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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   80 million population in the dark for 48 hours

48 घंटों से अंधेरे में 80 लाख आबादी

Mon, 21 Aug 2017 11:05 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Mon, 21 Aug 2017 11:05 PM IST
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 राप्ती नदी में आई बाढ़ बिजली के लिए काल बन गई है। अभी तक इस नदी की बाढ़ से केवल उतरौला बिजलीघर ही बंद हुआ था। लेकिन रविवार को इसकी बाढ़ ने बस्ती मंडल सहित देवीपाटन मंडल के चार जिलों को भी अंधेरे में डुबो दिया। गोरखपुर से बस्ती आने वाली 220 केवी लाइन के 7 टावर बाढ़ की पानी में जलमग्न हो गए हैं।
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टावर ठीक होने में अभी 24 से 48 घंटे और लग सकते हैं। जबकि पिछले 48 घंटों से मंडल की 80 लाख ग्रामीण आबादी बिजली संकट का दंश पहले से ही झेल रही है।  गौरतलब है कि गोंडा को बस्ती से 220 केवी, सोहावल से 220 केवी व दर्शननगर फैजाबाद से 132 केवी बिजली पावर कॉर्पोरेशन से मिलती है।
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बिजली का वितरण गोंडा कंट्रोल मंडल के सभी चार जिलों में संचालित 132 केवी क्षमता के 13 बिजलीघरों को करता है। जहां से यही बिजली 33/11 केवी बिजलीघरों के मार्फत शहर-देहात में रह रहे लोगों के घरों तक जाती है। बताया जाता है कि रविवार की सुबह गोरखपुर से बस्ती आने वाली 220 केवी लाइन के 7 टावर राप्ती नदी की बाढ़ से टूटकर गोरखपुर-बस्ती के बीच बहने वाली आमी नदी में गिर पड़े।
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जिससे गोरखपुर स्थित 400 केवी बिजलीघर से बस्ती के साथ-साथ गोंडा को मिलने वाली सप्लाई भी बंद हो गई। हालांकि बस्ती को टांडा एनटीपीसी से जो बिजली मिल रही है, उससे सिर्फ बस्ती मंडल के शहरी इलाकों को ही बिजली दी जा सकती है। इसलिए बस्तीतसे गोंडा आने वाली सप्लाई को बस्ती से खोल दिया गया है। 

वहीं बस्ती जिले से मिलने वाली बिजली के एकदम से बंद हो जाने के कारण मंडल के चार जिलों में रह रही 80 ग्रामीण आबादी के सामने बिजली का जबरदस्त संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि जिन दो श्रोतों से गोंडा कंट्रोल को बिजली मिल रही है, वह इतनी नहीं है, जिससे शहर व देहात इलाकों को एक साथ चलाया जा सके।

इसलिए ग्रामीण इलाकों में बिजली की जबरदस्त कटौती शुरू हो गई है। गोंडा में तैनात पारेषण खंड विभाग के एक्सईएन सीपी पाण्डेय का कहना है कि गोरखपुर-बस्ती के बीच जिस जगह 7 हाईटेंशन टावरों के तार नदी में टूटकर गिरे हैं, वहां काम लगातार हो रहा है।


उम्मीद है कि मंगलवार तक हर हाल में बिजली बहाल हो जाएगी। सीपी पाण्डेय के मुताबिक देवीपाटन मंडल को एक दिन में औसतन 350 से 375 मेगावाट बिजली चाहिए होती है। जिसके सापेक्ष उनके पास बिजली की कुल उपलब्धता केवल 150 से 175 मेगावाट ही है। इसलिए शहरों को बिजली देकर ग्रामीण व तहसील इलाकों में रोस्टिंग की जा रही है।  
 
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