{"_id":"597cb4ef4f1c1b94198b468c","slug":"81501345007-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल की पढ़ाई छोड़ घर में चूल्हा चौका कर रही 268 बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल की पढ़ाई छोड़ घर में चूल्हा चौका कर रही 268 बेटियां
Updated Sat, 29 Jul 2017 09:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पढ़ाई छोड़ चूल्हा चौका कर रही 268 बेटियां
बेसिक शिक्षा विभाग अनजान, आंगनबाड़ी के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा
उमानाथ तिवारी
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल चलो रैली व नामांकन मेले जैसे कार्यक्रमों के आयोजन के बावजूद शत प्रतिशत बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराने का दावा छलावा साबित हो रहा है। कक्षा पांच पास करने के बाद 11 से 14 वर्ष तक की 268 बेटियां अपनी स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ चुकी हैं और वह अपने घर पर चूल्हा चौका संभाल रहीं हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सर्वेक्षण के दौरान इसका खुलासा हुआ है। इस खुलासे के शत प्रतिशत बच्चों का नामांकन का दावे पर सवालिया निशान लगा गया है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद 6 से 14 वर्ष तक के बालक बालिकाओं को अनिवार्य रुप से शिक्षा दिलाए जाने का प्रावधान है। इसके लिए सरकार परिषदीय स्कूलों में पढने वाले बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक, स्कूल यूनीफार्म व दोपहर का भोजन भी उपलब्ध कराती है। स्कूल में बच्चों को सप्ताह में एक दिन दूध व फल देने की योजना भी संचालित है। इस वर्ष से सरकार स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के लिए जूता मोजा व टाई बेल्ट देने जा रही है। इन सबके अलावा नामांकन ठहराव को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग स्कूल चलो रैली, नामांकन मेला, उपस्थिति अभियान व अन्य न जाने कितने अभियानों का संचालन करता है। इन अभियानों पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। स्कूलों में बच्चों के नामाकंन की असलियत जानने के लिए प्रत्येक वर्ष हाउस होल्ड सर्वे व बाल गणना कराई जाती है। बावजूद इसके स्कूलों में शत प्रतिशत बालक बालिकाओं के दावे पर विभाग के अफसर खरे नहीं उतर रहे हैं। स्कूलों में लगातार बच्चों का नामांकन घट रहा है। और तो और पांचवी पास करने के बाद छात्र छात्राएं स्कूलों से ड्राप आउट हो रहे हैं। इनमें बालिकाओं की संख्या सर्वाधिक है। हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए किशोरी बालिकाओं के सर्वेक्षण में 11 से 14 वर्ष तक के 268 बालिकाओं के स्कूल न जाने के रिपोर्ट सामने आई है। यह ऐसी बालिकाएं है जो पांचवीं के बाद स्कूल जाना छोड़ चुकी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के इस सर्वेक्षण ने बेसिक शिक्षा विभाग के उस हाउस होल्ड सर्वे व बाल गणना की रिपोर्टों की पोल खोल दी है जिसमें 6 से 14 वर्ष तक के शत प्रतिशत बच्चों का नामांकन स्कूलों में होने का दावा किया गया है।
इनसेट
हाउस होल्ड सर्वे में 105 बच्चे ड्रॉप आउट
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग ने आउट आफ स्कूल बच्चों की जानकारी के लिए मई माह में हाउस होल्ड सर्वे कराया था। इस हाउस होल्ड सर्वे में 105 बच्चों के स्कूल से ड्रॉपआउट होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में इसमें खामी बताकर इसे निरस्त कर दिया गया। इन खामियों के मद्देनजर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इस सर्वे को दोबारा करवा चुके हैं लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात है।
विज्ञापन
इनसेट
आठवीं के बाद बेटियों की पढ़ाई के लिए चलेगा ट्रांजिशन कार्यक्रम
गोंडा। आठवीं की पढ़ाई के बाद बेटियों का स्कूल जाना बंद न हो और वह आगे की शिक्षा ग्रहण कर सके इसके लिए यूनीसेफ के सहयोग से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान व सर्व शिक्षा अभियान साथ में समन्वय बनाकर इन बेटियों का प्रवेश माध्यमिक स्कूलों में करायेंगे। बेटियों को माध्यमिक स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए जिले में ट्रांजिशन कार्यक्रम की शुरुवात की गई है। इसके पहले इस कार्यक्रम को मंडल के बलरामपुर व श्रावस्ती जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा चुका है जहां इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं और आठवीं की पढ़ाई के बाद स्कूल छोडने वाली बेटियों की संख्या में सुधार आया है। बुधवार को जिलाधिकारी जेबी सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के अफसरों की बैठक कर इस कार्यक्रम के संबंध में चर्चा की गई।
वर्जन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सर्वेक्षण में 268 बालिकाओं के पढ़ाई छोड़ने की जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। अगर ऐसा है तो इनका पता लगाकर नामांकन स्कूलों में कराया जायेगा। इसके अलावा हाउस होल्ड सर्वे की रिपोर्ट में स्कूल से बाहर मिले बच्चें का नामांकन परिषदीय स्कूलों में कराया जा रहा है।
संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग अनजान, आंगनबाड़ी के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा
उमानाथ तिवारी
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल चलो रैली व नामांकन मेले जैसे कार्यक्रमों के आयोजन के बावजूद शत प्रतिशत बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराने का दावा छलावा साबित हो रहा है। कक्षा पांच पास करने के बाद 11 से 14 वर्ष तक की 268 बेटियां अपनी स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ चुकी हैं और वह अपने घर पर चूल्हा चौका संभाल रहीं हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सर्वेक्षण के दौरान इसका खुलासा हुआ है। इस खुलासे के शत प्रतिशत बच्चों का नामांकन का दावे पर सवालिया निशान लगा गया है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद 6 से 14 वर्ष तक के बालक बालिकाओं को अनिवार्य रुप से शिक्षा दिलाए जाने का प्रावधान है। इसके लिए सरकार परिषदीय स्कूलों में पढने वाले बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक, स्कूल यूनीफार्म व दोपहर का भोजन भी उपलब्ध कराती है। स्कूल में बच्चों को सप्ताह में एक दिन दूध व फल देने की योजना भी संचालित है। इस वर्ष से सरकार स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के लिए जूता मोजा व टाई बेल्ट देने जा रही है। इन सबके अलावा नामांकन ठहराव को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग स्कूल चलो रैली, नामांकन मेला, उपस्थिति अभियान व अन्य न जाने कितने अभियानों का संचालन करता है। इन अभियानों पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। स्कूलों में बच्चों के नामाकंन की असलियत जानने के लिए प्रत्येक वर्ष हाउस होल्ड सर्वे व बाल गणना कराई जाती है। बावजूद इसके स्कूलों में शत प्रतिशत बालक बालिकाओं के दावे पर विभाग के अफसर खरे नहीं उतर रहे हैं। स्कूलों में लगातार बच्चों का नामांकन घट रहा है। और तो और पांचवी पास करने के बाद छात्र छात्राएं स्कूलों से ड्राप आउट हो रहे हैं। इनमें बालिकाओं की संख्या सर्वाधिक है। हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए किशोरी बालिकाओं के सर्वेक्षण में 11 से 14 वर्ष तक के 268 बालिकाओं के स्कूल न जाने के रिपोर्ट सामने आई है। यह ऐसी बालिकाएं है जो पांचवीं के बाद स्कूल जाना छोड़ चुकी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के इस सर्वेक्षण ने बेसिक शिक्षा विभाग के उस हाउस होल्ड सर्वे व बाल गणना की रिपोर्टों की पोल खोल दी है जिसमें 6 से 14 वर्ष तक के शत प्रतिशत बच्चों का नामांकन स्कूलों में होने का दावा किया गया है।
विज्ञापन
इनसेट
हाउस होल्ड सर्वे में 105 बच्चे ड्रॉप आउट
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग ने आउट आफ स्कूल बच्चों की जानकारी के लिए मई माह में हाउस होल्ड सर्वे कराया था। इस हाउस होल्ड सर्वे में 105 बच्चों के स्कूल से ड्रॉपआउट होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में इसमें खामी बताकर इसे निरस्त कर दिया गया। इन खामियों के मद्देनजर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इस सर्वे को दोबारा करवा चुके हैं लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात है।
विज्ञापन
इनसेट
आठवीं के बाद बेटियों की पढ़ाई के लिए चलेगा ट्रांजिशन कार्यक्रम
गोंडा। आठवीं की पढ़ाई के बाद बेटियों का स्कूल जाना बंद न हो और वह आगे की शिक्षा ग्रहण कर सके इसके लिए यूनीसेफ के सहयोग से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान व सर्व शिक्षा अभियान साथ में समन्वय बनाकर इन बेटियों का प्रवेश माध्यमिक स्कूलों में करायेंगे। बेटियों को माध्यमिक स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए जिले में ट्रांजिशन कार्यक्रम की शुरुवात की गई है। इसके पहले इस कार्यक्रम को मंडल के बलरामपुर व श्रावस्ती जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा चुका है जहां इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं और आठवीं की पढ़ाई के बाद स्कूल छोडने वाली बेटियों की संख्या में सुधार आया है। बुधवार को जिलाधिकारी जेबी सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के अफसरों की बैठक कर इस कार्यक्रम के संबंध में चर्चा की गई।
वर्जन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सर्वेक्षण में 268 बालिकाओं के पढ़ाई छोड़ने की जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। अगर ऐसा है तो इनका पता लगाकर नामांकन स्कूलों में कराया जायेगा। इसके अलावा हाउस होल्ड सर्वे की रिपोर्ट में स्कूल से बाहर मिले बच्चें का नामांकन परिषदीय स्कूलों में कराया जा रहा है।
संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए