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नगर के 23 नालों में लगेगा जाल, टेंडर प्रक्रिया हुई पूरी
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गाजीपुर। शहर के सीवर से निकलने वाले पानी को शोधित करके कृषि के लिए उपयोग में लाया जाएगा जबकि शहर के नालों से गंगा में कचरा न गिरे इसके इंतजाम भी किए जा रहे हैं। कचरा रोकने के लिए नगर के 23 नालों में जाल लगाया जाएगा। दोनों तरफ से जाल लगाने की योजना है, जिस पर 43 लाख रुपये की लागत आएगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
नगर पालिका गंगा को प्रदूषण से बचाने लिए प्रयास कर रही है। शहर भर का दूषित पानी छोटे-बड़े 23 नालों के जरिए गंगा में पहुंचता है। इनके साथ गंदगी को आती ही है प्लास्टिक जैसा ठोस कचरा नदी में पहुंचता है। इससे गंगा में प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ जलचरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नवापुरा घाट, कलेक्ट्रेट घाट, ददरी घाट आदि इलाकों में बड़े नालों का पानी नदी में सीधे गिरता है। इसको रोकने के लिए नगर पालिका परिषद नाले के दोनों मुहाने पर जाल लगाएगा। इस विशेष जाल से ज्यादातर पानी छानकर नदी में पहुंचेगा और गंगा कम प्रदूषित होंगी। नगर पालिका परिषद जाल लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पिछले महीने पूरी कर ली थी। करीब 43 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस कार्य की जल्द ही शुरूआत कर दी जाएगी। नगर पालिका के अधिकारियों को मुताबिक यह काम दो महीने में पूरा हो जाएगा।
दूसरी तरफ शहर भर में सीवर लाइन बिछाई जा रही है, जिससे घरेलू सीवर का पानी स्टीमर घाट पर एकत्रित होगा और वहां से उसे अंधऊ के समीप जमुना देवा गांव ले जाया जाएगा। वहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जल को शोधित करके उसे कृषि कार्य में इस्तेमाल किया जाएगा। सीवर लाइन और एसटीपी बनने के बाद नालों के जरिए घरों के बजाय बरसात का पानी गंगा में जाएगा। जाली लगने के बाद बरसाती पानी से ठोस कचरा नहीं पहुंचेगा। इस तह गंगा निर्मल रहेंगी। रोजाना स्नान करने वाले स्नानर्थियों को भी सहूलियत होगी।
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43 लाख रुपये की लागत से नगर के 23 नालों में आरसीसी सपोर्ट युक्त जाल लगाया जाएगा, जिससे कचरा गंगा के पानी में न जाए। टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जल्द कार्य शुरू होगा।- लालचंद्र सरोज, ईओ नगर पालिका परिषद, गाजीपुर
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नगर पालिका गंगा को प्रदूषण से बचाने लिए प्रयास कर रही है। शहर भर का दूषित पानी छोटे-बड़े 23 नालों के जरिए गंगा में पहुंचता है। इनके साथ गंदगी को आती ही है प्लास्टिक जैसा ठोस कचरा नदी में पहुंचता है। इससे गंगा में प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ जलचरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नवापुरा घाट, कलेक्ट्रेट घाट, ददरी घाट आदि इलाकों में बड़े नालों का पानी नदी में सीधे गिरता है। इसको रोकने के लिए नगर पालिका परिषद नाले के दोनों मुहाने पर जाल लगाएगा। इस विशेष जाल से ज्यादातर पानी छानकर नदी में पहुंचेगा और गंगा कम प्रदूषित होंगी। नगर पालिका परिषद जाल लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पिछले महीने पूरी कर ली थी। करीब 43 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस कार्य की जल्द ही शुरूआत कर दी जाएगी। नगर पालिका के अधिकारियों को मुताबिक यह काम दो महीने में पूरा हो जाएगा।
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दूसरी तरफ शहर भर में सीवर लाइन बिछाई जा रही है, जिससे घरेलू सीवर का पानी स्टीमर घाट पर एकत्रित होगा और वहां से उसे अंधऊ के समीप जमुना देवा गांव ले जाया जाएगा। वहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जल को शोधित करके उसे कृषि कार्य में इस्तेमाल किया जाएगा। सीवर लाइन और एसटीपी बनने के बाद नालों के जरिए घरों के बजाय बरसात का पानी गंगा में जाएगा। जाली लगने के बाद बरसाती पानी से ठोस कचरा नहीं पहुंचेगा। इस तह गंगा निर्मल रहेंगी। रोजाना स्नान करने वाले स्नानर्थियों को भी सहूलियत होगी।
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43 लाख रुपये की लागत से नगर के 23 नालों में आरसीसी सपोर्ट युक्त जाल लगाया जाएगा, जिससे कचरा गंगा के पानी में न जाए। टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जल्द कार्य शुरू होगा।- लालचंद्र सरोज, ईओ नगर पालिका परिषद, गाजीपुर