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सांसत में स्कूली बच्चों की जान
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 04 Aug 2016 11:41 PM IST
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सांसत में स्कूली बच्चों की जान
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आपका का लाडला यदि सुबह स्कूली वाहन से विद्यालय गया हो, तो आप ऊपर वाले दुआ करिए कि वह सही-सलामत घर लौट आए। जी हां... हम बात कर रहे हैं नगर के विभिन्न निजी स्कूलों में चलने वाले वाहनों की। इस स्कूल वाहनों में क्षमता से अधिक ठूंस कर बच्चों को बैठा दिया जा रहा है। जिससे हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। मैजिक और टेंपो में तो आठ बच्चों के बैठने की जगह है, लेकिन उसमें भेड़-बकरियों की तरह 16 से 18 बच्चों को ठूंस कर ले जाया जा रहा है।
क्षमता से अधिक बच्चों को आड़े-तिरछे बैठाना पड़ता है। ऐसे में उनके शरीर का हिस्सा और बैग टेंपो से बाहर भी रह जाता है। यही दशा बसों की भी है। उसमें भी मानक से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है।जानकारी के मुताबिक जनपद में कुल दो हजार स्कूली वाहनों के रजिस्ट्रेशन है जबकि शेष वाहन बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। समय-समय पर एआरटीओ विभाग द्वारा वाहनों की चेकिंग, चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की चेकिंग करना आवश्यक होता है।
सब कुछ देखते, जानते हुए भी जिला प्रशासन एवं एआरटीओ विभाग इन वाहनों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाता, न ही कार्रवाई करता है। अभिभावक मजबूर हैं। उनके शिकायत के बाद भी विद्यालय प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता। टेंपो चालक अपनी जेब का वजन बढ़ाने के लिए बच्चों की जान का रिस्क ले रहे हैं, वहीं स्कूल प्रशासन इस खतरे से पूरी तरह से बेखबर है। शायद इन्हें किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
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क्षमता से अधिक बच्चों को आड़े-तिरछे बैठाना पड़ता है। ऐसे में उनके शरीर का हिस्सा और बैग टेंपो से बाहर भी रह जाता है। यही दशा बसों की भी है। उसमें भी मानक से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है।जानकारी के मुताबिक जनपद में कुल दो हजार स्कूली वाहनों के रजिस्ट्रेशन है जबकि शेष वाहन बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। समय-समय पर एआरटीओ विभाग द्वारा वाहनों की चेकिंग, चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की चेकिंग करना आवश्यक होता है।
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सब कुछ देखते, जानते हुए भी जिला प्रशासन एवं एआरटीओ विभाग इन वाहनों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाता, न ही कार्रवाई करता है। अभिभावक मजबूर हैं। उनके शिकायत के बाद भी विद्यालय प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता। टेंपो चालक अपनी जेब का वजन बढ़ाने के लिए बच्चों की जान का रिस्क ले रहे हैं, वहीं स्कूल प्रशासन इस खतरे से पूरी तरह से बेखबर है। शायद इन्हें किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
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