{"_id":"63011ff3238c3a5e0d27aae7","slug":"asha-bahu-golden-card-gonda-gonda-news-lko644498761","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन हजार आशा घर-घर जाकर बनाएंगी गोल्डन कार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन हजार आशा घर-घर जाकर बनाएंगी गोल्डन कार्ड
विज्ञापन
फोटो-5 गोंडा के परसपुर में गोल्डन कार्ड बनाता आरोग्य मित्र। -संवाद
- फोटो : GONDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। आयुष्मान भारत योजना के तहत आशा कार्यकर्ता अब लाभार्थियों के घर-घर जाकर उनका गोल्डन कार्ड बनाएंगी। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं के फोन में एप डाउनलोड करवाकर केवाईसी करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आयुष्मान भारत योजना के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक निशुल्क इलाज की सुविधा दिए जाने के लिए 2,76,098 परिवारों को चयनित कर उनके प्रत्येक सदस्य का गोल्डन कार्ड बनाया जाना था। यह सुविधा अभीतक करीब 143,000 परिवारों तक ही पहुंच सकी है, जबकि 1,33,098 परिवार इस सुविधा से वंचित हैं। गोल्डन कार्ड बनाने की धीमी रफ्तार को लेकर अमर उजाला में ‘कार्ड बनाने में ढिलाई जालसाजों ने काटी मलाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। इसको संज्ञान में लेकर मंडलायुक्त डॉ. एमपी अग्रवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं के मंडलीय समीक्षा बैठक में कार्ड बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए।
शनिवार को आयुष्मान भारत के जिला सूचना प्रबंधक अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि गोल्डन कार्ड बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाएगा। घर-घर जाकर लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाएंगी। इसके लिए आशाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
विज्ञापन
एप से बनाया जाएगा गोल्डन कार्ड
आशाओं को गोल्डन कार्ड बनाने के लिए पीएमजेवाई का एप लांच किया गया है। एप को आशा कार्यकर्ताओं को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा। कार्यदायी संस्था एनएचए की ओर से आशाओं को यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। इसके बाद आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लाभार्थी का केवाइसी (सत्यापन) कर गोल्डन कार्ड बनाएंगी। लाभार्थी आयुष्मान मित्र, जन सेवा केंद्र पर जाकर अपना प्रिंट ले सकेगा। आशा कार्यकर्ताओं को प्रति गोल्डन कार्ड के अनुसार प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि आशा कार्यकर्ताओं के सीधे खाते में भेजी जाएगी।
लक्ष्य की तुलना में नहीं बन रहे कार्ड
लाभार्थियों के जागरूक न होने के कारण गोल्डन कार्ड लक्ष्य के सापेक्ष नहीं बन पा रहा है। सर्वर की समस्या भी आ रही है। अब लाभार्थियों के घर जाकर आशा कार्यकर्ताओं के गोल्डन कार्ड बनाने से अभियान रफ्तार पकड़ेगा। जल्द की लक्ष्य के सापेक्ष गोल्डन कार्ड बनाए जा सकेंगे।
डॉ. संदीप तिवारी, जिला कार्यक्रम समन्वयक
विज्ञापन
आयुष्मान भारत योजना के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक निशुल्क इलाज की सुविधा दिए जाने के लिए 2,76,098 परिवारों को चयनित कर उनके प्रत्येक सदस्य का गोल्डन कार्ड बनाया जाना था। यह सुविधा अभीतक करीब 143,000 परिवारों तक ही पहुंच सकी है, जबकि 1,33,098 परिवार इस सुविधा से वंचित हैं। गोल्डन कार्ड बनाने की धीमी रफ्तार को लेकर अमर उजाला में ‘कार्ड बनाने में ढिलाई जालसाजों ने काटी मलाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। इसको संज्ञान में लेकर मंडलायुक्त डॉ. एमपी अग्रवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं के मंडलीय समीक्षा बैठक में कार्ड बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
शनिवार को आयुष्मान भारत के जिला सूचना प्रबंधक अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि गोल्डन कार्ड बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाएगा। घर-घर जाकर लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाएंगी। इसके लिए आशाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
विज्ञापन
एप से बनाया जाएगा गोल्डन कार्ड
आशाओं को गोल्डन कार्ड बनाने के लिए पीएमजेवाई का एप लांच किया गया है। एप को आशा कार्यकर्ताओं को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा। कार्यदायी संस्था एनएचए की ओर से आशाओं को यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। इसके बाद आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लाभार्थी का केवाइसी (सत्यापन) कर गोल्डन कार्ड बनाएंगी। लाभार्थी आयुष्मान मित्र, जन सेवा केंद्र पर जाकर अपना प्रिंट ले सकेगा। आशा कार्यकर्ताओं को प्रति गोल्डन कार्ड के अनुसार प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि आशा कार्यकर्ताओं के सीधे खाते में भेजी जाएगी।
लक्ष्य की तुलना में नहीं बन रहे कार्ड
लाभार्थियों के जागरूक न होने के कारण गोल्डन कार्ड लक्ष्य के सापेक्ष नहीं बन पा रहा है। सर्वर की समस्या भी आ रही है। अब लाभार्थियों के घर जाकर आशा कार्यकर्ताओं के गोल्डन कार्ड बनाने से अभियान रफ्तार पकड़ेगा। जल्द की लक्ष्य के सापेक्ष गोल्डन कार्ड बनाए जा सकेंगे।
डॉ. संदीप तिवारी, जिला कार्यक्रम समन्वयक