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Ghazipur News: डेमो ट्रायल के तीन महीने बाद भी नहीं जली बत्ती
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करीब पांच करोड़ की लागत से लगाई जानी है 496 कलरयुक्त लाइटें
पुल के ऊपर 108 और नीचे लगेंगी करीब 386 लाइटें
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। गंगा नदी पर करीब 420 करोड़ की लागत से नव निर्मित रेल सह सड़क पुल को रोशन करने के लिए करीब पांच करोड़ की लागत से 496 कलरयुक्त लाइटें लगाई जानी है। बावजूद इसके डेमो ट्रायल के तीन महीने बीतने के बाद भी अभी तक रेलवे की उदासीनता के चलते इसे जगमग नहीं किया जा सका है। जबकि पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार इस नई परियोजना का शुभारंभ इसी वर्ष किया जाना है।
करीब 1050 मीटर लंबे इस पुल पर ट्रेनों एवं ट्रैफिक वाहनों के सुरक्षित एवं संरक्षित परिचालन के लिए इन लाइटों का डेमो ट्रायल विगत जनवरी माह में हो चुका है। उस समय बारह कलर युक्त लाइटों के ट्रायल के दौरान यह रेल सह सड़क पुल रंगीन रोशनी से जगमगा उठा था।
रेलवे के अनुसार पुल के ऊपर करीब 108 एवं नीचे करीब 386 लाइटें लगाई जानी है, जो बारह अलग-अलग रंगों में फ्लैशयुक्त लाइट रहेगी। लाइट की डिजाइन फिलिप्स की ओर से तैयार की गई है। मालूम हो कि इस रेल सह सड़क पुल की आधारशिला चौदह नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाजीपुर में आयोजित एक समारोह में रखी थी। इस पुल को 31 दिसंबर 2019 को बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन निर्माण में विलंब हुआ।
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रेलवे के मुताबिक गाजीपुर का यह रेल सह सड़क पुल वाराणसी के मालवीय ब्रिज जिसका निर्माण 1857 में हुआ था उससे लंबा है। यही नहीं यह नवनिर्मित रेल सह सड़क पुल प्रदेश का पहला ऐसा पुल है जो नवीन तकनीक स्टील ट्रस डिजायन (नट बोल्ट) के आधार पर निर्मित है।
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थीम बेसयुक्त फ्लैश लाइट लगाने का कार्य बहुत ही जल्द शुरू कर दिया जाएगा।- पीयूष कुमार, जीएम, आरवीएनएल (इलेक्ट्रिक)।
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इनसेट
प्लेटफार्म की ढलाई का कार्य अब तक अधूरा
सुहवल। ताड़ीघाट-मऊ रेल विस्तारीकरण परियोजना के तहत सोनवल में बन रहे नए रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म की ढलाई का कार्य आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। यही नहीं यात्रियों के लिए प्लेटफार्म पर बनने वाला शौचालय, पेयजल बूथ अधूरा है। जबकि यात्रियों के बैठने के लिए बेंच का निर्माण एवं छाया के लिए पांच शेल्टर का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में अभी भी महकमा आधी-अधूरी तैयारियों के बीच सीआरएस कराने की तैयारी में लगा है। जिस धीमी गति से काम चल रहा है, ऐसे में नहीं लगता है कि जून महीने तक भी यह पूरा हो सकेगा।
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पुल के ऊपर 108 और नीचे लगेंगी करीब 386 लाइटें
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। गंगा नदी पर करीब 420 करोड़ की लागत से नव निर्मित रेल सह सड़क पुल को रोशन करने के लिए करीब पांच करोड़ की लागत से 496 कलरयुक्त लाइटें लगाई जानी है। बावजूद इसके डेमो ट्रायल के तीन महीने बीतने के बाद भी अभी तक रेलवे की उदासीनता के चलते इसे जगमग नहीं किया जा सका है। जबकि पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार इस नई परियोजना का शुभारंभ इसी वर्ष किया जाना है।
करीब 1050 मीटर लंबे इस पुल पर ट्रेनों एवं ट्रैफिक वाहनों के सुरक्षित एवं संरक्षित परिचालन के लिए इन लाइटों का डेमो ट्रायल विगत जनवरी माह में हो चुका है। उस समय बारह कलर युक्त लाइटों के ट्रायल के दौरान यह रेल सह सड़क पुल रंगीन रोशनी से जगमगा उठा था।
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रेलवे के अनुसार पुल के ऊपर करीब 108 एवं नीचे करीब 386 लाइटें लगाई जानी है, जो बारह अलग-अलग रंगों में फ्लैशयुक्त लाइट रहेगी। लाइट की डिजाइन फिलिप्स की ओर से तैयार की गई है। मालूम हो कि इस रेल सह सड़क पुल की आधारशिला चौदह नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाजीपुर में आयोजित एक समारोह में रखी थी। इस पुल को 31 दिसंबर 2019 को बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन निर्माण में विलंब हुआ।
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रेलवे के मुताबिक गाजीपुर का यह रेल सह सड़क पुल वाराणसी के मालवीय ब्रिज जिसका निर्माण 1857 में हुआ था उससे लंबा है। यही नहीं यह नवनिर्मित रेल सह सड़क पुल प्रदेश का पहला ऐसा पुल है जो नवीन तकनीक स्टील ट्रस डिजायन (नट बोल्ट) के आधार पर निर्मित है।
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थीम बेसयुक्त फ्लैश लाइट लगाने का कार्य बहुत ही जल्द शुरू कर दिया जाएगा।- पीयूष कुमार, जीएम, आरवीएनएल (इलेक्ट्रिक)।
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प्लेटफार्म की ढलाई का कार्य अब तक अधूरा
सुहवल। ताड़ीघाट-मऊ रेल विस्तारीकरण परियोजना के तहत सोनवल में बन रहे नए रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म की ढलाई का कार्य आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। यही नहीं यात्रियों के लिए प्लेटफार्म पर बनने वाला शौचालय, पेयजल बूथ अधूरा है। जबकि यात्रियों के बैठने के लिए बेंच का निर्माण एवं छाया के लिए पांच शेल्टर का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में अभी भी महकमा आधी-अधूरी तैयारियों के बीच सीआरएस कराने की तैयारी में लगा है। जिस धीमी गति से काम चल रहा है, ऐसे में नहीं लगता है कि जून महीने तक भी यह पूरा हो सकेगा।