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एनजीटी के नये आदेश से कार्रवाई की जद में आएंगे जिले के 62 अस्पताल
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गोंडा में जिला अस्पताल के पीछे इस तरह डंप किया जा रहा है अस्पताली कचरा।
- फोटो : GONDA
गोंडा। मेडिकल कचरा फैलाने वाले अस्पतालों/नर्सिंगहोम, क्लीनिक, पैथालॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटरों से अब भारी जुर्माने की वसूली की जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्टों का सही तरीके से प्रबंधन न करने की दशा में अलग-अलग क्राइटेरिया के मुताबिक पर्यावरण मुआवजा शुल्क वसूल किये जाने का आदेश दिया है। एनजीटी ने कई चिकित्सा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करने के साथ देवीपाटन मंडल के चारों मुख्य चिकित्साधिकारियों व जिला अस्पताल के मुख्य अधीक्षकों को जांच कराकर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। एनजीटी के आदेश क्रम में जिले के स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कचरा फैलाने वाले अस्पतालों/नर्सिंग होम व पैथालॉजी सेंटरों से पर्यावरण मुआवजा वसूली की तैयारी शुरू की है। एनजीटी के आदेश पर जिले के 62 निजी अस्पतालों के अलावा करीब 40 पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर कार्रवाई की जद में आएंगे।
मेडिकल कचरा फैलाने के मामले में एनजीटी के प्रिंसपल बेंच नई दिल्ली के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व बेंच के मेंबर जस्टिस एसपी बांगडी, जस्टिस के रामकृष्णन व एक्सपर्ट मेंबर नागिन नंदा ने क्राइटेरिया तय कर पर्यावरण पर्यावरण शुल्क की वसूली किये जाने का आदेश दिया है। इस बारे में जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सही प्रबंधन न करने वाले संस्थानों पर एनजीटी ने देवी पाटन मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य, सीएमओ गोंडा, सीएमओ, बलरामपुर, सीएमओ बहराइच व सीएमओ श्रावस्ती के अलावा सभी जिला अस्पताल के सीएमएस को नये आदेश के तहत पर्यावरण शुल्क की वसूली नये फार्मूले के मुताबिक वसूल किये जाने की कार्रवाई किये जाने का आदेश दिया है।
वहीं एनजीटी के आदेश के क्रम में स्वास्थ्य निदेशालय की स्वास्थ्य सचिव वी हेकाली डिमोमी ने भी मंडल के सभी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से एनजीटी के नये आदेश के तहत पर्यावरण जुर्माने की वसूली करने का आदेश दिया है। एनजीटी व स्वास्थ्य सचिव के आदेश के पालन को लेकर विभाग ने प्लान शुरू कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में पंजीकृत 62 निजी अस्पतालों व करीब 40 पैथालॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटरों को कड़ा निर्देश जारी किया है। मेडिकल कचरे का सही निस्तारण न करने वाले मेडिकल प्रतिष्ठानों से पर्यावरण मुआवजे की वसूली की जाएगी।
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सीएमओ ने सभी नर्सिंगहोम संचालकों को भेजा नोटिस
गोंडा। चिकित्सालयों से जैव चिकित्सा अपशिष्ट के प्रबंधन के संबंध में जिले के सभी नर्सिंगहोम, निजी चिकित्सालय, पैथालॉजी लैब, क्लीनिक व अल्ट्रासाउंड संचालकों को नोटिस जारी किया है। सीएमओ ने चेतावनी दी है कि यदि जैव चिकित्सा कचरे का सही निस्तारण न पाया गया तो नियमानुसार नये प्रावधान के तहत पर्यावरण शुल्क की वसूली की जाएगी।
बहुत गंभीर है मेडिकल कचरे का खतरा
मेडिकल कचरा जनमानस के लिए बहुत ही बड़ा खतरा है। इस कचरे के संपर्क में आने से मनुष्य को एड्स, हेपेटाईटिस बी, अंधापन, श्वांस के अलावा त्वचा से संबंधित गंभीर रोग हो सकता है। इस बारे में जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनय गुप्ता का कहना है कि मेडिकल कचरे से खतरे से लोगों को जागरूक किये जाने की जरूरत है इसके अलावा किसी भी संस्थान में इसका प्रबंधन एनजीटी की गाइडलाइन के मुताबिक होना चाहिए।
मेडिकल अपशिष्ट का निस्तारण न करने वालों पर होगी कार्रवाई
जिले में संचालित मेडिकल संस्थानों से निकलने वाले मेडिकल कचरे का निस्तारण न करने वालों पर कार्रवाई होगी। इस बारे में एनजीटी की ओर से नये फार्मूले पर वसूली किये जाने का आदेश हुआ है। इसका पालन कराया जाएगा। इसके लिए सभी मेडिकल प्रतिष्ठानों को पत्र भेजकर नये नियमों से अवगत करा दिया गया है जल्द ही इसकी जांच करायी जाएगी। - डॉ. मधु गैरोला, जिला मुख्य चिकित्साधिकारी गोंडा।
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मेडिकल कचरा फैलाने के मामले में एनजीटी के प्रिंसपल बेंच नई दिल्ली के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व बेंच के मेंबर जस्टिस एसपी बांगडी, जस्टिस के रामकृष्णन व एक्सपर्ट मेंबर नागिन नंदा ने क्राइटेरिया तय कर पर्यावरण पर्यावरण शुल्क की वसूली किये जाने का आदेश दिया है। इस बारे में जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सही प्रबंधन न करने वाले संस्थानों पर एनजीटी ने देवी पाटन मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य, सीएमओ गोंडा, सीएमओ, बलरामपुर, सीएमओ बहराइच व सीएमओ श्रावस्ती के अलावा सभी जिला अस्पताल के सीएमएस को नये आदेश के तहत पर्यावरण शुल्क की वसूली नये फार्मूले के मुताबिक वसूल किये जाने की कार्रवाई किये जाने का आदेश दिया है।
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वहीं एनजीटी के आदेश के क्रम में स्वास्थ्य निदेशालय की स्वास्थ्य सचिव वी हेकाली डिमोमी ने भी मंडल के सभी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से एनजीटी के नये आदेश के तहत पर्यावरण जुर्माने की वसूली करने का आदेश दिया है। एनजीटी व स्वास्थ्य सचिव के आदेश के पालन को लेकर विभाग ने प्लान शुरू कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में पंजीकृत 62 निजी अस्पतालों व करीब 40 पैथालॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटरों को कड़ा निर्देश जारी किया है। मेडिकल कचरे का सही निस्तारण न करने वाले मेडिकल प्रतिष्ठानों से पर्यावरण मुआवजे की वसूली की जाएगी।
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सीएमओ ने सभी नर्सिंगहोम संचालकों को भेजा नोटिस
गोंडा। चिकित्सालयों से जैव चिकित्सा अपशिष्ट के प्रबंधन के संबंध में जिले के सभी नर्सिंगहोम, निजी चिकित्सालय, पैथालॉजी लैब, क्लीनिक व अल्ट्रासाउंड संचालकों को नोटिस जारी किया है। सीएमओ ने चेतावनी दी है कि यदि जैव चिकित्सा कचरे का सही निस्तारण न पाया गया तो नियमानुसार नये प्रावधान के तहत पर्यावरण शुल्क की वसूली की जाएगी।
बहुत गंभीर है मेडिकल कचरे का खतरा
मेडिकल कचरा जनमानस के लिए बहुत ही बड़ा खतरा है। इस कचरे के संपर्क में आने से मनुष्य को एड्स, हेपेटाईटिस बी, अंधापन, श्वांस के अलावा त्वचा से संबंधित गंभीर रोग हो सकता है। इस बारे में जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनय गुप्ता का कहना है कि मेडिकल कचरे से खतरे से लोगों को जागरूक किये जाने की जरूरत है इसके अलावा किसी भी संस्थान में इसका प्रबंधन एनजीटी की गाइडलाइन के मुताबिक होना चाहिए।
मेडिकल अपशिष्ट का निस्तारण न करने वालों पर होगी कार्रवाई
जिले में संचालित मेडिकल संस्थानों से निकलने वाले मेडिकल कचरे का निस्तारण न करने वालों पर कार्रवाई होगी। इस बारे में एनजीटी की ओर से नये फार्मूले पर वसूली किये जाने का आदेश हुआ है। इसका पालन कराया जाएगा। इसके लिए सभी मेडिकल प्रतिष्ठानों को पत्र भेजकर नये नियमों से अवगत करा दिया गया है जल्द ही इसकी जांच करायी जाएगी। - डॉ. मधु गैरोला, जिला मुख्य चिकित्साधिकारी गोंडा।