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प्राचीन बद्रीचंद्र पोखरे का अस्तित्व खतरे में
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 25 Jun 2016 11:48 PM IST
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The ancient badricandra puddle Vulnerable
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जिले के प्राचीनतम एवं ऐतिहासिक पोखरे में शुमार बद्रीचंद पोखरा अपने अस्तित्व खतरे में है। सिटी रेलवे स्टेशन से करीब दो किलोमीटर पूरब असमानी चक गांव में स्थित इस पोखरे से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि लोलार्क छठ पर्व पर जो महिला यहां स्नान करती है, उसे संतान की प्राप्ति होती है। रख-रखाव के अभाव में पोखरा बदहाली का शिकार है।पोखरा के संबंध में बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि बद्रीचंद्र एक धार्मिक, धनाढ्य और संपन्न व्यक्ति थे। लेकिन संतान सुख से वंचित थे। इसी वजह से वह काफी चिंतित रहते थे।
एक बार प्रात:काल अकेले भ्रमण कर रहे थे। एक संत उनके पास आए और उनसे उनके दुख का कारण पूछा। इसके बाद कहा कि वह पोखरे का निर्माण कराएं। महात्मा ने यह भी कहा कि जो भी पोखरे में स्नान एवं पूजा-अर्चना करेगा उसे मनोवांक्षित फल मिलेगा। पोखरे में स्नान करने वाली महिला को संतान की प्राप्ति होगी। इतने कहने के बाद महात्मा अदृश्य हो गए। बद्रीचंद्र ने सोच-विचार करते हुए पोखरा खुदवाया।
उनकी पत्नी को पोखरे में स्नान करने पर संतान की प्राप्ति हुई। पोखरा के चारों तरफ सीमेंट की सीढ़ियां बनी हैं और कपड़ा बदलने के लिए दोनों तरफ कमरे बनाए गए हैं। जो खस्ताहाल हैं। एक तरफ जहां इस पोखरा पर महिलाएं छठ पूजा, तीज करती हैं, वहीं भादो माह में लोलार्क छठ पर बड़ी संख्या में महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए पोखरा में स्नान करती है।जिस महिला की मन्नत पूरी हो जाती है, वह यहां स्नान करने के बाद शरीर के सारे कपड़े पोखरे पर छोड़ देती है, लेकिन रख-रखाव के अभाव में खास महत्व रखने वाले इस पोखरा का अस्स्तिव धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।
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यह जनपद की एक ऐतिहासिक धरोहर है। इसे बचाने के लिए शासन-प्रशासन के स्तर से कोई पहल नहीं की जा रही है।
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एक बार प्रात:काल अकेले भ्रमण कर रहे थे। एक संत उनके पास आए और उनसे उनके दुख का कारण पूछा। इसके बाद कहा कि वह पोखरे का निर्माण कराएं। महात्मा ने यह भी कहा कि जो भी पोखरे में स्नान एवं पूजा-अर्चना करेगा उसे मनोवांक्षित फल मिलेगा। पोखरे में स्नान करने वाली महिला को संतान की प्राप्ति होगी। इतने कहने के बाद महात्मा अदृश्य हो गए। बद्रीचंद्र ने सोच-विचार करते हुए पोखरा खुदवाया।
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उनकी पत्नी को पोखरे में स्नान करने पर संतान की प्राप्ति हुई। पोखरा के चारों तरफ सीमेंट की सीढ़ियां बनी हैं और कपड़ा बदलने के लिए दोनों तरफ कमरे बनाए गए हैं। जो खस्ताहाल हैं। एक तरफ जहां इस पोखरा पर महिलाएं छठ पूजा, तीज करती हैं, वहीं भादो माह में लोलार्क छठ पर बड़ी संख्या में महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए पोखरा में स्नान करती है।जिस महिला की मन्नत पूरी हो जाती है, वह यहां स्नान करने के बाद शरीर के सारे कपड़े पोखरे पर छोड़ देती है, लेकिन रख-रखाव के अभाव में खास महत्व रखने वाले इस पोखरा का अस्स्तिव धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।
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यह जनपद की एक ऐतिहासिक धरोहर है। इसे बचाने के लिए शासन-प्रशासन के स्तर से कोई पहल नहीं की जा रही है।