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डिमांड 1205 की और बिजली मिल रही 850 एम्पियर
Updated Mon, 24 Jul 2017 10:35 PM IST
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डिमांड 1205 की और बिजली मिल रही 850 एम्पियर
आईपीपी बंद होने से मंडल के चार जिलों में गहराया बिजली संकट
नहीं चालू हुई आईपीपी और चीनीमिलों के पावर प्लांट तो भीषण कटौती से जूझेगा मंडल
राजेश तिवारी
गोंडा। एक तरफ सरकार का शहर को 24 तो गांवों को 20 घंटे बिजली देने का प्लान तो दूसरी तरफ बिजली के लोड मैनेजमेंट की दिक्कत। ऊपर से एक के बाद एक विद्युतीकरण परियोजनाओं में नए जुडने वाले गांव। इन सबको बिजली मिलेगी कैसे, यह समस्या आने वाले दिनों में मंडल के सवा करोड़ लोगों के सामने एक बड़ी चुनौती बनने वाली है। क्योंकि पावर कारपोरेशन ने जिस उम्मीद के साथ तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवीए क्षमता का बिजलीघर बनाने की शुरूआत की थी। उसका सिर्फ और सिर्फ यही मकसद था कि देवीपाटन के चारो जिलों को बिना किसी कटौती के निर्बाध बिजली दी जाए। लेकिन 400 केवीए बिजलीघर का सपना अधूरा रहने से जो तैयारी पावर कारपोरेशन ने पांच साल गांव-गांव बिजली पहुंचाने के लिए की। उसपर लोड मैनेजमेंट न होने से अब पानी फिरने की नौबत आ गई है। क्योंकि मौजूदा वक्त देवीपाटन मंडल को एक दिन में 1205 एम्यिर बिजली की जरूरत है जबकि बिजली सिर्फ 850 एम्पियर ही मिल पा रही है। पेश है रिपोर्ट-
इनसेट
पहले क्या थे हालात
जिले में आज से 6 महीने पहले भी पावर कारपोरेशन को 250 एम्पियर बिजली बस्ती 220 केवीए बिजलीघर से तो सोहावल फैजाबाद से 600 एम्पियर बिजली मिलती थी। लेकिन तब जिले में संचालित बजाज और उतरौला के आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) व चीनीमिलों के पावर प्लाटों से 195 मेगावाट बिजली पावर कॉरपोरेशन को अतिरिक्त मिल जाती थी, जिससे बिजली की कुल उपलब्धता 850 एम्पियर में 350 एम्पियर बिजाली का लोड जुड़ जाता था और 1250 एम्पियर के सापेक्ष 1200 एम्पियर बिजली पावर कॉरपोरेशन के पास मंडल के सभी चार जिलों को बिजली देने के लिए पर्याप्त रहती थी।
इनसेट
अब क्या हो गए
बस्ती से 250 तो सोहावल फैजाबाद से 650 एम्पियर लोड पावर कारपोरेशन को अभी भी मिल रहा, जबकि आईपीपी और चीनीमिलों के पावर प्लांट बंद होने से 350 एम्पियर बिजली का लोड एकदम से कम हो गया है। वहीं तमाम तरह की विद्युतीकरण परियोजना में विद्युतीकृत होने वाले गांवों/मजरों की संख्या बढने से मंडल के सभी चार जिलों में बिजली का लोड अभी 1205 एम्पियर है। इसमें से 681 एम्पियर बिजली की रोजाना खपत अकेले गोंडा में होती है। जबकि 262-262 एम्पियर यानि 524 एम्पियर बिजली की खपत 220 केवीए के दो बिजलीघरों में हो रही है। इस तरह से एक दिन में मंडल के सभी चार जिलों में बिजली का लोड कुल 1205 एम्पियर होता है।
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बाक्स
मंडल की इन-इन चीनीमिलों से मिलती थी 195 मेगावाट बिजली
आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर)
उतरौला चीनीमिल-90 मेगावाट
कुंदुरखी चीनीमिल-90 मेगावाट
कोजेन (को-जेनरेशन प्लांट)
बलरामपुर चीनीमिल बलरामपुर-05 मेगावाट
बजाज चीनीमिल इटईमैदा उतरौला-05 मेगावाट
मनकापुर चीनीमिल मनकापुर-05 मेगावाट
बजाज चीनीमिल कुंदुरखी-05 मेगावाट
नोट : बजाज चीनीमिल ने अपने यहां फरवरी महीने में ही बिजली का उत्पादन बगास न होने के कारण बंद कर दिया था।
इनसेट
बन जाता बिजलीघर तो नहीं पड़ती किसी की जरूरत
पांच साल पहले पावर कॉरपोरेशन ने तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवीए का बिजलीघर बनाए जाने का प्रस्ताव यूं हीं नहीं मंजूर किया था। इसके पीछे उसकी मंशा 630 मेगावाट बिजली सप्लाई मेंटेन करने की थी। जिसके सापेक्ष मंडल पूरे मंडल में बिजली की खपत 350 मेगावाट ही है। यही नहीं जो 1205 एम्पियर लोड मौजूदा वक्त पूरे देवीपाटन मंडल का है, उससे कहीं अधिक 1654 एम्पियर बिजली हर दिन इस बिजलीघर से कारपोरेशन को मिलती रहती। जिसके बाद न तो किसी आईपीपी की जरूरत कारपोरेशन को पड़ती न ही बस्ती व सोहावल से बिजली लेने की। पर्याप्त मात्रा में बिजली की उपलब्धता होने के नाते लौव्वाटेपरा से ही कई औैर जिलों को भी बिजली दी जा सकती थी। लेकिन टाइम बाउंड पीरिएड गुजर जाने के बाद भी बिजलीघर नहीं बन पाया। इससे मंडल में बिजली का संकट जबरदस्त तरीके से गहरा गया है।
इनसेट
लोड शिफ्टिंग की नही हुई पहल तो सारे कराए पर फिरेगा पानी
देवीपाटन मंडल में बिजली की लोड शिफ्टिंग को लेकर अगर हाल के दिनों में कोई सटीक पहल पार कारपोरेशन नहीं करता है तो समूचे मंडल में यहां रहने वाली सवा करोड़ आबादी को बिजली की जबरदस्त कटौती से जूझने के लिए तैयार रहना होगा। वहीं गांव-गांव बिजली पहुंचाने से लेकर 33/11, 132 व 220 केवी के बआजिलीघर बनाने का जो काम सरकार कर रही है। उन सब पर पानी फिर जाएगा। क्योंकि जब कारपोरेशन के पास यहां के सिस्टम को बिजली देने का कोई रास्ता ही नहीं रहेगा तो फिर लोग बिजली के संशाधनों का उपभोग करेंगे कैसे। यह एक बड़ा सवाल है।
इनसेट
पूरे देवीपाटन मंडल को गोंडा स्थित 220 केवी बिजलीघर से ही बिजली दी जाती है। देवीपाटन मंडल में एक दिन के भीतर बिजली की कुल खपत 1205 एम्पियर है। जबकि मौजूदा समय में 850 एम्पियर दी जा रही है। लौव्वाटेपरा का बिजलीघर समय से तैयार नहीं हो सका इसलिए गोंडा समेत सभी चार जिलों में बिजली की समस्या एक बड़ा सवाल बन गई है। आने वाले दिनों में हमे देवीपाटन मंडल की बिजली कई-कई घंटे काटकर चलानी पड़ सकती है।
-शेखर अग्रवाल, मुख्य अभियंता पारेषण मध्य
आईपीपी बंद होने से मंडल के चार जिलों में गहराया बिजली संकट
नहीं चालू हुई आईपीपी और चीनीमिलों के पावर प्लांट तो भीषण कटौती से जूझेगा मंडल
राजेश तिवारी
गोंडा। एक तरफ सरकार का शहर को 24 तो गांवों को 20 घंटे बिजली देने का प्लान तो दूसरी तरफ बिजली के लोड मैनेजमेंट की दिक्कत। ऊपर से एक के बाद एक विद्युतीकरण परियोजनाओं में नए जुडने वाले गांव। इन सबको बिजली मिलेगी कैसे, यह समस्या आने वाले दिनों में मंडल के सवा करोड़ लोगों के सामने एक बड़ी चुनौती बनने वाली है। क्योंकि पावर कारपोरेशन ने जिस उम्मीद के साथ तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवीए क्षमता का बिजलीघर बनाने की शुरूआत की थी। उसका सिर्फ और सिर्फ यही मकसद था कि देवीपाटन के चारो जिलों को बिना किसी कटौती के निर्बाध बिजली दी जाए। लेकिन 400 केवीए बिजलीघर का सपना अधूरा रहने से जो तैयारी पावर कारपोरेशन ने पांच साल गांव-गांव बिजली पहुंचाने के लिए की। उसपर लोड मैनेजमेंट न होने से अब पानी फिरने की नौबत आ गई है। क्योंकि मौजूदा वक्त देवीपाटन मंडल को एक दिन में 1205 एम्यिर बिजली की जरूरत है जबकि बिजली सिर्फ 850 एम्पियर ही मिल पा रही है। पेश है रिपोर्ट-
इनसेट
पहले क्या थे हालात
जिले में आज से 6 महीने पहले भी पावर कारपोरेशन को 250 एम्पियर बिजली बस्ती 220 केवीए बिजलीघर से तो सोहावल फैजाबाद से 600 एम्पियर बिजली मिलती थी। लेकिन तब जिले में संचालित बजाज और उतरौला के आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) व चीनीमिलों के पावर प्लाटों से 195 मेगावाट बिजली पावर कॉरपोरेशन को अतिरिक्त मिल जाती थी, जिससे बिजली की कुल उपलब्धता 850 एम्पियर में 350 एम्पियर बिजाली का लोड जुड़ जाता था और 1250 एम्पियर के सापेक्ष 1200 एम्पियर बिजली पावर कॉरपोरेशन के पास मंडल के सभी चार जिलों को बिजली देने के लिए पर्याप्त रहती थी।
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अब क्या हो गए
बस्ती से 250 तो सोहावल फैजाबाद से 650 एम्पियर लोड पावर कारपोरेशन को अभी भी मिल रहा, जबकि आईपीपी और चीनीमिलों के पावर प्लांट बंद होने से 350 एम्पियर बिजली का लोड एकदम से कम हो गया है। वहीं तमाम तरह की विद्युतीकरण परियोजना में विद्युतीकृत होने वाले गांवों/मजरों की संख्या बढने से मंडल के सभी चार जिलों में बिजली का लोड अभी 1205 एम्पियर है। इसमें से 681 एम्पियर बिजली की रोजाना खपत अकेले गोंडा में होती है। जबकि 262-262 एम्पियर यानि 524 एम्पियर बिजली की खपत 220 केवीए के दो बिजलीघरों में हो रही है। इस तरह से एक दिन में मंडल के सभी चार जिलों में बिजली का लोड कुल 1205 एम्पियर होता है।
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मंडल की इन-इन चीनीमिलों से मिलती थी 195 मेगावाट बिजली
आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर)
उतरौला चीनीमिल-90 मेगावाट
कुंदुरखी चीनीमिल-90 मेगावाट
कोजेन (को-जेनरेशन प्लांट)
बलरामपुर चीनीमिल बलरामपुर-05 मेगावाट
बजाज चीनीमिल इटईमैदा उतरौला-05 मेगावाट
मनकापुर चीनीमिल मनकापुर-05 मेगावाट
बजाज चीनीमिल कुंदुरखी-05 मेगावाट
नोट : बजाज चीनीमिल ने अपने यहां फरवरी महीने में ही बिजली का उत्पादन बगास न होने के कारण बंद कर दिया था।
इनसेट
बन जाता बिजलीघर तो नहीं पड़ती किसी की जरूरत
पांच साल पहले पावर कॉरपोरेशन ने तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवीए का बिजलीघर बनाए जाने का प्रस्ताव यूं हीं नहीं मंजूर किया था। इसके पीछे उसकी मंशा 630 मेगावाट बिजली सप्लाई मेंटेन करने की थी। जिसके सापेक्ष मंडल पूरे मंडल में बिजली की खपत 350 मेगावाट ही है। यही नहीं जो 1205 एम्पियर लोड मौजूदा वक्त पूरे देवीपाटन मंडल का है, उससे कहीं अधिक 1654 एम्पियर बिजली हर दिन इस बिजलीघर से कारपोरेशन को मिलती रहती। जिसके बाद न तो किसी आईपीपी की जरूरत कारपोरेशन को पड़ती न ही बस्ती व सोहावल से बिजली लेने की। पर्याप्त मात्रा में बिजली की उपलब्धता होने के नाते लौव्वाटेपरा से ही कई औैर जिलों को भी बिजली दी जा सकती थी। लेकिन टाइम बाउंड पीरिएड गुजर जाने के बाद भी बिजलीघर नहीं बन पाया। इससे मंडल में बिजली का संकट जबरदस्त तरीके से गहरा गया है।
इनसेट
लोड शिफ्टिंग की नही हुई पहल तो सारे कराए पर फिरेगा पानी
देवीपाटन मंडल में बिजली की लोड शिफ्टिंग को लेकर अगर हाल के दिनों में कोई सटीक पहल पार कारपोरेशन नहीं करता है तो समूचे मंडल में यहां रहने वाली सवा करोड़ आबादी को बिजली की जबरदस्त कटौती से जूझने के लिए तैयार रहना होगा। वहीं गांव-गांव बिजली पहुंचाने से लेकर 33/11, 132 व 220 केवी के बआजिलीघर बनाने का जो काम सरकार कर रही है। उन सब पर पानी फिर जाएगा। क्योंकि जब कारपोरेशन के पास यहां के सिस्टम को बिजली देने का कोई रास्ता ही नहीं रहेगा तो फिर लोग बिजली के संशाधनों का उपभोग करेंगे कैसे। यह एक बड़ा सवाल है।
इनसेट
पूरे देवीपाटन मंडल को गोंडा स्थित 220 केवी बिजलीघर से ही बिजली दी जाती है। देवीपाटन मंडल में एक दिन के भीतर बिजली की कुल खपत 1205 एम्पियर है। जबकि मौजूदा समय में 850 एम्पियर दी जा रही है। लौव्वाटेपरा का बिजलीघर समय से तैयार नहीं हो सका इसलिए गोंडा समेत सभी चार जिलों में बिजली की समस्या एक बड़ा सवाल बन गई है। आने वाले दिनों में हमे देवीपाटन मंडल की बिजली कई-कई घंटे काटकर चलानी पड़ सकती है।
-शेखर अग्रवाल, मुख्य अभियंता पारेषण मध्य