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सरकारी अस्पतालों में दो वर्ष से टिटेनस इंजेक्शन का टोटा

Fri, 29 Oct 2021 11:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 11:27 PM IST
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Tetanus injection in government hospitals for two years
जिले के सरकारी अस्पतालों में सामान्य बीमारियों में प्रयुक्त होने वाली दवाओं का टोटा है। दो वर्ष से अस्पतालों में टिटनेस का इंजेक्शन नहीं है। इसके अलावा बुखार, दर्द आदि में इस्तेमाल होने वाली दवाएं नहीं हैं। अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल से दवाएं तो लिख दी जाती हैं लेकिन उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। इसकी वजह से उन्हें बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ती है।
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दुर्घटना में घायल मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए सबसे पहले टिटनेस का इंजेक्शन लगाया जाता है। सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीटनेस का इंजेक्शन न होने से यह इंजेक्शन मरीज के तीमारदारों को मेडिकल स्टोरों से खरीदना पड़ रहा है। इसी प्रकार सामान्य बीमारियों में प्रयुक्त होने वाली दवाएं भी नहीं हैं। हालांकि इन दवाओं की मांग की गई है लेकिन एक सप्ताह का समय बीत जाने के बाद भी दवाएं नहीं आईं। जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हैं। इसके अलावा हेल्थ वेलनेस सेंटर एवं स्वास्थ्य उपकेंद्र के साथ न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं लेकिन यहां दवाओं की कमी बनी हुई है। इन सरकारी अस्पतालों में मरीजों को टिटनेस के इंजेक्शन के साथ ही पैरासिटामॉल सहित ऐसी अन्य दवाईयां उपलब्ध कराई जाती हैं लेकिन इन दवाओं के अभाव के चलते मरीज परेशान हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बीते एक अप्रैल 2019 से 11 अक्तूबर 2019 तक मात्र 14200 वायल ही टिटेनस की उपलब्ध हो पाई। इसके बाद टिटनेस की एक भी वायल कारपोरेशन की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इससे विभाग के आला अधिकारी बेखबर हैं। ऐसे में अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं की स्थिति भी जस की तस बनी हुई है। सीएमओ डॉ.हरिगोविंद सिंह ने बताया कि टिटनेस की आपूर्ति सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए आती है। अन्य लोगों के लिए यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। फिलहाल दवाओं का मांगपत्र भेजा गया है।
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