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सस्ता बीज के चक्कर में 1000 किसान सब्सिडी से वंचित
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2015 11:49 PM IST
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हैदराबाद की बायर बीज कंपनी ने जिले में बीज वितरण में सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना को ही पलीता लगा दिया है। बीज कंपनी ने अपने फायदे के लिए निजी क्षेत्र में शासनादेश को ठेंगा दिखाकर सरकारी बीज गोदामों पर बिकने वाले रेट से कम पर किसानों को संकर धान बीज की बिक्री की, जिससे करीब 1000 किसानों को सरकारी सब्सिडी से भी वंचित होना पड़ा।
इस बात का खुलासा कुछ दिन पहले लखनऊ से बीज वितरण की जांच करने आयी टीम से परसपुर व बेल्सर में किसानों के शिकायत करने पर हुआ। अब कृषि विभाग ने मामले की जांच शुरू की है।
हैदराबाद की नामी बीज कंपनी बायर क्राप साइंस ने जिले के कृषि विभाग को एराइज -6444 गोल्ड व प्राईमा -6444 प्रजाति का करीब 200 क्विंटल संकर धान की आपूर्ति की थी। इस धान को जिले के कृषि बीज गोदामों पर डीबीटी योजना के तहत किसानों को बिक्री किया जाना था। बताया जाता है कि कंपनी ने निजी क्षेत्र के अलग अलग किसान खुशहाली केंद्रों पर भी करीब 1400 क्विंटल संकर धान का बीज बिक्री करवाया।
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शासनादेश के मुताबिक कंपनी को निजी क्षेत्र में सरकारी कें द्रों से कम रेट पर बीज की बिक्री नही करना था। ताकि सरकार की ओर से चलायी गई डायरेक्ट सब्सिडी हस्तांतरण योजना न सिर्फ सफल हो बल्कि पंजीकृत किसानों को सब्सिडी का लाभ भी मिल सके।
विभागीय सूत्रों व कुछ किसानों का कहना है कि कंपनी ने अपने मुनाफे के चक्कर में बाजार व खुशहाली केंद्रों पर सरकारी गोदामों पर निर्धारित धान बीज के रेट से कम पर बिक्री कर दी। ऐसे में किसानों ने सरकारी बीज गोदामों पर बिकने वाले धान बीज को मंहगा मानकर बाजार से बीज ले लिया।
इससे करीब एक हजार किसान सरकार की जहां सब्सिडी से वंचित हो गए वहीं सरकार के अधिक से अधिक पंजीकृत किसानों को सस्ता बीज दिलाने की डीबीटी योजना भी बेमानी बन कर रह गई। इस बात का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में योजना के बाबत राजधानी से जांच करने एक टीम गोंडा आई।
टीम से बेलसर व परसपुर क्षेत्र के किसानों ने सब्सिडी से वंचित रह जाने की शिकायत की थी। यही नहीं कुछ किसानों ने इस मामले की शिकायत परसपुर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी से भी की। अब उन शिकायतों को कृषि विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। कृषि विभाग गोंडा कार्यालय से शिकायतों की जांच कराई जा रही है।
ऐसे ठगे गए किसान
किसान बाजार से सस्ता बीज लेने के चक्कर में ठगे गए। सब्सिडी से भी वंचित हो गए। कृषि बीज गोदामों पर संकर धान की बिक्री 295 रुपये प्रति किलो की दर से की जानी थी। इस पर पंजीकृत किसान को 130 रुपये प्रति किलो की दर से सरकार की ओर से लिये गए बीज के हिसाब से उसके बैंक खाते में भेजी जाती। इस हिसाब से किसानों को एक किलो बीज 165 रुपये प्रति किलो पड़ता।
लेकिन बाजार में यही बीज 255 से 260 रुपये में बेच दिया गया। किसानों ने इस बीज को सरकारी केंद्र से सस्ता मानकर आंख मूंद कर खरीद लिया। किसानों को दुकानदारों ने रसीद भी नहीं दी। इससे किसान काफी घाटे में रहे।
बोले किसान: जहां सस्ता समझा ले लिया बीज
जानकारी के अभाव में भोले भाले किसान न सिर्फ सरकारी सब्सिडी से वंचित हुए बल्कि बाजार में बीज खरीद में ठग भी गए। किसान सीताराम मिश्र ने बताया कि सरकारी गोदाम पर केवल पंजीकृत किसानों को ही बीज दिया जा रहा था। जबकि वह समय बेड़न डालने का था।
कृषि विभाग व गोदाम पर विभाग का कोई पंजीयन करने वाला कर्मी भी नही था। ऐसे में मजबूरन बाजार से संकर बीज लेना पड़ा । दुकानदार बीज लेने पर रसीद भी नही देते हैं। किसान शत्रोहन यादव ने बताया कि बाजार में गोदाम से सस्ता बीज मिल रहा था।
दूसरे एक तो गोदाम काफी दूर है। वहां सब किसान पहुंच भी नही सकते। रही बात अनुदान की तो इसके लिए विभाग ने न तो प्रचार प्रसार कर बताया न ही किसानों का पंजीयन कराया। तो किसानों का नुकसान तो विभाग की लापरवाही से भी हुआ है।
जांच रिपोर्ट मिलने पर होगी कार्रवाई
कई क्षेत्रों में बीज कंपनी की ओर से बाजार व खुशहाली केंद्रों पर किसानों को संकर बीज की बिक्री सरकारी गोदामों से कम रेट पर की गई है। इस तरह की शिकायत मिली है । जिसकी ब्लॉकों के सहायक कृषि विकास अधिकारियों से जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।
-विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी गोंडा।
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इस बात का खुलासा कुछ दिन पहले लखनऊ से बीज वितरण की जांच करने आयी टीम से परसपुर व बेल्सर में किसानों के शिकायत करने पर हुआ। अब कृषि विभाग ने मामले की जांच शुरू की है।
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हैदराबाद की नामी बीज कंपनी बायर क्राप साइंस ने जिले के कृषि विभाग को एराइज -6444 गोल्ड व प्राईमा -6444 प्रजाति का करीब 200 क्विंटल संकर धान की आपूर्ति की थी। इस धान को जिले के कृषि बीज गोदामों पर डीबीटी योजना के तहत किसानों को बिक्री किया जाना था। बताया जाता है कि कंपनी ने निजी क्षेत्र के अलग अलग किसान खुशहाली केंद्रों पर भी करीब 1400 क्विंटल संकर धान का बीज बिक्री करवाया।
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शासनादेश के मुताबिक कंपनी को निजी क्षेत्र में सरकारी कें द्रों से कम रेट पर बीज की बिक्री नही करना था। ताकि सरकार की ओर से चलायी गई डायरेक्ट सब्सिडी हस्तांतरण योजना न सिर्फ सफल हो बल्कि पंजीकृत किसानों को सब्सिडी का लाभ भी मिल सके।
विभागीय सूत्रों व कुछ किसानों का कहना है कि कंपनी ने अपने मुनाफे के चक्कर में बाजार व खुशहाली केंद्रों पर सरकारी गोदामों पर निर्धारित धान बीज के रेट से कम पर बिक्री कर दी। ऐसे में किसानों ने सरकारी बीज गोदामों पर बिकने वाले धान बीज को मंहगा मानकर बाजार से बीज ले लिया।
इससे करीब एक हजार किसान सरकार की जहां सब्सिडी से वंचित हो गए वहीं सरकार के अधिक से अधिक पंजीकृत किसानों को सस्ता बीज दिलाने की डीबीटी योजना भी बेमानी बन कर रह गई। इस बात का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में योजना के बाबत राजधानी से जांच करने एक टीम गोंडा आई।
टीम से बेलसर व परसपुर क्षेत्र के किसानों ने सब्सिडी से वंचित रह जाने की शिकायत की थी। यही नहीं कुछ किसानों ने इस मामले की शिकायत परसपुर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी से भी की। अब उन शिकायतों को कृषि विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। कृषि विभाग गोंडा कार्यालय से शिकायतों की जांच कराई जा रही है।
ऐसे ठगे गए किसान
किसान बाजार से सस्ता बीज लेने के चक्कर में ठगे गए। सब्सिडी से भी वंचित हो गए। कृषि बीज गोदामों पर संकर धान की बिक्री 295 रुपये प्रति किलो की दर से की जानी थी। इस पर पंजीकृत किसान को 130 रुपये प्रति किलो की दर से सरकार की ओर से लिये गए बीज के हिसाब से उसके बैंक खाते में भेजी जाती। इस हिसाब से किसानों को एक किलो बीज 165 रुपये प्रति किलो पड़ता।
लेकिन बाजार में यही बीज 255 से 260 रुपये में बेच दिया गया। किसानों ने इस बीज को सरकारी केंद्र से सस्ता मानकर आंख मूंद कर खरीद लिया। किसानों को दुकानदारों ने रसीद भी नहीं दी। इससे किसान काफी घाटे में रहे।
बोले किसान: जहां सस्ता समझा ले लिया बीज
जानकारी के अभाव में भोले भाले किसान न सिर्फ सरकारी सब्सिडी से वंचित हुए बल्कि बाजार में बीज खरीद में ठग भी गए। किसान सीताराम मिश्र ने बताया कि सरकारी गोदाम पर केवल पंजीकृत किसानों को ही बीज दिया जा रहा था। जबकि वह समय बेड़न डालने का था।
कृषि विभाग व गोदाम पर विभाग का कोई पंजीयन करने वाला कर्मी भी नही था। ऐसे में मजबूरन बाजार से संकर बीज लेना पड़ा । दुकानदार बीज लेने पर रसीद भी नही देते हैं। किसान शत्रोहन यादव ने बताया कि बाजार में गोदाम से सस्ता बीज मिल रहा था।
दूसरे एक तो गोदाम काफी दूर है। वहां सब किसान पहुंच भी नही सकते। रही बात अनुदान की तो इसके लिए विभाग ने न तो प्रचार प्रसार कर बताया न ही किसानों का पंजीयन कराया। तो किसानों का नुकसान तो विभाग की लापरवाही से भी हुआ है।
जांच रिपोर्ट मिलने पर होगी कार्रवाई
कई क्षेत्रों में बीज कंपनी की ओर से बाजार व खुशहाली केंद्रों पर किसानों को संकर बीज की बिक्री सरकारी गोदामों से कम रेट पर की गई है। इस तरह की शिकायत मिली है । जिसकी ब्लॉकों के सहायक कृषि विकास अधिकारियों से जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।
-विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी गोंडा।