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Gonda News: ब्राह्मण चेहरे पर दांव, 2027 की बिसात बिछाने में जुटी भाजपा
Fri, 27 Feb 2026 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 27 Feb 2026 11:29 PM IST
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भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष इकबाल बहादुर तिवारी का स्वागत करते जिपं अध्यक्ष घनश्याम मिश्रा व
गोंडा। जिले की राजनीति में बड़ा संदेश देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इकबाल बहादुर तिवारी को तीसरी बार जिलाध्यक्ष बनाकर साफ संकेत दिया है कि आने वाले पंचायत चुनाव और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन अब अनुभव, जातीय समीकरण और बूथ प्रबंधन की त्रिस्तरीय रणनीति पर आगे बढ़ेगा। ब्राह्मण बहुल माने जाने वाले गोंडा में यह नियुक्ति महज संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है।
पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं को साधते हुए सवर्ण समाज को एकजुट करने और साथ ही अन्य वर्गों में संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक चुनावी परिणामों में ब्राह्मण मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही है। ऐसे में तिवारी की ताजपोशी को 2027 की तैयारी का अहम कदम माना जा रहा है।
संघ पृष्ठभूमि से जुड़े और लंबे समय से संगठन में सक्रिय तिवारी को जमीनी नेता माना जाता है। बेलसर क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच सीधी पहुंच उन्हें अन्य दावेदारों पर बढ़त दिलाती रही है। इकबाल बहादुर तिवारी ऐसे समय में कमान संभाल रहे हैं, जब जिले में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज हो चुकी है। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष सहित 16 में से 15 ब्लॉक प्रमुख भाजपा समर्थित रहे थे। इस सियासी बढ़त को बनाए रखना उनकी पहली परीक्षा होगी।
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वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। पार्टी नेतृत्व की मंशा 2027 में इस प्रदर्शन को दोहराने की है। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को दोबारा मैदान में उतारना और सामाजिक समीकरणों को साधना रणनीति का हिस्सा होगा।
गुटबाजी पर नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती
भाजपा में विभिन्न शक्ति केंद्रों की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। पूर्व जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप के कार्यकाल के बाद संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ था। ऐसे में तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक गुटबाजी को साधना और सभी धड़ों को साथ लेकर चलना होगी।
-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट वितरण और पंचायत चुनाव के समीकरणों में असंतोष को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। हालांकि दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके तिवारी की अधिकांश गुटों में पैठ मानी जाती है।
विवादों की छाया के बाद वापसी
वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव में बेलसर नगर पंचायत के टिकट को लेकर भितरघात के आरोपों के बीच तिवारी को पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि लोकसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका और संसदीय चुनाव में पार्टी की जीत के बाद उनकी संगठनात्मक क्षमता को फिर सराहा गया। यह वापसी दर्शाती है कि संगठन ने अनुभव और प्रभाव को प्राथमिकता दी है।
कल्याण सिंह का संकेत और बढ़ी सियासी पकड़
वर्ष 2000 के एक चर्चित प्रकरण के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने परसदा गांव स्थित इकबाल बहादुर तिवारी के घर पहुंचे। इस दौरान भुट्टा व मट्ठा ग्रहण करना उस समय बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया था। इसके बाद उनकी संगठनात्मक हैसियत और मजबूत हुई और वे जिले की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे।
संगठन का भरोसा, कार्यकर्ताओं में उत्साह
नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, पंचायत चुनाव में बढ़त बनाए रखना और 2027 के लिए मजबूत जमीन तैयार करना उनकी प्राथमिकता होगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या वे ब्राह्मण-सवर्ण समीकरण के साथ पिछड़े और दलित मतदाताओं में भी संतुलन बना पाएंगे? क्या वे आंतरिक गुटबाजी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकेंगे? और क्या भाजपा गोंडा में अपना ‘सात में सात’ का रिकॉर्ड दोहरा पाएगी? फिलहाल इतना तय है कि गोंडा की सियासत में इकबाल बहादुर तिवारी की ताजपोशी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
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पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं को साधते हुए सवर्ण समाज को एकजुट करने और साथ ही अन्य वर्गों में संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक चुनावी परिणामों में ब्राह्मण मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही है। ऐसे में तिवारी की ताजपोशी को 2027 की तैयारी का अहम कदम माना जा रहा है।
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संघ पृष्ठभूमि से जुड़े और लंबे समय से संगठन में सक्रिय तिवारी को जमीनी नेता माना जाता है। बेलसर क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच सीधी पहुंच उन्हें अन्य दावेदारों पर बढ़त दिलाती रही है। इकबाल बहादुर तिवारी ऐसे समय में कमान संभाल रहे हैं, जब जिले में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज हो चुकी है। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष सहित 16 में से 15 ब्लॉक प्रमुख भाजपा समर्थित रहे थे। इस सियासी बढ़त को बनाए रखना उनकी पहली परीक्षा होगी।
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वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। पार्टी नेतृत्व की मंशा 2027 में इस प्रदर्शन को दोहराने की है। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को दोबारा मैदान में उतारना और सामाजिक समीकरणों को साधना रणनीति का हिस्सा होगा।
गुटबाजी पर नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती
भाजपा में विभिन्न शक्ति केंद्रों की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। पूर्व जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप के कार्यकाल के बाद संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ था। ऐसे में तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक गुटबाजी को साधना और सभी धड़ों को साथ लेकर चलना होगी।
-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट वितरण और पंचायत चुनाव के समीकरणों में असंतोष को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। हालांकि दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके तिवारी की अधिकांश गुटों में पैठ मानी जाती है।
विवादों की छाया के बाद वापसी
वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव में बेलसर नगर पंचायत के टिकट को लेकर भितरघात के आरोपों के बीच तिवारी को पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि लोकसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका और संसदीय चुनाव में पार्टी की जीत के बाद उनकी संगठनात्मक क्षमता को फिर सराहा गया। यह वापसी दर्शाती है कि संगठन ने अनुभव और प्रभाव को प्राथमिकता दी है।
कल्याण सिंह का संकेत और बढ़ी सियासी पकड़
वर्ष 2000 के एक चर्चित प्रकरण के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने परसदा गांव स्थित इकबाल बहादुर तिवारी के घर पहुंचे। इस दौरान भुट्टा व मट्ठा ग्रहण करना उस समय बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया था। इसके बाद उनकी संगठनात्मक हैसियत और मजबूत हुई और वे जिले की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे।
संगठन का भरोसा, कार्यकर्ताओं में उत्साह
नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, पंचायत चुनाव में बढ़त बनाए रखना और 2027 के लिए मजबूत जमीन तैयार करना उनकी प्राथमिकता होगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या वे ब्राह्मण-सवर्ण समीकरण के साथ पिछड़े और दलित मतदाताओं में भी संतुलन बना पाएंगे? क्या वे आंतरिक गुटबाजी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकेंगे? और क्या भाजपा गोंडा में अपना ‘सात में सात’ का रिकॉर्ड दोहरा पाएगी? फिलहाल इतना तय है कि गोंडा की सियासत में इकबाल बहादुर तिवारी की ताजपोशी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।