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अप्रैल तक पंचायत भवनों का सपना करना है पूरा, ग्राम सचिवालय की अभी मंशा अधूरी
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शासन की ओर से पंचायत स्तर पर ग्राम सचिवालय उपलब्ध कराने की योजना जनपद में गति नहीं पकड़ पा रही है। अभी अधिकांश पंचायत भवनों को ग्राम सचिवालय की तरह विकसित नहीं किया जा सका है। इससे लोगों को आज भी ब्लॉक और तहसील पर छोटी-छोटी समस्याओं के लिए पहुंचना पड़ रहा है। साल 2018-19 में जिले में कुल 127 करोड़ 36 लाख रुपये से साल भर में 1238 पंचायत भवनों का निर्माण होना था। इसमें से अब तक 958 पंचायत भवन बन चुके हैं। जबकि अभी भी 280 निर्माणाधीन हैं। ऐसे में अप्रैल महीने में सभी पंचायत भवन बनकर पूरे हो जाएंगे, ऐसा लगता नहीं।
जिन पंचायत भवनों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है उनका काम पूरा कराने के लिए एक बार फिर अप्रैल 2022 तक की तिथि निर्धारित की गई है। मगर काम की गति को देखकर एक बार फिर संशय बरकरार है। इससे पहले भी कई बार समयावधि बढ़ाई जा चुकी है। पंचायत स्तर पर सुस्ती व अधिकारियों की उदासीनता के चलते बहुत सारे पंचायतों को उनका खुद का छत अभी तक नसीब नहीं हो सका है। बहुत से ऐसे पंचायत भी हैं जहां जमीन का चयन तक नहीं हो सका है। जिसके कारण शासन की मंशा पर पूरी तरह से पानी फिरता दिख रहा है।
पंचायत भवनों में बिजली, पानी, शौचालय, कंप्यूटर और पंचायत सहायक से लैस ग्राम सचिवालय विकसित करना है। जहां ब्लॉक और तहसील स्तर की सेवाएं खसरा, खतौनी, आय प्रमाण पत्र सहित अन्य सेवाओं को एक क्लिक पर ग्रामीणों को उपलब्ध कराना है। लेकिन सरकार की सुविधायुक्त ग्राम सचिवालय की मंशा अभी पूरी नहीं हो पा रही है। जनपद में अभी पंचायत भवनों का निर्माण अधूरा होने के साथ कुछ जगहों पर सुविधाओं को अंतिम रूप देना बाकी रह गया है। हालांकि 856 पंचायत भवनों में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने का जिम्मेदारों द्वारा दावा किया जा रहा है। जबकि जनपद में कुल 1149 पंचायत सहायक की नियुक्ति हो चुकी है।
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जिन पंचायत भवनों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है उनका काम पूरा कराने के लिए एक बार फिर अप्रैल 2022 तक की तिथि निर्धारित की गई है। मगर काम की गति को देखकर एक बार फिर संशय बरकरार है। इससे पहले भी कई बार समयावधि बढ़ाई जा चुकी है। पंचायत स्तर पर सुस्ती व अधिकारियों की उदासीनता के चलते बहुत सारे पंचायतों को उनका खुद का छत अभी तक नसीब नहीं हो सका है। बहुत से ऐसे पंचायत भी हैं जहां जमीन का चयन तक नहीं हो सका है। जिसके कारण शासन की मंशा पर पूरी तरह से पानी फिरता दिख रहा है।
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पंचायत भवनों में बिजली, पानी, शौचालय, कंप्यूटर और पंचायत सहायक से लैस ग्राम सचिवालय विकसित करना है। जहां ब्लॉक और तहसील स्तर की सेवाएं खसरा, खतौनी, आय प्रमाण पत्र सहित अन्य सेवाओं को एक क्लिक पर ग्रामीणों को उपलब्ध कराना है। लेकिन सरकार की सुविधायुक्त ग्राम सचिवालय की मंशा अभी पूरी नहीं हो पा रही है। जनपद में अभी पंचायत भवनों का निर्माण अधूरा होने के साथ कुछ जगहों पर सुविधाओं को अंतिम रूप देना बाकी रह गया है। हालांकि 856 पंचायत भवनों में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने का जिम्मेदारों द्वारा दावा किया जा रहा है। जबकि जनपद में कुल 1149 पंचायत सहायक की नियुक्ति हो चुकी है।
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