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परिषदीय विद्यालयों में नहीं बढ़ रही हैं छात्रों की संख्या
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 30 Jun 2016 11:30 PM IST
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स्कूली बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में संचालित बेसिक विद्यालयों और मान्यता प्राप्त प्राइवेट विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन और ठहराव के उद्देश्य को लेकर प्रति वर्ष चलाया जा रहा स्कूल चलो अभियान बहुत सफल होता नहीं दिख रहा है। परिषदीय विद्यालयों की अपेक्षा निजी विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह बेसिक शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक एक किलोमीटर पर प्राथमिक और दो किलोमीटर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जा चुके हैं। विद्यालयों की संख्या जहां लगातार बढ़ रही है वहीं इनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हो रही है। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि यहां पढ़ाई का स्तर संतोषजनक नहीं है। यही नहीं बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत नहीं है। इन विद्यालयों में अपने बच्चों को भेजने के प्रति अभिभावक भी गंभीर नहीं हैं। पठन-पाठन का माहौल न होने के कारण इन विद्यालयों में लगातार छात्रों की संख्या घट रही है। निजी स्कूलों में पठन-पाठन पर ध्यान देने के साथ ही वह संसाधन और साज-सज्जा से लैस हैैं। यही कारण है कि परिषदीय विद्यालयों की अपेक्षा निजी स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जिले में बेसिक शिक्षा के संचालन के लिए प्रति वर्ष सौ करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया जाता है। वहीं निजी स्कूलों में इस तरह का कोई भी बजट उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद अपनी व्यवस्था के बल पर ये स्कूल पूरी तरह से बच्चों और अभिभावकों को आकर्षित कर रहे हैं। जिले में गत वर्ष स्कूल चलो अभियान के बाद 299584 बच्चे नामांकित हुए थे। इसमें बालकों की संख्या 139523 एवं 160061 बालिकाएं थीं। उसकी अपेक्षा वर्तमान सत्र में स्कूल चलो अभियान के पहले चरण के बाद 123877 बालक एवं 140787 बालिकाओं सहित कुल 264664 बच्चों का नामांकन हुआ है। पहली जुलाई से अभियान का दूसरा चरण शुरू होगा।
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जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक एक किलोमीटर पर प्राथमिक और दो किलोमीटर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जा चुके हैं। विद्यालयों की संख्या जहां लगातार बढ़ रही है वहीं इनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हो रही है। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि यहां पढ़ाई का स्तर संतोषजनक नहीं है। यही नहीं बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत नहीं है। इन विद्यालयों में अपने बच्चों को भेजने के प्रति अभिभावक भी गंभीर नहीं हैं। पठन-पाठन का माहौल न होने के कारण इन विद्यालयों में लगातार छात्रों की संख्या घट रही है। निजी स्कूलों में पठन-पाठन पर ध्यान देने के साथ ही वह संसाधन और साज-सज्जा से लैस हैैं। यही कारण है कि परिषदीय विद्यालयों की अपेक्षा निजी स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जिले में बेसिक शिक्षा के संचालन के लिए प्रति वर्ष सौ करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया जाता है। वहीं निजी स्कूलों में इस तरह का कोई भी बजट उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद अपनी व्यवस्था के बल पर ये स्कूल पूरी तरह से बच्चों और अभिभावकों को आकर्षित कर रहे हैं। जिले में गत वर्ष स्कूल चलो अभियान के बाद 299584 बच्चे नामांकित हुए थे। इसमें बालकों की संख्या 139523 एवं 160061 बालिकाएं थीं। उसकी अपेक्षा वर्तमान सत्र में स्कूल चलो अभियान के पहले चरण के बाद 123877 बालक एवं 140787 बालिकाओं सहित कुल 264664 बच्चों का नामांकन हुआ है। पहली जुलाई से अभियान का दूसरा चरण शुरू होगा।
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