{"_id":"59a2fb234f1c1b1d4e8b47db","slug":"161503853347-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि फार्म के तीन बीघा जमीन में खनन कर बेच डाला बालूं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि फार्म के तीन बीघा जमीन में खनन कर बेच डाला बालूं
Updated Sun, 27 Aug 2017 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि फार्म के तीन बीघा जमीन में खनन कर बेच डाला बालू
खनन माफिया ने कृषि फार्म की उपजाऊ जमीन को बना दिया तालाब
इस्लाम खां
गोंडा। खनन माफिया ने कृषि विभाग के राजकीय कृषि फार्म को भी नहीं छोड़ा। खनन माफिया ने कृषि फार्म के तीन बीघा जमीन में अवैध खनन कर कई करोड़ रुपये के बालू बेच डाले। कृषि फार्म की उपजाऊ जमीन में पांच मीटर से अधिक गहरा खनन कर उसे तालाब बना दिया। अवैध तरीके से हुए बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन की घटना को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के संज्ञान में लेने पर प्रशासन ने अवैध बालू खनन कारोबारी हाफिज अली व उसके दो भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ उसकी सम्पत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की थी।
जिले के चर्चित अवैध बालू खनन के खेल में नया मोड़ सामने आया है। जिला प्रशासन व खनन विभाग ने रायल्टी के नाम पर जिसे बालू खनन के लिए जिस जमीन के लिए पट्टा दिया था उसकी आड़ में उसने कृषि विभाग के राजकीय कृषि फार्म का करीब तीन बीघा जमीन को खनन की जद में ले लिया। देखते-देखते सोना उगलने वाली कृषि फार्म की तीन बीघा जमीन तालाब की शक्ल में आ गई। सरकारी जमीन न सिर्फ ऊसर बन गई, बल्कि पांच मीटर से अधिक गहरी खाईं में तब्दील हो चुकी है। जिले के नवाबगंज ब्लाक के चकरसूल व कल्यानपुर के बीच खनन माफिया ने नियम कानून को ताक पर रखकर प्रशासन से लुकी छुपी का खेल खेलते हुए करीब 19 साल तक अवैध तरीके से बालू खनन किया।
इसी गांव के पास कृषि विभाग का करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल का राजकीय कृषि फार्म है। कृषि विभाग के सूत्रों के मुताविक पहले पूरे क्षेत्रफल में बोवाई की जाती थी, बीच में कुछ दिन बाद वन विभाग व कुछ पट्टाधारकों के बीच हुए विवाद के बाद आधे से अधिक जमीन पर ही बोवाई की जाने लगी। इसकी कई बार विभाग ने पैमाईश कराने की मांग की लेकिन मामला सरकारी होने की वजह से दबा पड़ा रहा। इसी बीच में खनन माफिया ने इस जमीन को भी अपना शिकार बना लिया।
विज्ञापन
क्या है अवैध बालू खनन का मामला
गोंडा। जिले के नवाबगंज ब्लाक के चकरसूल व कल्यानपुर में राजस्व विभाग के मुताविक 1997 से बालू खनन हो रहा है। यह खनन चन्द ही सालों बाद बालू के अवैध उद्योग के रूप में पनप गया। खनन में लगे अवैध कारोबारियों ने पोकलैण्ड मशीन लगाकर एक दिन में 50-50 ट्रक बालू खींचना शुरू कर दिया। इससे क्षेत्र की पर्यावरण स्वच्छता तार तार होने के साथ सड़कें ध्वस्त हो गईं। इस बालू के इस अवैध काम में काफी लोग जुड़ते गये। इस मामले की शिकायतों की सुनवाई नही हुई। जिससे लोगों की आवाजें दब गईं। चार साल पहले जिले की पूर्व डीएम डा.रोशन जैकब ने जब मौके पर जाकर छापामार कर कार्रवाई की तो मामला उजागर हुआ। इस मामले की शिकायत जिले के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने एनजीटी में की थी तब से एनजीटी मामले की जांच कर मामले की पड़ताल कर रही है।
खनन विभाग के जिम्मेदारों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
गोंडा। खनन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पर भी अवैध खनन को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि किसी ने यदि पट्टा जमीन खनन के लिए लिया है तो उसकी वह मानीटरिंग करे। सिर्फ रायल्टी के नाम पर खुली छूट देना गलत है इसमें विभाग के लोगों की भी जांच हो। वरिष्ठ अधिवक्त हरिश्चन्द्र तिवारी व समाजसेवी सत्य नारायन त्रिपाठी का कहना है कि खनन विभाग के लोग अब तक किस चीज की मानीटरिंग कर रहे थे, कहीं इनकी भी तो मिलीभगत नहीं है। खनन के दौरान विभाग के लोगों ने प्रशासन को क्यों नही सचेत किया इसकी भी जांच होनी चाहिए।
ढाई एकड़ से अधिक में हुआ खनन: फार्म इंचार्ज
गोंडा। कल्यानपुर गांव स्थित कृ षि विभाग के राजकीय कृषि फार्म के इंचार्ज सराफत का कहना है कि फार्म के हिस्से में करीब ढाई एकड़ से अधिक जमीन में बालू खनन हुआ है। इस फार्म की पैमाईश की विभाग की ओर से मांग की जा रही थी लेकिन मामला ऐसे पड़ा रहा। जिस दिन जांच टीम आयी उस दिन राजस्व विभाग के लोगों ने बताया कि जो खनन से गड्डा बना है उसमें एक तरफ फार्म की जमीन है। इस मामले में एक मृतका कथित पट्टेदार के खिलाफ मामला दर्ज करवाया जा चुका है।
अवैध बालू खनन के मामले में हाल ही में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है। इस मामले की एनजीटी ने खुद जांच कराने के बाद उसकी पड़ताल कर रही है। जो भी आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा।
- रत्नाकर मिश्रा, अपर जिलाधिकारी
विज्ञापन
खनन माफिया ने कृषि फार्म की उपजाऊ जमीन को बना दिया तालाब
इस्लाम खां
गोंडा। खनन माफिया ने कृषि विभाग के राजकीय कृषि फार्म को भी नहीं छोड़ा। खनन माफिया ने कृषि फार्म के तीन बीघा जमीन में अवैध खनन कर कई करोड़ रुपये के बालू बेच डाले। कृषि फार्म की उपजाऊ जमीन में पांच मीटर से अधिक गहरा खनन कर उसे तालाब बना दिया। अवैध तरीके से हुए बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन की घटना को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के संज्ञान में लेने पर प्रशासन ने अवैध बालू खनन कारोबारी हाफिज अली व उसके दो भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ उसकी सम्पत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की थी।
जिले के चर्चित अवैध बालू खनन के खेल में नया मोड़ सामने आया है। जिला प्रशासन व खनन विभाग ने रायल्टी के नाम पर जिसे बालू खनन के लिए जिस जमीन के लिए पट्टा दिया था उसकी आड़ में उसने कृषि विभाग के राजकीय कृषि फार्म का करीब तीन बीघा जमीन को खनन की जद में ले लिया। देखते-देखते सोना उगलने वाली कृषि फार्म की तीन बीघा जमीन तालाब की शक्ल में आ गई। सरकारी जमीन न सिर्फ ऊसर बन गई, बल्कि पांच मीटर से अधिक गहरी खाईं में तब्दील हो चुकी है। जिले के नवाबगंज ब्लाक के चकरसूल व कल्यानपुर के बीच खनन माफिया ने नियम कानून को ताक पर रखकर प्रशासन से लुकी छुपी का खेल खेलते हुए करीब 19 साल तक अवैध तरीके से बालू खनन किया।
विज्ञापन
इसी गांव के पास कृषि विभाग का करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल का राजकीय कृषि फार्म है। कृषि विभाग के सूत्रों के मुताविक पहले पूरे क्षेत्रफल में बोवाई की जाती थी, बीच में कुछ दिन बाद वन विभाग व कुछ पट्टाधारकों के बीच हुए विवाद के बाद आधे से अधिक जमीन पर ही बोवाई की जाने लगी। इसकी कई बार विभाग ने पैमाईश कराने की मांग की लेकिन मामला सरकारी होने की वजह से दबा पड़ा रहा। इसी बीच में खनन माफिया ने इस जमीन को भी अपना शिकार बना लिया।
विज्ञापन
क्या है अवैध बालू खनन का मामला
गोंडा। जिले के नवाबगंज ब्लाक के चकरसूल व कल्यानपुर में राजस्व विभाग के मुताविक 1997 से बालू खनन हो रहा है। यह खनन चन्द ही सालों बाद बालू के अवैध उद्योग के रूप में पनप गया। खनन में लगे अवैध कारोबारियों ने पोकलैण्ड मशीन लगाकर एक दिन में 50-50 ट्रक बालू खींचना शुरू कर दिया। इससे क्षेत्र की पर्यावरण स्वच्छता तार तार होने के साथ सड़कें ध्वस्त हो गईं। इस बालू के इस अवैध काम में काफी लोग जुड़ते गये। इस मामले की शिकायतों की सुनवाई नही हुई। जिससे लोगों की आवाजें दब गईं। चार साल पहले जिले की पूर्व डीएम डा.रोशन जैकब ने जब मौके पर जाकर छापामार कर कार्रवाई की तो मामला उजागर हुआ। इस मामले की शिकायत जिले के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने एनजीटी में की थी तब से एनजीटी मामले की जांच कर मामले की पड़ताल कर रही है।
खनन विभाग के जिम्मेदारों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
गोंडा। खनन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पर भी अवैध खनन को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि किसी ने यदि पट्टा जमीन खनन के लिए लिया है तो उसकी वह मानीटरिंग करे। सिर्फ रायल्टी के नाम पर खुली छूट देना गलत है इसमें विभाग के लोगों की भी जांच हो। वरिष्ठ अधिवक्त हरिश्चन्द्र तिवारी व समाजसेवी सत्य नारायन त्रिपाठी का कहना है कि खनन विभाग के लोग अब तक किस चीज की मानीटरिंग कर रहे थे, कहीं इनकी भी तो मिलीभगत नहीं है। खनन के दौरान विभाग के लोगों ने प्रशासन को क्यों नही सचेत किया इसकी भी जांच होनी चाहिए।
ढाई एकड़ से अधिक में हुआ खनन: फार्म इंचार्ज
गोंडा। कल्यानपुर गांव स्थित कृ षि विभाग के राजकीय कृषि फार्म के इंचार्ज सराफत का कहना है कि फार्म के हिस्से में करीब ढाई एकड़ से अधिक जमीन में बालू खनन हुआ है। इस फार्म की पैमाईश की विभाग की ओर से मांग की जा रही थी लेकिन मामला ऐसे पड़ा रहा। जिस दिन जांच टीम आयी उस दिन राजस्व विभाग के लोगों ने बताया कि जो खनन से गड्डा बना है उसमें एक तरफ फार्म की जमीन है। इस मामले में एक मृतका कथित पट्टेदार के खिलाफ मामला दर्ज करवाया जा चुका है।
अवैध बालू खनन के मामले में हाल ही में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है। इस मामले की एनजीटी ने खुद जांच कराने के बाद उसकी पड़ताल कर रही है। जो भी आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा।
- रत्नाकर मिश्रा, अपर जिलाधिकारी