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अनुश्रवण भूले,साहब बने घूम रहे एबीआरसी
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:32 PM IST
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बीईओ के बाबू बनके रह गए एबीआरसी
गोंडा। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को शिक्षण के दौरान होने वाली समस्याओं का समाधान कर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए तैनात किए गए ब्लॉक सह समन्वयक अपना मूल दायित्व भूल चुके हैं।
शैक्षिक गुणवत्ता का ध्यान रखने के बजाय एबीआरसी मौज कर रहे हैं। इस चक्कर में वह खंड शिक्षा अधिकारियों के बाबू बनकर रह गए हैं। इसका नतीजा यह है कि तैनाती के छह माह बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी रिपोर्ट जिले परियोजना कार्यालय या डायट तक नही पहुंच सकी है। इस साहब वाली कार्यशैली से एबीआरसी चयन के उद्देश्यों पर सवालिया निशान लग गया है।
परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों को शैक्षिक सपोर्ट देने के उदद्देश्य से छह माह पहले प्रत्येक ब्लाक ब्लाक संसाधन केंद्र पर विषय विशेषज्ञ के रूप में पांच पमांच ब्लाक सह समन्वयकों की तैनाती की गई है।
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एबीआरसी पद पर तैनात शिक्षक को प्रतिमाह 20 विद्यालयों के शैक्षिक परिवेश का अनुश्रवण किया जाना है। इसमेें सप्ताह में कम से कम चार स्कूलों का पर्यवेक्षण अनिवार्य है।
इस पर्यवेक्षण के तहत स्कूल की शैक्षिक गतिविधियों जैसे प्रार्थना सभा, बाल सभा, समय सारिणी का प्रयोग, बच्चों के सीखने का स्तर, बच्चों का विषय के प्रति जुड़ाव, टीएलएम का प्रयोग, पाठ योजना, शिक्षक डायरी, शिक्षक की जानकारी का स्तर, विद्यालय का समुदाय से जुड़ाव व क्लास रूम का बारीकी से अवलोकन कर इसकी विस्तृत अनुश्रवण रिपोर्ट जिला परियोजना कार्यालय व जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को भेजना होता है।
इसके अलावा विषय विशेषज्ञ होने के नाते एबीआरसी को कक्षा शिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को शैक्षिक सपोर्ट भी प्रदान करना है। मगर ब्लाक सह समन्वयक पद पर तैनात शिक्षक अपने इस मूल दायित्व को भुला बैठे हैं।
इक्का दुक्का एबीआरसी ही है जो स्कूलों में पहुंचकर शिक्षकों का शैक्षिक सपोर्ट दे रहे हैं। बाकी के एबीआरसी ब्लाक संसाधन केंद्र पर तैनात खंड शिक्षा अधिकारियों के बाबू बनकर रह गए हैं। नतीजा यह है कि अब तक एक भी ब्लाक सह समन्वयक ने अपनी अनुश्रवण रिपोर्ट न तो जिला परियोजना कार्यालय को और न ही जिला शिक्षा एंव प्रशिक्षण संस्थान को उपलब्ध कराई है। इस निष्क्रियता से एबीआरसी की तैनाती के उदद्देश्य पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है।
ब्लाक सह समन्वयकों को स्कूलों में जाकर शिक्षक को शैक्षणिक सपोर्ट प्रदान करना है। साथ ही समस्त शैक्षिक गतिविधियों का अनुश्रवण कर उसकी रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध करानी है। अब तक कितने एबीआरसी ने अनुश्रवण रिपोर्ट उपलब्ध कराई है,इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। अगर अनुश्रवण रिपोर्ट नहीं जमा की गई है तो संबंधित एबीआरसी का उत्तरदायित्व तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए
गोंडा। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को शिक्षण के दौरान होने वाली समस्याओं का समाधान कर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए तैनात किए गए ब्लॉक सह समन्वयक अपना मूल दायित्व भूल चुके हैं।
शैक्षिक गुणवत्ता का ध्यान रखने के बजाय एबीआरसी मौज कर रहे हैं। इस चक्कर में वह खंड शिक्षा अधिकारियों के बाबू बनकर रह गए हैं। इसका नतीजा यह है कि तैनाती के छह माह बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी रिपोर्ट जिले परियोजना कार्यालय या डायट तक नही पहुंच सकी है। इस साहब वाली कार्यशैली से एबीआरसी चयन के उद्देश्यों पर सवालिया निशान लग गया है।
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परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों को शैक्षिक सपोर्ट देने के उदद्देश्य से छह माह पहले प्रत्येक ब्लाक ब्लाक संसाधन केंद्र पर विषय विशेषज्ञ के रूप में पांच पमांच ब्लाक सह समन्वयकों की तैनाती की गई है।
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एबीआरसी पद पर तैनात शिक्षक को प्रतिमाह 20 विद्यालयों के शैक्षिक परिवेश का अनुश्रवण किया जाना है। इसमेें सप्ताह में कम से कम चार स्कूलों का पर्यवेक्षण अनिवार्य है।
इस पर्यवेक्षण के तहत स्कूल की शैक्षिक गतिविधियों जैसे प्रार्थना सभा, बाल सभा, समय सारिणी का प्रयोग, बच्चों के सीखने का स्तर, बच्चों का विषय के प्रति जुड़ाव, टीएलएम का प्रयोग, पाठ योजना, शिक्षक डायरी, शिक्षक की जानकारी का स्तर, विद्यालय का समुदाय से जुड़ाव व क्लास रूम का बारीकी से अवलोकन कर इसकी विस्तृत अनुश्रवण रिपोर्ट जिला परियोजना कार्यालय व जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को भेजना होता है।
इसके अलावा विषय विशेषज्ञ होने के नाते एबीआरसी को कक्षा शिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को शैक्षिक सपोर्ट भी प्रदान करना है। मगर ब्लाक सह समन्वयक पद पर तैनात शिक्षक अपने इस मूल दायित्व को भुला बैठे हैं।
इक्का दुक्का एबीआरसी ही है जो स्कूलों में पहुंचकर शिक्षकों का शैक्षिक सपोर्ट दे रहे हैं। बाकी के एबीआरसी ब्लाक संसाधन केंद्र पर तैनात खंड शिक्षा अधिकारियों के बाबू बनकर रह गए हैं। नतीजा यह है कि अब तक एक भी ब्लाक सह समन्वयक ने अपनी अनुश्रवण रिपोर्ट न तो जिला परियोजना कार्यालय को और न ही जिला शिक्षा एंव प्रशिक्षण संस्थान को उपलब्ध कराई है। इस निष्क्रियता से एबीआरसी की तैनाती के उदद्देश्य पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है।
ब्लाक सह समन्वयकों को स्कूलों में जाकर शिक्षक को शैक्षणिक सपोर्ट प्रदान करना है। साथ ही समस्त शैक्षिक गतिविधियों का अनुश्रवण कर उसकी रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध करानी है। अब तक कितने एबीआरसी ने अनुश्रवण रिपोर्ट उपलब्ध कराई है,इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। अगर अनुश्रवण रिपोर्ट नहीं जमा की गई है तो संबंधित एबीआरसी का उत्तरदायित्व तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए