{"_id":"6903b8626bfb55990907060d","slug":"three-days-of-rain-destroyed-8150-hectares-of-paddy-crop-ghazipur-news-c-313-1-svns1007-141492-2025-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: तीन दिनों की बारिश से 8150 हेक्टेयर में लगी धान की फसल बर्बाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: तीन दिनों की बारिश से 8150 हेक्टेयर में लगी धान की फसल बर्बाद
विज्ञापन
कासिमाबाद में हवा और बारिश से खेत में गिरी धान की तैयार फसल। संवाद
गाजीपुर। मोंथा चक्रवाती तूफान के चलते बीते तीन दिनों से बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों और खलिहान में पड़ी धान की फसल भीगने के साथ हवा से गिर गई है। करीब 14 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा से धान की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को भी जिले में रुक-रुक कर बारिश होती रही। तीन दिनों में जिले में 11 एमएम बारिश रिकार्ड की गई वहीं अधिकतम तापमान चार डिग्री लुढ़क कर 26 डिग्री सेंटीग्रेट पर पहुंच गया है। इससे दिन में ही लोगों को कंपकपी का एहसास हुआ। जिले में करीब 1.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। जानकारों के अनुसार इनमें से करीब पांच फीसदी यानी 8150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगी धान की फसल चक्रवाती तूफान मोंथा से हुई बारिश व तेज हवा के कारण या तो बर्बाद हो गई है या फिर खेतों में गिर गई है। आपदा विशेषज्ञ अशोक राय के अनुसार चक्रवाती तूफान का असर एक नंबर तक जिले में प्रभावी रहने की संभावना है। इसके चलते आने वाले दो दिनों तक तेज हवा के साथ कहीं तेज तो कहीं मध्यम बारिश हो सकती हैं। उधर, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि बारिश के चलते हुए फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। इसके लिए प्रभावित किसानों से जानकारी मांगी जा रही है।
बोई गई फसलों के नुकसान की बढ़ी आशंका-किसानों के अनुसार ज्यादा बारिश हुई तो हाल ही में बाेई गई आलू, मटर, चना, सरसों, चना आदि के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इस समय आलू, मटर, चना, सरसों, अलसी आदि फसलों की बोआई हो रही है। वहीं, किसानों ने अगेती पक कर तैयार धान की फसलों की कटाई व पिटाई शुरू कर दी है। कुछ किसान मजदूर लगाकर हाथ से धान की फसलों की कटाई करा दिए हैं, जो खेत व खलिहान में पड़ी है।
हरदासपुर निवासी किसान ब्रजेश राय ने बताया कि जिन खेतों में पानी भरा है और धान गिर गया है या फसल कटी है। धूप नहीं निकलने और बारिश होने से धान जमना शुरू हो जाएगा। एक भी दाना घर लाना मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन
बागा गांव निवासी किसान बीरु यादव ने बताया कि बारिश के चलते कटाई का कार्य नहीं हो पा रहा है। अगर ज्यादा बारिश हुई तो प्रति बीघा 15 क्विंटल धान की उपज करीब 32 हजार रुपये से अधिक का नुकसान होगा। बोई गई तिलहन व दलहन की फसलों के खराब होने की आशंका है।
देहवल निवासी किसान मीना देवी ने बताया कि धान की फसलों की कटाई बाधित है। जो फसल खड़ी है, उनमें अभी नुकसान नहीं है। अगर ज्यादा बारिश हुई तो वह भी फसल खराब हो जाएंगी।
बीते तीन दिन में हुई व अधिकतम व न्यूनतम तापमान
28 अक्टूबर 4 एमएम 31 24
29 अक्टूबर 2 एमएम 28 24
30 अक्टूबर 5 एमएम 26 24
विज्ञापन
बोई गई फसलों के नुकसान की बढ़ी आशंका-किसानों के अनुसार ज्यादा बारिश हुई तो हाल ही में बाेई गई आलू, मटर, चना, सरसों, चना आदि के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इस समय आलू, मटर, चना, सरसों, अलसी आदि फसलों की बोआई हो रही है। वहीं, किसानों ने अगेती पक कर तैयार धान की फसलों की कटाई व पिटाई शुरू कर दी है। कुछ किसान मजदूर लगाकर हाथ से धान की फसलों की कटाई करा दिए हैं, जो खेत व खलिहान में पड़ी है।
विज्ञापन
हरदासपुर निवासी किसान ब्रजेश राय ने बताया कि जिन खेतों में पानी भरा है और धान गिर गया है या फसल कटी है। धूप नहीं निकलने और बारिश होने से धान जमना शुरू हो जाएगा। एक भी दाना घर लाना मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन
बागा गांव निवासी किसान बीरु यादव ने बताया कि बारिश के चलते कटाई का कार्य नहीं हो पा रहा है। अगर ज्यादा बारिश हुई तो प्रति बीघा 15 क्विंटल धान की उपज करीब 32 हजार रुपये से अधिक का नुकसान होगा। बोई गई तिलहन व दलहन की फसलों के खराब होने की आशंका है।
देहवल निवासी किसान मीना देवी ने बताया कि धान की फसलों की कटाई बाधित है। जो फसल खड़ी है, उनमें अभी नुकसान नहीं है। अगर ज्यादा बारिश हुई तो वह भी फसल खराब हो जाएंगी।
बीते तीन दिन में हुई व अधिकतम व न्यूनतम तापमान
28 अक्टूबर 4 एमएम 31 24
29 अक्टूबर 2 एमएम 28 24
30 अक्टूबर 5 एमएम 26 24