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Gonda News: डिप्टी सीएम के जाते ही जिम्मेदार भूले पढ़ाया गया पाठ
Wed, 09 Jul 2025 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 09 Jul 2025 11:19 PM IST
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गोंडा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मंगलवार को 37 मिनट तक स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने का पाठ पढ़ाया। खामियों पर फटकार भी लगाई। जिम्मेदारों ने भी सुधार करने का संकल्प लिया, लेकिन डिप्टी सीएम के वापस रवाना होते ही जिम्मेदार उनका पढ़ाया पाठ भुला बैठे।
डिप्टी सीएम से वादा किया गया था कि शासनादेश के अनुसार मरीजों को शेड्यूल के अनुसार अलग-अलग रंग के चादर दिए जाएंगे। लेकिन, बुधवार को मेडिकल कॉलेज में अधिकांश मरीजों के बेड से सरकारी चादर गायब दिखी। बाहर की दवा न लिखने पर सख्त निर्देश के बावजूद कई मरीजों को बाहर की दवाएं भी लिखी गई। जिम्मेदार व मातहत दोनों ही ड्रेसकोड का पालन नहीं करते दिखे।
घर का शाल व कंबल बिछाकर लेटे मरीज
इमरजेंसी वार्ड में बेड नंबर तीन पर भर्ती पंडरी कृपाल निवासी दिनेश नारायण की बेड पर सरकारी चादर नहीं बल्कि घर से लाया गया शाल बिछा मिला। पांच नंबर बेड पर किडनी की समस्या से पीड़ित डेहरास निवासी सत्तार अली के बेड पर भी घर का कंबल बिछा था। कई बेड पर सफेद रंग के चादर दिखाई पड़े। जबकि डिप्टी सीएम ने अलग-अलग दिन अगल अलग रंग के चादर मरीजों को देने का निर्देश दिया था।
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ऐसे तय है चादरों का रंग
सोमवार- सफेद रंग
मंगलवार- नारंगी रंग
बुधवार- हरा रंग
गुरुवार- पीला रंग
शुक्रवार- बैगनी रंग
शनिवार- नीला रंग
रविवार- भूरा
ड्रेसकोड दरकिनार, जींस टीशर्ट में दिखे डॉक्टर
-डिप्टी सीएम ने ड्रेस कोड पालन करने का निर्देश दिया था। बुधवार को अधिकांश डॉक्टर बिना एप्रेन पहने जींस टीशर्ट में दिखाई पड़े। ओपीडी, इमरजेंसी व वार्डों में तैनात पैरामेडिकल कर्मी भी ड्रेसकोड का पालन नहीं करते दिखाई पड़े। जिससे स्वास्थ्यकर्मी व बाहरी दलाल में फर्क कर पाना मुश्किल हो रहा था।
थमा नहीं बाहर की दवा लिखने का सिलसिला:
स्वास्थ्य मंत्री ने बाहर की दवा न लिखने का निर्देश दिया था। बुधवार को पर्चा काउंटर पर संगीता देवी, रीता सहित अन्य लोगों को बाहर की दवाएं लिखी गई थी। मरीजों के हाथों में दो पर्ची दिखाई पड़ी, जिसमें एक में अस्पताल की दवा तथा दूसरे में बाहर की दवाओं की छोटी पर्ची दिखाई पड़ी।
नियमित निरीक्षण कर सुधारी जाएगी व्यवस्था
ड्रेस कोड के पालन करने की जिम्मेदारी सभी विभागाध्यक्षों को दी गई है। बाहर की दवा, चादर व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लेने के लिए नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। अव्यवस्थाओं की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एम डब्ल्यू खान, चिकित्सा अधीक्षक मेडिकल कॉलेज
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डिप्टी सीएम से वादा किया गया था कि शासनादेश के अनुसार मरीजों को शेड्यूल के अनुसार अलग-अलग रंग के चादर दिए जाएंगे। लेकिन, बुधवार को मेडिकल कॉलेज में अधिकांश मरीजों के बेड से सरकारी चादर गायब दिखी। बाहर की दवा न लिखने पर सख्त निर्देश के बावजूद कई मरीजों को बाहर की दवाएं भी लिखी गई। जिम्मेदार व मातहत दोनों ही ड्रेसकोड का पालन नहीं करते दिखे।
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घर का शाल व कंबल बिछाकर लेटे मरीज
इमरजेंसी वार्ड में बेड नंबर तीन पर भर्ती पंडरी कृपाल निवासी दिनेश नारायण की बेड पर सरकारी चादर नहीं बल्कि घर से लाया गया शाल बिछा मिला। पांच नंबर बेड पर किडनी की समस्या से पीड़ित डेहरास निवासी सत्तार अली के बेड पर भी घर का कंबल बिछा था। कई बेड पर सफेद रंग के चादर दिखाई पड़े। जबकि डिप्टी सीएम ने अलग-अलग दिन अगल अलग रंग के चादर मरीजों को देने का निर्देश दिया था।
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ऐसे तय है चादरों का रंग
सोमवार- सफेद रंग
मंगलवार- नारंगी रंग
बुधवार- हरा रंग
गुरुवार- पीला रंग
शुक्रवार- बैगनी रंग
शनिवार- नीला रंग
रविवार- भूरा
ड्रेसकोड दरकिनार, जींस टीशर्ट में दिखे डॉक्टर
-डिप्टी सीएम ने ड्रेस कोड पालन करने का निर्देश दिया था। बुधवार को अधिकांश डॉक्टर बिना एप्रेन पहने जींस टीशर्ट में दिखाई पड़े। ओपीडी, इमरजेंसी व वार्डों में तैनात पैरामेडिकल कर्मी भी ड्रेसकोड का पालन नहीं करते दिखाई पड़े। जिससे स्वास्थ्यकर्मी व बाहरी दलाल में फर्क कर पाना मुश्किल हो रहा था।
थमा नहीं बाहर की दवा लिखने का सिलसिला:
स्वास्थ्य मंत्री ने बाहर की दवा न लिखने का निर्देश दिया था। बुधवार को पर्चा काउंटर पर संगीता देवी, रीता सहित अन्य लोगों को बाहर की दवाएं लिखी गई थी। मरीजों के हाथों में दो पर्ची दिखाई पड़ी, जिसमें एक में अस्पताल की दवा तथा दूसरे में बाहर की दवाओं की छोटी पर्ची दिखाई पड़ी।
नियमित निरीक्षण कर सुधारी जाएगी व्यवस्था
ड्रेस कोड के पालन करने की जिम्मेदारी सभी विभागाध्यक्षों को दी गई है। बाहर की दवा, चादर व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लेने के लिए नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। अव्यवस्थाओं की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एम डब्ल्यू खान, चिकित्सा अधीक्षक मेडिकल कॉलेज