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Ghazipur News: गंगा में बारह नाले, एसटीपी के लिए नहीं मिल रही जगह

Sat, 18 Nov 2023 11:01 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Nov 2023 11:01 PM IST
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Twelve drains in Ganga, no space available for STP

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गाजीपुर। जिले में गंगा निर्मलीकरण परियोजना को लेकर अधिकारी लापरवाह हैं। नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। प्रशासन की ओर से जाली लगाकर कचरों को रोकने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर गंदे पानी को शुद्ध करने का दावा किया गया, लेकिन स्थिति यह है कि शहरी क्षेत्र में कार्य की रफ्तार धीमी है। सैदपुर में अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जमीन की तलाश ही पूरी नहीं हो सकी। गंगा में बारह नाले का गंदा पानी सीधे गंगा में गिर रहा है।
शहर के प्रमुख घाट में शुमार ददरी घाट के पास नाला गिर रहा है। गंदा पानी सीधे गंगा में प्रवेश कर रहा है। स्थिति यह है कि जाली सिर्फ कचरा रोक रही है, लेकिन गंदा पानी गिरने की रफ्तार जस की तस बनी हुई है। बड़ा महादेवा घाट के बाद कच्चा नाला बना हुआ, जिससे शहरों का गंदा पानी और कचरा गंगा में पानी में सीधे प्रवेश कर रहा है। कलेक्ट्रर घाट के पास निकल रहे नाले में जाली तो लगी है, लेकिन गंदे पानी को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इसी तरह स्टीमर घाट सहित अन्य घाटों की भी यहीं स्थिति बनी हुई है। उधर, सैदपुर नगर के शौचालय और घरों का निकला गंदा पानी नालों के जरिये पतित पावनी को प्रदूषित कर रहा है।
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सैदपुर नगर के सीवर के सारे पाइपों को सार्वजनिक नाले से जोड़ दिया गया है। इस तरह के आठ नाले, जिनका गंदा व बदबूदार पानी 24 घंटे गिरने से गंगा रोज प्रदूषित हो रही हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम डाॅ. ओपी आर्य ने निरीक्षण कर एसटीपी के लिए दो बीघा जमीन तलाशने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन मामले में तनिक भी गंभीर नहीं दिखाई पड़ रहा है। सैदपुर नगर में गंगा किनारे कुल आठ घाट हैं।
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इनमें रंग महल घाट, पकवा घाट, बूढ़े महादेव घाट, गाय घाट, संघत घाट, मियां घाट, सुभाष घाट व जोहरगंज का कोल्हुआ घाट शामिल है। कचरा रोकने के लिए कई नालों में लोहे की जालियां तक नहीं लगाई गई हैं। जिन कुछ नालों में लोहे की जालियां लगाई भी गई हैं। वह खुद ही कचरे से इतनी भर गई हैं, कि उनमें पानी तक अटका पड़ा हुआ है।

घाटों पर स्नान करने आने वाले भी वहां उठ रही दुर्गंध से परेशान हो जाते हैं। सैदपुर नगर पंचायत ईओ बीरेंद्र कुमार राव ने बताया कि एसटीपी के लिए जमीन की तलाश है। लेकिन सभी नालों में लोहे की मज़बूत जाली लगा दी गई है। इसके साथ ही अगले माह से सभी नालों का बायो रेमेडिएशन कराया जाएगा। इससे बदबू कम हो जाएगा और गंगा का ऑक्सीजन लेवल ऊपर बढ़ेगा।
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