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प्रवासी श्रमिकों को 218 क्विंटल गेहूं वितरण में धांधली

Fri, 27 Nov 2020 10:08 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Nov 2020 10:08 PM IST
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218 quintals of wheat distribution to migrant workers rigged
झंझरी (गोंडा)। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में अधिकारी हाथ सफाई करने से नहीं चूक रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान बाहर से आए प्रवासी श्रमिकों के राशन वितरण में गोलमाल का मामला सामने आया है। राशन उठान व वितरण विभाग के पत्रों से ही गोलमाल का खुलासा हो रहा है।
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विपणन विभाग जहां 218.24 क्विंटल गेहूं को समायोजन करने का दावा कर रहा है तो उसी राशन को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग वितरण दिखा रहा है। वहीं वितरण करने वाले कोटेदारों का दावा है कि राशन तो मिला ही नहीं है।
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अब सवाल यह उठता है कि आखिर फिर यह राशन गया कहां। दोनो विभागों के तर्कों के बीच ही प्रवासी श्रमिकों के राशन में गोलमाल की सच्चाई सामने आ रही है।
सरकार की ओर से लॉकडाउन के दौरान बाहर से आने वाले प्रवासी श्रमिकों को दो महीने का राशन देने की व्यवस्था की गई थी। कोरोना संकट को देखते हुए इसमें विभागों को पूरी संवेदनशीलता से कार्य करने की हिदायत जिलाधिकारी ने दी थी।
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बाहर से करीब 33 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक आए थे और इन्हें राशन दिए जाने की कवायद भी हुई। इसके अलावा पंडरी व नगर क्षेत्र के राशन वितरण में ऐसा खेल हुआ कि अब विपणन व आपूर्ति विभाग उनका हिसाब ही तैयार करने में आमने सामने आ गए हैं।
वहीं दोनों क्षेत्रों के कोटेदारों ने राशन मिलने की सूचना लिखित में देकर तड़का लगाने का काम किया है। अब जब कोटेदारों को राशन मिला ही नहीं हुआ तो 218.24 क्विंटल गेहूं आखिर गया कहां, यह सवाल गूंज रहा है।
पंडरी कृपाल के विपणन निरीक्षक ने जिला पूर्ति अधिकारी को 18 नवंबर 2020 को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि 218.24 क्विंटल गेहूं समायोजित किया गया है।
वहीं इस पर आपत्ति करते हुए जिला पूर्ति अधिकारी की ओर से 24 नवंबर को जारी पत्र में समायोजन किए जाने की बात पर कोटेदारों की ओर से नवंबर माह का राशन उठान न करने की बात कही गई है।
वहीं कोटेदारों ने सामूहिक रूप से पत्र देकर साफ किया है कि उन्हें राशन मिला ही नहीं है। इस तरह पत्रों में राशन के गोलमाल को हिसाब में लाने का दांवपेंच चल रहा है। कोटेदारों को आशंका है कि कहीं इस राशन की जिम्मेदारी उनके सिर पर न जाए। इसलिए उन लोगों ने पत्रों के माध्यम से अपने दावे पेश किए हैं।
निगरानी में रही चूक और अब शुरू हुआ दांवपेंच
प्रवासी श्रमिकों के राशन वितरण में उठान, समायोजन और वितरण पर आपूर्ति महकमे की ओर से लापरवाही पत्रों से ही सामने आ रही है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने पत्र लिखकर दो विपणन निरीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है। जिसमें उनका कहना है कि नगर क्षेत्र के कोटेदारों ने माह जून में प्रवासी श्रमिकों के लिए राशन का उठान ही नहीं किया है। परिणामस्वरूप माह नवंबर में राशन का समायोजन कर लिया गया है।
उनका कहना है कि बिना किसी आदेश व अधिकारियों के संज्ञान में लाए ही राशन का समायोजन किए जाने से कोटेदारों के पास वह अवशेष दिख रहा है और इससे कोटेदार उठान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा करने पर जवाब मांगा है। तीन महीने बाद विभाग की ओर से यह कदम उठाया गया है ऐसे में लापरवाही सामने आ रही है।

प्रवासी श्रमिकों को राशन वितरण के मामले में समायोजन से आई समस्या के निराकरण के लिए कार्रवाई की जा रही है। विपणन निरीक्षकों से रिपोर्ट मांगी है कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
- वीके महान, जिला पूर्ति अधिकारी
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