गाजीपुर। जिले में अक्सर अज्ञात शव मिलने के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन पुलिस ज्यादातर मामलों में शवों की पहचान नहीं कर पा रही है। ऐसे में अज्ञात शवों की गुत्थी सुलझने की जगह फाइलों में उलझ कर रह गई है। अधिकतर मामलों में तो पुलिस मौत का कारण भी पता नहीं कर सकी है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि शवों की शिनाख्त की कोशिश जारी है। पिछले पांच माह में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में करीब 25 से अधिक अज्ञात शव मिल चुके हैं। कुछ शव रेल पटरियों पर मिले, तो कुछ सुनसान इलाकों में बरामद हुए।
पुलिस की ओर से इन शवों की गुत्थी को सुलझाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन गुत्थी सुलझने के बजाय फाइलों में ही उलझी है। सूत्रों का मानना है कि पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अनसुलझे अधिकांश मामलों में मौत की वजह तय नहीं हो पाती है। रेल ट्रैक, सुनसान रास्तों, नहर तालाबों और जंगलों में मिले शवों को लेकर कभी हादसे की, तो कभी आत्महत्या की आशंका जताई जाती है। इतना ही नहीं जांच में भी कोई सटीक जानकारी निकलकर सामने नहीं आती है। इससे न तो मृतकों की पहचान हो सकी और न ही परिजनों तक पुलिस पहुंच पाई। वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार दूबे कहते कि जिन अज्ञात शवों की पहचान नहीं हो सकी है। वे आज भी पुलिस के रिकॉर्ड में केवल एक केस नंबर बनकर ही रह गए हैं। रहस्यमयी मौतों की गुत्थियां नहीं सुलझ पाती हैं। ऐसे में केस की फाइलें धूल खा रहीं हैं। जबकि पुलिस को अज्ञात शवों के मामलों को गंभीरता से लेकर विशेष टीम गठित करनी चाहिए। ताकि लंबित मामलों की गुत्थी सुलझ सके।