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465 नई पंचायतों के गठन को 23 हजार लोगों ने दिया प्रस्ताव
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गोंडा। जिले में नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। जिले के 23 हजार लोगों ने करीब 465 नई पंचायतों के गठन का प्रस्ताव दिया है। अब इन प्रस्तावों की ब्लॉक स्तर से जांच होगी। मानक की रिपोर्ट आने पर नई पंचायतों के गठन पर फैसला जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी।
पंचातयों के गठन की मांग के लिए आए प्रस्तावों की सूची 25 नवंबर को प्रकाशित होगी और फिर लोगों से दो दिसंबर तक आपत्ति ली जानी है। इसके बाद मानक की पड़ताल करने के बाद नई पंचायतों के गठन की संस्तुति भेजी जानी है। पंचायत राज विभाग नई पंचायतों के गठन की कवायद में जुट गया है।
2015 में नई पंचायतों के गठन की कार्रवाई जिले में नही हो पाई थी। पंचायत चुनाव के पहले नई पंचायतों का गठन होना है। वर्ष 2015 में 149 नई पंचायतों के गठन पर सहमति बन गई थी और जिला स्तरीय कमेटी ने संस्तुति भी कर दी थी।
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इस समय सियासी रार में पंचायतों के गठन का प्रस्ताव फंस गया था और निदेशालय समय से नही पहुंच सका था। जिससे नई पंचायतों के गठन की कार्रवाई ही नहीं हो पाई थी। इस बार फिर शासन के आदेश पर कार्रवाई शुरू हुई है। 14 दिनों में करीब 465 नए पंचायतों के गठन के प्रस्ताव विभाग को मिले हैं।
प्रत्येक गांव से 50 या उससे अधिक लोगों ने प्रस्ताव दिया है। ऐसे में करीब 23 हजार लोगों की ओर से गांवों को पंचायत बनाए जाने का प्रस्ताव जमा किया गया है। माना जा रहा है कि लोग अपने मनमुताबिक पंचायतों के गठन के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं, कई राजस्व गांव तो ऐसे हैं वह मानक भी पूरे करते हैं। उनका तो पंचायत बनना लगभग तय है, ऐसे गांवों की संख्या करीब 180 बताई जा रही है। फिलहाल आपत्तियों के बाद नए पंचायत के गठन का स्वरूप तय हो सकेगा।
आए प्रस्तावों पर 25 को मांगी जाएंगी आपत्तियां
ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व परिसीमन किये जाने की कार्रवाई 9 नवम्बर से शुरू हुई थीं। जिसमें 20 नवंबर तक प्रस्ताव मांगे गए थे। शुक्रवार तक 465 प्रस्ताव आ चुके हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी सभाजीत पांडेय ने बताया कि शासन से निर्धारित समय सारिणी के अनुसार ग्राम पंचायत पुनर्गठन के संबंध में प्रार्थना पत्र व प्रस्ताव 09 नवंबर से 20 तक प्राप्त लिए जाने थे। यह कार्रवाई पूरी हो गई है।
अब ग्राम पंचायत पुनर्गठन व परिसीमन के संबंध में जनपद स्तर पर 21 नवंबर से 25 नवंबर तक तैयार प्रस्ताव का अनन्तिम प्रकाशन की कार्यवाही होगी। अनन्तिम प्रकाशन के बाद 02 दिसंबर तक आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। प्राप्त आवेदन पत्रों के परीक्षणोपरान्त निदेशालय को अंतिम संस्तुतियां 06 दिसंबर को भेजा जाएगा। 7 दिसंबर से 13 दिसंबर तक निदेशालय स्तर पर अधिसूचना जारी होगी और 14 दिसंबर से 18 दिसंबर तक अधिसूचना का सरकारी गजट में मुद्रण और प्रकाशन होगा। इसके बाद जो पंचायत गठित होंगी उनकी सूची जारी होगी।
50 से अधिक लोगों के प्रस्तावों पर ही हो सकेगा विचार
ग्राम पंचायत के क्षेत्र में परिवर्तन का प्रस्ताव संबंधित ग्राम पंचायत अथवा उस ग्राम पंचायत के 50 या उससे अधिक निवासियों की ओर से मिले प्रस्तावों पर ही विचार होगा। ग्राम पंचायत क्षेत्र का गठन जनगणना वर्ष 2011 के प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर होगा।
किसी ग्राम पंचायत के पंचायत क्षेत्र के निर्धारण के लिए किसी राजस्व ग्राम या मजरे को विभाजित नहीं किया जायेगा। किसी ग्राम पंचायत के प्रादेशिक क्षेत्र में केवल ऐसे राजस्व ग्राम, ग्रामों को सम्मिलित किया जाएगा जो भौगोलिक दृष्टि से एक-दूसरे से निकटस्थ हों। राजस्व ग्राम या ग्रामों को किसी पंचायत क्षेत्र में सम्मिलित करने में यह भी ध्यान रखा जायेगा कि इनके मध्य दूसरी ग्राम पंचायत का कोई प्रादेशिक क्षेत्र न पड़ता हो तथा ग्राम पंचायतों में सम्मिलित किये जाने वाले राजस्व ग्राम के बीच में कोई नदी नाला, पहाड़ या कोई प्राकृतिक अवरोध उसके बीच आवागमन में बाधक न हो।
पंचायत के गठन के लिए गांवों से आए प्रस्तावों पर आपत्तियां 26 नवंबर से 2 दिसंबर तक ली जाएगी। इसके बाद पुनर्गठन के लिए प्रस्तावों का परीक्षण होगा और मानक पूरे करने वाले गांवों को ही पंचायत का दर्जा देने की संस्तुति की जाएगी।
- सभाजीत पांडे, जिला पंचायत राज अधिकारी
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पंचातयों के गठन की मांग के लिए आए प्रस्तावों की सूची 25 नवंबर को प्रकाशित होगी और फिर लोगों से दो दिसंबर तक आपत्ति ली जानी है। इसके बाद मानक की पड़ताल करने के बाद नई पंचायतों के गठन की संस्तुति भेजी जानी है। पंचायत राज विभाग नई पंचायतों के गठन की कवायद में जुट गया है।
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2015 में नई पंचायतों के गठन की कार्रवाई जिले में नही हो पाई थी। पंचायत चुनाव के पहले नई पंचायतों का गठन होना है। वर्ष 2015 में 149 नई पंचायतों के गठन पर सहमति बन गई थी और जिला स्तरीय कमेटी ने संस्तुति भी कर दी थी।
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इस समय सियासी रार में पंचायतों के गठन का प्रस्ताव फंस गया था और निदेशालय समय से नही पहुंच सका था। जिससे नई पंचायतों के गठन की कार्रवाई ही नहीं हो पाई थी। इस बार फिर शासन के आदेश पर कार्रवाई शुरू हुई है। 14 दिनों में करीब 465 नए पंचायतों के गठन के प्रस्ताव विभाग को मिले हैं।
प्रत्येक गांव से 50 या उससे अधिक लोगों ने प्रस्ताव दिया है। ऐसे में करीब 23 हजार लोगों की ओर से गांवों को पंचायत बनाए जाने का प्रस्ताव जमा किया गया है। माना जा रहा है कि लोग अपने मनमुताबिक पंचायतों के गठन के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं, कई राजस्व गांव तो ऐसे हैं वह मानक भी पूरे करते हैं। उनका तो पंचायत बनना लगभग तय है, ऐसे गांवों की संख्या करीब 180 बताई जा रही है। फिलहाल आपत्तियों के बाद नए पंचायत के गठन का स्वरूप तय हो सकेगा।
आए प्रस्तावों पर 25 को मांगी जाएंगी आपत्तियां
ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व परिसीमन किये जाने की कार्रवाई 9 नवम्बर से शुरू हुई थीं। जिसमें 20 नवंबर तक प्रस्ताव मांगे गए थे। शुक्रवार तक 465 प्रस्ताव आ चुके हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी सभाजीत पांडेय ने बताया कि शासन से निर्धारित समय सारिणी के अनुसार ग्राम पंचायत पुनर्गठन के संबंध में प्रार्थना पत्र व प्रस्ताव 09 नवंबर से 20 तक प्राप्त लिए जाने थे। यह कार्रवाई पूरी हो गई है।
अब ग्राम पंचायत पुनर्गठन व परिसीमन के संबंध में जनपद स्तर पर 21 नवंबर से 25 नवंबर तक तैयार प्रस्ताव का अनन्तिम प्रकाशन की कार्यवाही होगी। अनन्तिम प्रकाशन के बाद 02 दिसंबर तक आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। प्राप्त आवेदन पत्रों के परीक्षणोपरान्त निदेशालय को अंतिम संस्तुतियां 06 दिसंबर को भेजा जाएगा। 7 दिसंबर से 13 दिसंबर तक निदेशालय स्तर पर अधिसूचना जारी होगी और 14 दिसंबर से 18 दिसंबर तक अधिसूचना का सरकारी गजट में मुद्रण और प्रकाशन होगा। इसके बाद जो पंचायत गठित होंगी उनकी सूची जारी होगी।
50 से अधिक लोगों के प्रस्तावों पर ही हो सकेगा विचार
ग्राम पंचायत के क्षेत्र में परिवर्तन का प्रस्ताव संबंधित ग्राम पंचायत अथवा उस ग्राम पंचायत के 50 या उससे अधिक निवासियों की ओर से मिले प्रस्तावों पर ही विचार होगा। ग्राम पंचायत क्षेत्र का गठन जनगणना वर्ष 2011 के प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर होगा।
किसी ग्राम पंचायत के पंचायत क्षेत्र के निर्धारण के लिए किसी राजस्व ग्राम या मजरे को विभाजित नहीं किया जायेगा। किसी ग्राम पंचायत के प्रादेशिक क्षेत्र में केवल ऐसे राजस्व ग्राम, ग्रामों को सम्मिलित किया जाएगा जो भौगोलिक दृष्टि से एक-दूसरे से निकटस्थ हों। राजस्व ग्राम या ग्रामों को किसी पंचायत क्षेत्र में सम्मिलित करने में यह भी ध्यान रखा जायेगा कि इनके मध्य दूसरी ग्राम पंचायत का कोई प्रादेशिक क्षेत्र न पड़ता हो तथा ग्राम पंचायतों में सम्मिलित किये जाने वाले राजस्व ग्राम के बीच में कोई नदी नाला, पहाड़ या कोई प्राकृतिक अवरोध उसके बीच आवागमन में बाधक न हो।
पंचायत के गठन के लिए गांवों से आए प्रस्तावों पर आपत्तियां 26 नवंबर से 2 दिसंबर तक ली जाएगी। इसके बाद पुनर्गठन के लिए प्रस्तावों का परीक्षण होगा और मानक पूरे करने वाले गांवों को ही पंचायत का दर्जा देने की संस्तुति की जाएगी।
- सभाजीत पांडे, जिला पंचायत राज अधिकारी