोसे हो जाती है। तैनात चिकित्सक से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ शाम पांच बजे के बाद घर चले जाते हैं।
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ऐसे में रात में सीएचसी पर आने वाले मरीजों को न डॉक्टर मिल पाते हैं न ही दवाएं। यहां आने वाले मरीजों को नाइट ड्यूटी पर मौजूद रहने वाले चपरासी व चौकीदार के भरोसे ही रहना पड़ता है।
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बीते रविवार की रात अमर उजाला की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली सरकारी इलाज की जमीनी हकीकत को स्वयं परखा। इस दौरान सामने आया कि शाम ढलते ही सीएचसी की आपातकालीन सेवाओं का संचालन पटरी से उतर जाता है।
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ऐसे में आने वाले मरीजों को इलाज न मिलने पर दूर तक दौड़ लगाने की परेशानी भी उठानी पड़ती है। इसके लिए सीएचसी पर तैनात जिम्मेदार जहां इमरजेंसी ड्यूटी न होने की बात कह कर बचते दिखे वहीं निगरानी करने वाले अधिकारी लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की बात कह कर चुप्पी साधते दिखे। पेश है एक रिपोर्ट
सीएचसी परसपुर में रात में चपरासी व चौकीदार को छोड़कर कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिलता है। रात साढ़े नौ बजे सीएचसी के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक युवक ठंड से कांप रहा था। बेड पर न तो चद्दर थी न ही कोई कंबल था। वार्ड के बाहर एक महिला डॉक्टर की राह देख रही थी।
मधईपुर निवासी भर्ती मरीज के चाचा अरुण कुमार सिंह ने बताया कि उसका भतीजा आशीष सिंह (16) को तेज बुखार था। जिसे लगभग 7 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां कोई डॉक्टर नहीं था। चीफ फार्मासिस्ट कमलेश कुमार पाठक के आवास पर बुुलाने गया तो उन्होंने आवास पर ही मरीज को लाने को कहा, जहां उन्होंने मरीज को दवा व इंजेक्शन दिया।
सीएचसी पर सिर्फ स्वीपर कम चौकीदार योगेंद्र बहादुर ही ड्यूटी करता मिला। सीएचसी अधीक्षक डॉ लोकेश शुक्ला से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सीएचसी पर इमरजेंसी ड्यूटी नहीं होती है।
बेलसर सीएचसी के इमरजेंसी कक्ष में रखी डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली। प्रसव कक्ष में कोई डॉक्टर नहीं दिखाई पड़ा। शायद सीएचसी के बदहाली से तंग आकर लोगों ने यहां आना ही बंद कर दिया, जिससे एक भी मरीज नहीं दिखाई पड़ा। अस्पताल में पूरी तरह सन्नाटा रहा।
सीएचसी मनकापुर में भी 24 घंटे सुलभ सरकारी इलाज का दावा खोखला साबित दिखा। यहां भी इमरजेंसी में डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। सीएचसी पर एक प्रसूता अपने नवजात के साथ बिना चद्दर वाले बेड पर लेटी दिखाई दी। ठंड से बचाव के लिए उसके पास कंबल तक नहीं था।
प्रसूता मुस्कान के तीमारदार एहसानुल हक ने बताया कि यहां प्रसव कराने के लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं है। स्टाफ नर्स लीलावती यादव ने प्रसव कराया है। इतना ही नहीं सभी दवाएं भी बाहर से ही खरीदनी पड़ी है। प्रसव के बाद तैनात फार्मासिस्ट ही मरीज को देखकर दवाएं बताता है।

कटरा बाजार में भी इमरजेंसी में रात के समय इलाज की सुविधा नदारत मिली। मौक पर एक एएनएम और एक फार्मासिस्ट ही ड्यूटी पर मौजूद मिले। इस दौरान कोई डॉक्टर नहीं मिला। मरीजों को देने के लिए इमरजेंसी में दवाएं तक मौजूद नही थी। मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि यहां शाम ढलते ही डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक सभी घर चले जाते हैं।
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