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दुष्कर्म आरोपी को दस वर्ष का सश्रम कारावास
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अपर सत्र न्यायाधीश व एफटीसी प्रथम संजय कुमार यादव की अदालत ने सोमवार को विकलांग पीड़िता के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी सिद्ध शहनवाज को दस वर्ष का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को देने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार थाना करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले व्यक्ति ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि 19 फरवरी 2019 को गांव के ही शहनवाज ने उसकी विकलांग पुत्री को बहला- फुसलाकर उसके साथ कई महीनों से गलत काम करता रहा, जिससे पुत्री गर्भवती हो गई। प्रसव होने में मात्र एक माह शेष रह गया था। तब घटना की जानकारी हुई। वादी ने आरोपी के विरुद्ध थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह ने कुल नौ गवाहों को पेश किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने उपरोक्त फैसला सुनाते हुए मुकदमे के विवेचक के विरुद्ध विवेचना में की गई कई लापरवाही को निर्णय में दर्शित करते हुए विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ पुलिस महानिदेशक लखनऊ को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया है। साथ ही एक माह के अंदर कार्रवाई का जवाब मांगा है।
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अभियोजन के अनुसार थाना करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले व्यक्ति ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि 19 फरवरी 2019 को गांव के ही शहनवाज ने उसकी विकलांग पुत्री को बहला- फुसलाकर उसके साथ कई महीनों से गलत काम करता रहा, जिससे पुत्री गर्भवती हो गई। प्रसव होने में मात्र एक माह शेष रह गया था। तब घटना की जानकारी हुई। वादी ने आरोपी के विरुद्ध थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह ने कुल नौ गवाहों को पेश किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने उपरोक्त फैसला सुनाते हुए मुकदमे के विवेचक के विरुद्ध विवेचना में की गई कई लापरवाही को निर्णय में दर्शित करते हुए विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ पुलिस महानिदेशक लखनऊ को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया है। साथ ही एक माह के अंदर कार्रवाई का जवाब मांगा है।
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