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Ghazipur News: नया ट्रैक लगाने की जगह पुराने ही लगा रहा महकमा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर/सुहवल। सोनवल क्रासिंग के पास 11 नंबर पुलिया से दिलदारनगर जंक्शन तक करीब 16 किमी लंबे रूट पर आधुनिक तकनीक पीक्यूआरएस (प्लासर क्विक रिलेयिंग सिस्टम) से पुराने स्लीपरों एवं ट्रैक को उखाड़ने का काम शुरू हो चुका है। ईसीआर द्वारा शुरू किया गया यह कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। लोगों का कहना है कि जिस धीमी गति से यह प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में मार्च के अंतिम सप्ताह तक यह कार्य पूरा हो सकेगा आसान नहीं नजर आ रहा।
यह पूरा कार्य दोपहर बारह बजे से लेकर शाम पांच बजे तक करीब पांच घंटे तक चल रहा है। इस दौरान पीक्यूआरएस सिस्टम से पहले पुरानी रेल एवं स्लीपरों को हटाया जाता है। इसके तुरंत बाद नई लगाई जाती है। इस सिस्टम से अब तक करीब तीन सौ मीटर नया स्लीपर लगाने का काम ही हो सका है। नया ट्रैक लगाने की जगह पुराने ट्रैक ही महकमे की ओर से लगाए जा रहे हैं, जबकि नया लगाए जाने का निर्देश है।
इस तरह महकमे द्वारा पुरानी रेल पटरियों से ही ट्रेन संचालन की तैयारी है। मालूम हो कि चालू मार्च माह के अंतिम सप्ताह में ताड़ीघाट-मऊ पहले चरण की इस नई परियोजना का ट्रायल एवं सीआरएस सुनिश्चित है, लेकिन महकमे ने ट्रेनों की रफ्तार एवं सुरक्षित परिचालन को बढ़ावा देने के लिए यह कार्य निर्देश के एक महीने बाद शुरू किया है।
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पीडब्लूआई दिलीप कुमार ने बताया कि काम तेजी से शुरू हो गया है। पुराने की जगह नया रेलवे ट्रैक लगाने का काम इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगा। बताया कि पीक्यूआरएस मशीन से बिछाई गई पटरियां बहुत अधिक मजबूत होने के साथ ही इनमें मानवीय चूक और तकनीकी खामी भी नहीं होती। एक दिन में 260 मीटर तक यह कार्य किया जाता है।
इनसेट
ट्रायल में तीन हफ्ते से भी कम, नहीं लगीं मशीनें
मशीनें समय पर लग पाएंगी इसे लेकर है संशय
संवाद न्यूज एजेंसी
सुहवल। ताड़ीघाट-मऊ नई रेल परियोजना के ट्रायल में तीन सप्ताह से भी कम का समय शेष है। इसके बावजूद ट्रेनों के सुरक्षित एवं संरक्षित संचालन के लिए करोड़ों की लागत से एसी-डीसी सिग्नल कंट्रोलिंग सिस्टम रिले कक्ष में अभी तक आधुनिक मशीनों को लगाने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। कार्य की धीमी गति से मशीनों को लगाने का काम समय पर पूरा हो सकेगा इसको लेकर संशय है।
नए रूट पर करीब 80 से अधिक पैनल बाक्स लगाने के साथ ही उसे एक-दूसरे से जोड़ने के लिए भूमिगत केबिल, एक्सल काउंटर आदि लगाने का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक यह सिग्नल कंट्रोलिंग सिस्टम पूरी तरह से स्टेशन मास्टर की देखरेख में संचालित होगा। इस आधुनिक सिग्नल कंट्रोलिंग सिस्टम के लग जाने के बाद ट्रेनों को रफ्तार मिलेगी।
किसी मानवीय चूक की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं एवं हादसों की आशंका को कम करने के लिए रेलवे की ओर से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है। इसके साथ ही साथ सवारी गाड़ी की टाइमिंग में भी सुधार होगा। मालूम हो कि सोनवल में करीब पचीस करोड़ की लागत से बन रहे इस नए रेलवे स्टेशन का संचालन अगले महीने से सुनिश्चित है। इस संबंध में आरवीएनएल के सीपीएम विकास चंद्रा ने बताया कि काम तेजी से चल रहा है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
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गाजीपुर/सुहवल। सोनवल क्रासिंग के पास 11 नंबर पुलिया से दिलदारनगर जंक्शन तक करीब 16 किमी लंबे रूट पर आधुनिक तकनीक पीक्यूआरएस (प्लासर क्विक रिलेयिंग सिस्टम) से पुराने स्लीपरों एवं ट्रैक को उखाड़ने का काम शुरू हो चुका है। ईसीआर द्वारा शुरू किया गया यह कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। लोगों का कहना है कि जिस धीमी गति से यह प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में मार्च के अंतिम सप्ताह तक यह कार्य पूरा हो सकेगा आसान नहीं नजर आ रहा।
यह पूरा कार्य दोपहर बारह बजे से लेकर शाम पांच बजे तक करीब पांच घंटे तक चल रहा है। इस दौरान पीक्यूआरएस सिस्टम से पहले पुरानी रेल एवं स्लीपरों को हटाया जाता है। इसके तुरंत बाद नई लगाई जाती है। इस सिस्टम से अब तक करीब तीन सौ मीटर नया स्लीपर लगाने का काम ही हो सका है। नया ट्रैक लगाने की जगह पुराने ट्रैक ही महकमे की ओर से लगाए जा रहे हैं, जबकि नया लगाए जाने का निर्देश है।
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इस तरह महकमे द्वारा पुरानी रेल पटरियों से ही ट्रेन संचालन की तैयारी है। मालूम हो कि चालू मार्च माह के अंतिम सप्ताह में ताड़ीघाट-मऊ पहले चरण की इस नई परियोजना का ट्रायल एवं सीआरएस सुनिश्चित है, लेकिन महकमे ने ट्रेनों की रफ्तार एवं सुरक्षित परिचालन को बढ़ावा देने के लिए यह कार्य निर्देश के एक महीने बाद शुरू किया है।
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पीडब्लूआई दिलीप कुमार ने बताया कि काम तेजी से शुरू हो गया है। पुराने की जगह नया रेलवे ट्रैक लगाने का काम इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगा। बताया कि पीक्यूआरएस मशीन से बिछाई गई पटरियां बहुत अधिक मजबूत होने के साथ ही इनमें मानवीय चूक और तकनीकी खामी भी नहीं होती। एक दिन में 260 मीटर तक यह कार्य किया जाता है।
इनसेट
ट्रायल में तीन हफ्ते से भी कम, नहीं लगीं मशीनें
मशीनें समय पर लग पाएंगी इसे लेकर है संशय
संवाद न्यूज एजेंसी
सुहवल। ताड़ीघाट-मऊ नई रेल परियोजना के ट्रायल में तीन सप्ताह से भी कम का समय शेष है। इसके बावजूद ट्रेनों के सुरक्षित एवं संरक्षित संचालन के लिए करोड़ों की लागत से एसी-डीसी सिग्नल कंट्रोलिंग सिस्टम रिले कक्ष में अभी तक आधुनिक मशीनों को लगाने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। कार्य की धीमी गति से मशीनों को लगाने का काम समय पर पूरा हो सकेगा इसको लेकर संशय है।
नए रूट पर करीब 80 से अधिक पैनल बाक्स लगाने के साथ ही उसे एक-दूसरे से जोड़ने के लिए भूमिगत केबिल, एक्सल काउंटर आदि लगाने का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक यह सिग्नल कंट्रोलिंग सिस्टम पूरी तरह से स्टेशन मास्टर की देखरेख में संचालित होगा। इस आधुनिक सिग्नल कंट्रोलिंग सिस्टम के लग जाने के बाद ट्रेनों को रफ्तार मिलेगी।
किसी मानवीय चूक की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं एवं हादसों की आशंका को कम करने के लिए रेलवे की ओर से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है। इसके साथ ही साथ सवारी गाड़ी की टाइमिंग में भी सुधार होगा। मालूम हो कि सोनवल में करीब पचीस करोड़ की लागत से बन रहे इस नए रेलवे स्टेशन का संचालन अगले महीने से सुनिश्चित है। इस संबंध में आरवीएनएल के सीपीएम विकास चंद्रा ने बताया कि काम तेजी से चल रहा है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।