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लोगों को खूब रुलाया इस ‘सावन’ ने
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Mon, 02 Mar 2015 11:25 PM IST
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मौसम ने ऐसी पलटी खाई का खाई कि फागुनी फिजा सावन में तब्दील हो गई। लेकिन
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ये ‘सावन’ लोगों के लिए परेशानी का सबब बना। रविवार की पूरी रात तेज और
धीमी बारिश से आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। घंटों हुई बरसात से शहर और
ग्रामीण क्षेत्रों की गड्ढायुक्त सड़कें झील में तब्दील हो गईं।
तेज हवाओं सेऔर बदली छाए रहने से ठंड दोबारा लौट आई। एक बार फिर लोगों को स्वेटर-जैकेट की शरण में जाना पड़ा। बारिश और तेज हवा से अगैती गेहूं, सरसों की फसलें खेतों में लोट गईं वहीं आलू के खेत में पानी लग गया। इससे आलू की खोदाई मौसम साफ होने तथा खेतों के सूखने तक प्रभावित रहेगी।
तीन दिन पहले अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। इस बीच बदली और धूप की सिलसिला चलता रहा, लेकिन रविवार को पूरे दिन धूप का दर्शन नहीं हुआ। इसी क्रम में शाम करीब 5 बजे से धीमी और तेज बारिश का जो क्रम शुरू हुआ, वह सोमवार दिन में 10 बजे तक जारी रहा। बिन मौसम लोगों को छतरी निकालनी पड़ी।
जिन लोगों को पास छतरी थी, वे तो बारिश के बीच आवागमन करते नजर आए, लेकिन जिनके पास बारिश से बचाव साधन नहीं था, वह कहीं आश्रय लेकर बारिश थमने का इंतजार करते रहे। वहीं कई लोग बारिश में भीगकर आवागमन करते नजर आए। रविवार को पूरे दिन बदली छाने के बाद शाम को बारिश का सिलसिला शुरू हो गया, जो सोमवार को दिन में 10 बजे तक बना रहा। घंटों बारिश होने से तेज सर्द हवा चलने के ठंड ने एक बार फिर से अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। इससे राहत के लिए पुन: लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा।
बिन मौसम बारिश से शहर की कई सड़कें नारकीय हो गईं। सबसे खराब स्थिति विशेश्वरगंज-रौजा मार्ग की रही। निर्माण कार्य की वजह से ब्रिज के दोनों तरफ की मिट्टी जहां कीचड़ के रूप में तब्दील हो गई, वहीं मार्ग पर मौजूद गड्ढे छोटे-छोटे झील के रूप में तब्दील हो गए। विशेश्वरगंज ओवरब्रिज के आरीवाल के बगल के मार्ग से काफी मुश्किलों के बीच लोगों को आना-जाना हुआ। एक तरफ जहां पैदल आवागमन करने वाले कई लोग फिसलकर गिर गए, वहीं बाइक और साइकिल सवार भी किसी तरह से कीचड़-पानी के बीच से हिलते-डुलते निकले।
तेज हवाओं सेऔर बदली छाए रहने से ठंड दोबारा लौट आई। एक बार फिर लोगों को स्वेटर-जैकेट की शरण में जाना पड़ा। बारिश और तेज हवा से अगैती गेहूं, सरसों की फसलें खेतों में लोट गईं वहीं आलू के खेत में पानी लग गया। इससे आलू की खोदाई मौसम साफ होने तथा खेतों के सूखने तक प्रभावित रहेगी।
तीन दिन पहले अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। इस बीच बदली और धूप की सिलसिला चलता रहा, लेकिन रविवार को पूरे दिन धूप का दर्शन नहीं हुआ। इसी क्रम में शाम करीब 5 बजे से धीमी और तेज बारिश का जो क्रम शुरू हुआ, वह सोमवार दिन में 10 बजे तक जारी रहा। बिन मौसम लोगों को छतरी निकालनी पड़ी।
जिन लोगों को पास छतरी थी, वे तो बारिश के बीच आवागमन करते नजर आए, लेकिन जिनके पास बारिश से बचाव साधन नहीं था, वह कहीं आश्रय लेकर बारिश थमने का इंतजार करते रहे। वहीं कई लोग बारिश में भीगकर आवागमन करते नजर आए। रविवार को पूरे दिन बदली छाने के बाद शाम को बारिश का सिलसिला शुरू हो गया, जो सोमवार को दिन में 10 बजे तक बना रहा। घंटों बारिश होने से तेज सर्द हवा चलने के ठंड ने एक बार फिर से अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। इससे राहत के लिए पुन: लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा।
बिन मौसम बारिश से शहर की कई सड़कें नारकीय हो गईं। सबसे खराब स्थिति विशेश्वरगंज-रौजा मार्ग की रही। निर्माण कार्य की वजह से ब्रिज के दोनों तरफ की मिट्टी जहां कीचड़ के रूप में तब्दील हो गई, वहीं मार्ग पर मौजूद गड्ढे छोटे-छोटे झील के रूप में तब्दील हो गए। विशेश्वरगंज ओवरब्रिज के आरीवाल के बगल के मार्ग से काफी मुश्किलों के बीच लोगों को आना-जाना हुआ। एक तरफ जहां पैदल आवागमन करने वाले कई लोग फिसलकर गिर गए, वहीं बाइक और साइकिल सवार भी किसी तरह से कीचड़-पानी के बीच से हिलते-डुलते निकले।