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गांव की चक्की में भरा पानी, आटे की भी मुश्किल
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रेवतीपुर से मां कामख्या धाम सड़क पर पानी की धार चलने के बीच हसनपुरा और वीरउपुर गांव टापू में तब्दील हो चुका है। दोनों गांव के चारों ओर खेत जलमग्न होने के बाद दिन पर दिन गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी से इन गांवों की आबादी भी चपेट में आ गई है। गांव की गलियों में गंगा का पानी प्रवेश करने लगा है। ऐसे में खेती बर्बाद होने के बाद लोगों के सामने आटा, तेल और नमक भी कुछ ही दिन का बचा है। जानवरों के लिए हरा चारा डूबने के बाद भूसे का ही सहारा है। गांव में धीरे-धीरे पानी घुसने के बाद कई परिवार के सामने भूसे के भी लाले पड़ सकते हैं।
इस समय करीब 3500 की आबादी वाले हसनपुरा गांव के लोगों के सामने गेहूं पिसाने, साफ पानी, और विषैले जीव-जंतुओं के काटने पर दवाई की समस्या प्रमुख है। क्योंकि टापू बने इस गांव में एक ही आटा चक्की है। उसमें भी बाढ़ का पानी घुस गया। इससे गेहूं पिसाने की सबसे बड़ी समस्या पैदा हो गई। ऐसे ही गांव के प्राइमरी स्कूल, पंचायत भवन में पानी भर गया है और एएनएम सेंटर में बाढ़ पीड़ित परिवार के लोग ठहराए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी टंकी तो बनी है लेकिन साफ पानी घरों तक नहीं मिल रही। क्योंकि सप्लाई नहीं होती। बाढ़ के दिनों में हैंडपंप के पानी काफी दूषित हो जाता है। जिससे गांव के सामने पेयजल की बड़ी है। हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने सोमवार को गांव में क्लोरीन की गोली बांटी है। जिसका इस्तेमाल कर लोग पानी पी रहे हैं। लेकिन बाढ़ ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
इधर, करीब 1500 आबादी वाले वीरउपुर में 400 घर बाढ़ की चपेट में है। ग्रामीणों ने बताया कि गोइठा, लकड़ी, अनाज और भूसा का बाढ़ में बहुत नुकसान पहुंचा है। अभी सरकारी राशन गांव में नहीं पहुंचा है। उम्मीद है कि एक दो दिन में मिलना शुरू हो जाएगा। ग्राम प्रधान शिव बचन राम का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत दो नावों के लिए तेल की व्यवस्था करने में हो रही है। रोजाना दोनों नाव पर तेल को लेकर पांच हजार का खर्च आ रहा है। लेकिन अधिकारियों से पैसा मांगने पर ग्राम निधि में पैसे भेजे जाने की बात की जा रही है। जबकि मौके पर तत्काल डीजल डलवाने के लिए पैसे की जरूरत पड़ रही है।
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इस समय करीब 3500 की आबादी वाले हसनपुरा गांव के लोगों के सामने गेहूं पिसाने, साफ पानी, और विषैले जीव-जंतुओं के काटने पर दवाई की समस्या प्रमुख है। क्योंकि टापू बने इस गांव में एक ही आटा चक्की है। उसमें भी बाढ़ का पानी घुस गया। इससे गेहूं पिसाने की सबसे बड़ी समस्या पैदा हो गई। ऐसे ही गांव के प्राइमरी स्कूल, पंचायत भवन में पानी भर गया है और एएनएम सेंटर में बाढ़ पीड़ित परिवार के लोग ठहराए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी टंकी तो बनी है लेकिन साफ पानी घरों तक नहीं मिल रही। क्योंकि सप्लाई नहीं होती। बाढ़ के दिनों में हैंडपंप के पानी काफी दूषित हो जाता है। जिससे गांव के सामने पेयजल की बड़ी है। हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने सोमवार को गांव में क्लोरीन की गोली बांटी है। जिसका इस्तेमाल कर लोग पानी पी रहे हैं। लेकिन बाढ़ ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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इधर, करीब 1500 आबादी वाले वीरउपुर में 400 घर बाढ़ की चपेट में है। ग्रामीणों ने बताया कि गोइठा, लकड़ी, अनाज और भूसा का बाढ़ में बहुत नुकसान पहुंचा है। अभी सरकारी राशन गांव में नहीं पहुंचा है। उम्मीद है कि एक दो दिन में मिलना शुरू हो जाएगा। ग्राम प्रधान शिव बचन राम का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत दो नावों के लिए तेल की व्यवस्था करने में हो रही है। रोजाना दोनों नाव पर तेल को लेकर पांच हजार का खर्च आ रहा है। लेकिन अधिकारियों से पैसा मांगने पर ग्राम निधि में पैसे भेजे जाने की बात की जा रही है। जबकि मौके पर तत्काल डीजल डलवाने के लिए पैसे की जरूरत पड़ रही है।
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