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बच्चों को नहीं मिल रहा मध्याह्न भोजन
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:09 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के वितरण के लिए गुणवत्तायुक्त भोजन, फल एवं दूध देने के नाम पर औपचारिकता पूरी की जा रही है। वहंी कई विद्यालयों में महीने में कई दिनों तक भोजन नही बन रहा है। इससे परेशान अभिभावकों ने संबंधित अधिकारियों से बच्चों को भोजन दिए जाने की मांग की। बावजूद इसके शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नही उठाया गया।
जिले में1953 प्राथमिक एवं 802 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनके अलावा मान्यता प्राप्त एडेड विद्यालयों भी बड़ी संख्या में चल रहे हैं। इन विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन, ठहराव और बच्चों को कुपोषण से बचाने के उद्देश्य से तमाम योजनाएं संचालित हैं। लेकिन इन विद्यालयाें में मध्यान्ह भोजन योजना का सही से पालन नही किया जा रहा है। वर्ष 2004 में प्राथमिक स्तर पर पका-पकाया भोजन देने की व्यवस्था सरकार ने शुरू की थी जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर यह व्यवस्था वर्ष 2007 से की गई है। प्रति बच्चों की दर से प्राथमिक स्तर पर 4.13 पैसा एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर 6.18 पैसा निर्धारित किया गया है। इस धनराशि से बच्चों को पका-पकाया भोजन की व्यवस्था ग्राम शिक्षा समितियों के माध्यम से की जा रही है। इसके अलावा सरकार ने प्रत्येक सोमवार को फल प्रति छात्र चार रुपये की दर से और बुधवार को दूध देने की व्यवस्था की है।
पका-पकाया भोजन बनाने में गुणवत्ता का ध्यान नही रखा जा रहा है। इसके अलावा फल एवं दूध का वितरण भी कभी-कभी ही बच्चों में होता है। जिले के तमाम विद्यालयों में महीने में कई दिनों तक भोजन नहीं बनता। इस तरह की शिकायतें अभिभावकों की तरफ से सक्षम अधिकारियों के सामने की गई है। इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विद्यालयों में बच्चों को मीनू के अनुसार प्रति दिन भोजन नही मिल रहा है। जिसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी है।
जिले में1953 प्राथमिक एवं 802 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनके अलावा मान्यता प्राप्त एडेड विद्यालयों भी बड़ी संख्या में चल रहे हैं। इन विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन, ठहराव और बच्चों को कुपोषण से बचाने के उद्देश्य से तमाम योजनाएं संचालित हैं। लेकिन इन विद्यालयाें में मध्यान्ह भोजन योजना का सही से पालन नही किया जा रहा है। वर्ष 2004 में प्राथमिक स्तर पर पका-पकाया भोजन देने की व्यवस्था सरकार ने शुरू की थी जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर यह व्यवस्था वर्ष 2007 से की गई है। प्रति बच्चों की दर से प्राथमिक स्तर पर 4.13 पैसा एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर 6.18 पैसा निर्धारित किया गया है। इस धनराशि से बच्चों को पका-पकाया भोजन की व्यवस्था ग्राम शिक्षा समितियों के माध्यम से की जा रही है। इसके अलावा सरकार ने प्रत्येक सोमवार को फल प्रति छात्र चार रुपये की दर से और बुधवार को दूध देने की व्यवस्था की है।
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पका-पकाया भोजन बनाने में गुणवत्ता का ध्यान नही रखा जा रहा है। इसके अलावा फल एवं दूध का वितरण भी कभी-कभी ही बच्चों में होता है। जिले के तमाम विद्यालयों में महीने में कई दिनों तक भोजन नहीं बनता। इस तरह की शिकायतें अभिभावकों की तरफ से सक्षम अधिकारियों के सामने की गई है। इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विद्यालयों में बच्चों को मीनू के अनुसार प्रति दिन भोजन नही मिल रहा है। जिसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी है।
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