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सरकार अपने वादे से मुकर ही नहीं गई बल्कि किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का किया काम
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गाजीपुर। संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए कानून बनाने आदि के मुद्दे पर सरजू पांडेय पार्क में सोमवार को धरना दिया। धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा कर आंदोलन समाप्त किया था। सरकार अपने वादे से मुकर ही नहीं गई बल्कि किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे तत्काल प्रभाव से वापस लेने का वादा किया था। हरियाणा सरकार ने इस दिशा में काम किया लेकिन दिल्ली पुलिस ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि वह 54 में से 17 मुकदमे ही वापस लेगी। उसकी भी अभी तक कोई सूचना नहीं है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश की सरकार की तरफ से आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की वापसी की कोई पहल नहीं हुई है। अगर तत्काल मुकदमे वापस नहीं होते हैं और शहीद किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता है तो आंदोलन तेज किया जाएगा। मोर्चा ने लखीमपुर मामले में न्याय सुनिश्चित करने की मांग उठाई। सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह किसानों के धैर्य की परीक्षा न ले। इस अवसर पर 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की गारंटी सप्ताह आयोजित करने का निर्णय लिया। वक्ताओं ने कहा कि अगर तब तक सरकार ने अपने आश्वासन पर अमल नहीं किया तो किसानों के पास दोबारा आंदोलन शुरू करने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा। धरना सभा में मोती प्रधान, रामाश्रय यादव, अमरनाथ यादव, जनार्दन राम, नसीरुद्दीन, पारस यादव, मारकंडेय प्रसाद, सगीर अहमद, मनोज कुशवाहा, रामविलास यादव, भोला यादव, पारस यादव, भाकपा माले के जिला सचिव रामप्यारे राम ने विचार व्यक्त किए। अंत में राष्ट्रपति को संबोधित सात सूत्रीय मांग पत्र तहसीलदार सदर को सौंपा गया।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे तत्काल प्रभाव से वापस लेने का वादा किया था। हरियाणा सरकार ने इस दिशा में काम किया लेकिन दिल्ली पुलिस ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि वह 54 में से 17 मुकदमे ही वापस लेगी। उसकी भी अभी तक कोई सूचना नहीं है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश की सरकार की तरफ से आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की वापसी की कोई पहल नहीं हुई है। अगर तत्काल मुकदमे वापस नहीं होते हैं और शहीद किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता है तो आंदोलन तेज किया जाएगा। मोर्चा ने लखीमपुर मामले में न्याय सुनिश्चित करने की मांग उठाई। सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह किसानों के धैर्य की परीक्षा न ले। इस अवसर पर 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की गारंटी सप्ताह आयोजित करने का निर्णय लिया। वक्ताओं ने कहा कि अगर तब तक सरकार ने अपने आश्वासन पर अमल नहीं किया तो किसानों के पास दोबारा आंदोलन शुरू करने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा। धरना सभा में मोती प्रधान, रामाश्रय यादव, अमरनाथ यादव, जनार्दन राम, नसीरुद्दीन, पारस यादव, मारकंडेय प्रसाद, सगीर अहमद, मनोज कुशवाहा, रामविलास यादव, भोला यादव, पारस यादव, भाकपा माले के जिला सचिव रामप्यारे राम ने विचार व्यक्त किए। अंत में राष्ट्रपति को संबोधित सात सूत्रीय मांग पत्र तहसीलदार सदर को सौंपा गया।
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