फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   20 thousand more people vulnerable to flooding

20 हजार और लोग बाढ़ की चपेट में

Wed, 10 Aug 2016 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा Updated Wed, 10 Aug 2016 11:01 PM IST
विज्ञापन
20 thousand more people vulnerable to flooding
बाढ़ पीड़ितों को बचाते पीएसी के जवान - फोटो : अमर उजाला
तहसील करनैलगंज क्षेत्र के 10 ग्राम पंचायतों के करीब 95 मजरों में बुधवार की शाम तक घुटनों से लेकर कमर तक फैल गया है। वहीं इन गांवों में पड़ने वाले ताल-तलैय्या से लेकर खंती इत्यादि भी पानी से उफना गए हैं। करीब 50 हजार की आबादी का जीवन दुश्वारियों में तब्दील हो चुका है।
विज्ञापन


बीते 24 घंटे के भीतर नदी के जलस्तर में जहां 7 सेमी की बढ़त होने के बाद उसका पानी स्थिर हो गया है तो वहीं रात तक नेपाल से छोड़े गया 2.47 लाख क्यूसेक पानी के जिले की सीमा में पहुंचने के बाद हालात फिर से बिगड़ने की संभावना भी बढ़ गई है।
विज्ञापन


वहीं शुरुआती दौर में बाढ़ से प्रभावित दस गांवों का संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है। जिसके कारण अब सिर्फ इन गांवों तक पहुंचने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा बची है। जिसके जरिए एनडीआरएफफ, एसडीआरएफ, पुलिस व पीएसी के जवान बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री मुहैया कराते हुए उन्हें सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने में लगे हैं। पेश है रिपोर्ट-
विज्ञापन
विज्ञापन


24 घंटे में 20 हजार लोग और हुए बाढ़ से प्रभावित
बीते 24 घंटे में नदी के जलस्तर में हुई 7 सेमी बढ़ोतरी से बाढ़ प्रभावितों की संख्या भी 30 से बढ़कर 50 हजार पहुंच गई है। नकहरा गांव के सभी 11 मजरे तो बाढ़ के पानी में पहले ही डूब चुके थे, जबकि मंगलवार की रात से बुधवार की शाम तक नदी के पानी से 20 हजार और आबादी को अपनी चपेट में ले लिया।

जिससे लोगों के पास गांव छोड़कर बाहर जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। हालांकि इसके बाद भी बाढ़ ग्रस्त गांवों में कई लोग ऐसे हैं जो मचान बनाकर अपने-अपने गांवों में डेरा जमाए हुए हैं। रात तक बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या में अगर पानी बढ़ता है तो 20 से 30 हजार का इजाफा होने का अनुमान है। 

मुख्यालय से टूटा गांवों का संपर्क
बाढ़ प्रभावित करनैलगंज इलाके में जहां चचरी से नकहरा, काशीपुर, गौरा सिंहनापुुर, प्रतापपुर व घरकुईयां को जाने वाली सड़कों के पानी में डूब जाने से इन गांवों का संपर्क मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है।

वहीं दूसरी ओर इन पांच गांवों के अतिरिक्त आसपास के पांच और गांवों में खड़ी किसानों की करीब 6 हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि की फसल भी पानी मे उतराने लगी है। जिससे किसानों को एक बड़ा झटका लगा है। लोगों का कहना है कि अगर पानी इसी तरह से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में इसका आंकड़ा 50 हजार हेक्टेयर को पार कर जाएगा। 

पीने के लिए बूंद-बूंद पानी को मोहताज बाढ़ पीड़ित
बांध कटने के बाद बाढ़ से बचने के लिए एल्गिन-चरसड़ी बांध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों की हालत इतनी खराब हो गई है कि वह अपने ही घर में बेगाने होकर रह गए हैं। जिस बंधे पर आकर उन्होंने डेरा जमाया है, वहां न तो उनके पीने के लिए पानी की व्यवस्था है न ही खाने-पीने का कोई इंतजाम। एक बंधे पर मौजूदा वक्त जहां करीब 250 परिवारों ने शरण ले रखी है तो वहीं बंधे के दूसरे साइड पर बाराबंकी जनपद अन्तर्गत आने वाले गांव के लोग डेरा जमाए हुए हैं।

एनडीआरएफ की 8 तो 4 फ्लड टीमों ने संभाला मोर्चा
बाढ़ ग्रस्त करनैलगंज इलाके में जलप्रलय की आपदा पर काबू पाने और लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ की 8 तो 4 फ्लड टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है। जबकि सेना व पीएसी की 4-4 टुकड़ियां भी इस काम में लगी हुई हैं।


बुधवार को एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमों के साथ पुलिस व पीएसी के जवानों ने नाव से बाढ़ग्रस्त इलाकों में भ्रमण करते हुए गांव में फंसे लोगों को बाहर निकाला। जबकि बंधा कटने के बाद बंधे पर बने बाढ़ कंट्रोलरूम को भी उजाड़ा जाने लगा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed