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शिक्षक-शिक्षार्थियों के बीच दूरी खत्म करना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो/गाजीपुर
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:33 PM IST
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स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में शुक्रवार को आयोजित गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. हरिहर प्रसाद सिंह ने कहा कि नि:संदेह ही आज शिक्षक और शिक्षार्थियों के बीच दूरी बढ़ गई है जिसे समाप्त करना आवश्यक है।
इस दौरान डॉ. श्रीकांत पांडेय ने कहा कि प्राचीन काल में गुरुकुल व्यवस्था थी और गुरु ही गुरुकुल का मालिक हुआ करता था। आज के समय में अब व्यवस्था ऐसी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के पूंजीवादी व्यवस्था ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है और ऐसे लोग अपने-अपने स्वार्थ को सिद्धांत बना रहे हैं। नतीजा शिक्षण संस्थाओं में टकराव शुरू हो गया है। छात्रसंघ अध्यक्ष अमरजीत यादव ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं में सबके कर्तव्यों का क्षरण हुआ है।
शिक्षण संस्थाओं में छात्र के हितों का ध्यान नहीं दिया जाता है। डॉ. विनय दूबे ने कहा कि गुरु को गुरुत्व और शिष्य को शिष्यत्व विकसित करना चाहिए। डॉ संजय चतुर्वेदी ने गुरु महिमा और शिष्य के अनुशासन प्रियता पर प्रकाश डाला। डॉ रामनारायण तिवारी, डॉ. बालेश्वर सिंह, राहुल सिंह यादव, प्रतिमा सिंह, प्रो. धर्म नारायण मिश्र मौजूद रहे।
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इस दौरान डॉ. श्रीकांत पांडेय ने कहा कि प्राचीन काल में गुरुकुल व्यवस्था थी और गुरु ही गुरुकुल का मालिक हुआ करता था। आज के समय में अब व्यवस्था ऐसी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के पूंजीवादी व्यवस्था ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है और ऐसे लोग अपने-अपने स्वार्थ को सिद्धांत बना रहे हैं। नतीजा शिक्षण संस्थाओं में टकराव शुरू हो गया है। छात्रसंघ अध्यक्ष अमरजीत यादव ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं में सबके कर्तव्यों का क्षरण हुआ है।
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शिक्षण संस्थाओं में छात्र के हितों का ध्यान नहीं दिया जाता है। डॉ. विनय दूबे ने कहा कि गुरु को गुरुत्व और शिष्य को शिष्यत्व विकसित करना चाहिए। डॉ संजय चतुर्वेदी ने गुरु महिमा और शिष्य के अनुशासन प्रियता पर प्रकाश डाला। डॉ रामनारायण तिवारी, डॉ. बालेश्वर सिंह, राहुल सिंह यादव, प्रतिमा सिंह, प्रो. धर्म नारायण मिश्र मौजूद रहे।
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