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सपूतों ने जान देकर भी बढ़ाया है तिरंगे का मान
ब्यूरो अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:14 AM IST
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देश की रक्षा के दौरान शहीद हुए जवानों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका सम्मान करना सभी का कर्तव्य है। 1962 के भारत चीन युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध एवं अन्य मुठभेड़ों में गाजीपुर जनपद के करीब 100
जवान शहीद हुए हैं। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भारत-चीन युद्ध में 19, वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में 14, 1971 के भारत-पाक युद्ध में 42, कारगिल युद्ध में 9 तथा कुछ अन्य मुठभेड़ों में दर्जन भर से ज्यादा जवान शहीद हुए हैं।
जिला मुख्यालय से करीब चालीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गहमर एशिया के बडे़ गांवों में शुमार है। भदौरा ब्लाक अंतर्गत आने वाले इस गांव के बड़ी संख्या में लोग सेना एवं अर्द्घसैनिक बलों में कार्य करते हुए देश की सरहदों की
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बहादुरी के साथ रक्षा कर रहे हैं। समय-समय पर यहां के जवानों ने अपनी वीरता और अदम्य साहस का परिचय दिया है। वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद जवानों में काशीनाथ सिंह, चंद्रिका सिंह, जगधर, रामजन्म, हयाज अहमद,
बूटन सिंह, श्रीनारायण, रामअवध सिंह, शाह आलम, रामनारायण राय, रामअवतार, उमाशंकर त्रिवेदी, विश्वनाथ सिंह, पखंडी, चंद्रशेखर, बाबू सिंह, रामबदन सिंह, कैलाश नाथ सिंह प्रमुख हैं। वर्ष 1965 के भारत पाक युद्ध में शहीद
जवानों में रामलखन सिंह, भानू प्रताप सिंह, परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद, मुख्तार तिवारी, रामदास सिंह, मुहम्मद निजामुद्दीन, ह्दय नारायण उपाध्याय, रामजी, कैलाश सिंह, चंद्रदेव सिंह, मुहम्मद निसार, ब्रह्मदेव सिंह,
मनबांके पांडेय, रामजन्म राय शामिल हैं। वर्ष 1971 के भारत पाक युद्घ में ब्रह्मानंद पांडेय, माना सिंह, जीतन सिंह, हरिशंकर, रामध्यान सिंह, मनबहाल उपाध्याय, राजकुमार सिंह, विश्वनाथ सिंह, मुहम्मद सलीम खान, अब्दुल गफ्फार
शाह, विजय नारायण सिंह, शौकत अली अंसारी, मुहम्मद फौजदार खान, छेदी खां, शिवपूजन राय, कैलाश नाथ तिवारी, वशिष्ठ नारायण दूबे, राम केवल, वशिष्ठ सिंह, अनंत सिंह, रामचंद्र मिश्र तथा महाबीर चक्र विजेता रामउग्रह
पांडेय, राजनाथ सिंह, मुहम्मद सफीउल्लाह, राजनारायण प्रमुख हैं। आपरेशन पवन में रामनवल सिंह, आरेशन मेघदूत में श्रीपति, सत्येन्द्र यादव, मंगला राय, रंजीत सिंह शामिल रहे। आपरेशन ब्लू स्टार में राधेश्याम सिंह आपरेशन
रक्षक में विक्रमा राम, बलवंत सिंह, राजनारायण सिंह चौहान, सुभाष चंद्र राय, धर्मदेव प्रसाद भारती, राजेश सिंह यादव, हीरा सिंह यादव, रामभरत सिंह यादव, अनिल कुमार गिरी, सुनील पांडेय तथा राजेन्द्र सिंह यादव शहीद हुए।
कारगिल युद्घ (आपरेशन विजय) में शहीद हुए जवानों में कमलेश सिंह, शेषनाथ सिंह यादव, संजय कुमार यादव, मुहम्मद इश्तियाक खां, रामदुलार यादव, जय प्रकाश यादव, अश्विनी कुमार, रामविलास सिंह यादव तथा आपरेशन
रिहानों में दिनेश कुमार शहीद हुए। इसके अलावा गणेश सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह यादव, प्रमोद कुमार यादव, शिवा जी सिंह, मनोज कुमार सिंह, धनंजय कुमार यादव, आरके सिंह के अलावा कुछ अन्य जवान भी देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं।
वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध में शहीद हुए रामउग्रह पांडेय को मरणोपरांत सेना के दूसरे सर्वोच्च सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। देश की रक्षा करते हुए शहादत देने वाले रामउग्रह पांडेय के परिवार को तमाम
आश्वासन दिए गए लेकिन सेना या सरकार की ओर से प्रदत्त तमाम सुविधाएं उन्हें नहीं दी गईं। शहीद के परिवार की दुश्वारियां आज तक कम होने का नाम नही ले रही हैं। हालांकि तमाम दुश्वारियों के बावजूद शहीद रामउग्रह
पांडेय की धर्मपत्नी श्यामा देवी से आर्मी दिवस पर बातचीत की गई तो उन्होंने तपाक से कहा की सेना को सौंपने के लिए मेरा कोई बेटा तो नहीं है लेकिन अगर मेरे एक एक कतरे खून की आवश्यकता भी पड़ी तो अपना सौभाग्य समझूंगी।
सेना के जवानों को नमन करते हुए श्यामा देवी ने कहा कि सरकार, सत्ता एवं तमाम बड़े ओहदों पर बैठे लोग यह भूल जाते हैं कि देश के सच्चे सपूत देश की सीमाओं पर तमाम कष्ट सहते हुए राष्ट्रसेवा में प्राणों की आहुति दे देते
हैं। ऐसे में उनके परिवार की समस्याओं का निदान उनका परम कर्तव्य बनता है। यदि सत्ता, सरकार, बड़े अधिकारी एवं नामी गिरामी नेताओं के बच्चे सेना में होते तो सैनिकों के परिवार वालों को अपने हक हुक़ूक़ के लिए संघर्ष नही
करना पड़ता। आज भी भारतीय सेना में सबसे अधिक किसान के बेटे ही हैं। उन्होंने कहा कि जब नेता का बेटा राजनीति में उतरकर मंच से देश सेवा का दंभ भरता है तो दूसरी तरफ किसान का बेटा सेना में भर्ती होकर देश
सेवा करने के लिए लालायित नजर आता है, जो पूजनीय है। सेना के जवानों एवं भर्ती तैयारी में लगे नौजवानों को संदेश देते हुए कहा कि वे भारत माता के सच्चे सपूत हैं। ऐसे नौजवान जिनके कंधे पर राष्ट्र रक्षा का दायित्व है, हम उनको नमन करते हैं।
उल्लेखनीय है कि 1971 भारत पाक युद्ध में लांस नायक रामउग्रह पाण्डेय ने दुश्मनों के तीन बंकरों को तबाह कर दिया था। वह दुश्मन के बंकर में ही घुस गए और उनके बंकरों को तबाह कर वीर गति को प्राप्त हुए। रामउग्रह
पांडेय को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 26 जनवरी 1972 को तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने शहीद की धर्मपत्नी वीरनारी श्यामा देवी को दिल्ली में महावीर चक्र सौंपा था।
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जवान शहीद हुए हैं। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भारत-चीन युद्ध में 19, वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में 14, 1971 के भारत-पाक युद्ध में 42, कारगिल युद्ध में 9 तथा कुछ अन्य मुठभेड़ों में दर्जन भर से ज्यादा जवान शहीद हुए हैं।
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जिला मुख्यालय से करीब चालीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गहमर एशिया के बडे़ गांवों में शुमार है। भदौरा ब्लाक अंतर्गत आने वाले इस गांव के बड़ी संख्या में लोग सेना एवं अर्द्घसैनिक बलों में कार्य करते हुए देश की सरहदों की
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बहादुरी के साथ रक्षा कर रहे हैं। समय-समय पर यहां के जवानों ने अपनी वीरता और अदम्य साहस का परिचय दिया है। वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद जवानों में काशीनाथ सिंह, चंद्रिका सिंह, जगधर, रामजन्म, हयाज अहमद,
बूटन सिंह, श्रीनारायण, रामअवध सिंह, शाह आलम, रामनारायण राय, रामअवतार, उमाशंकर त्रिवेदी, विश्वनाथ सिंह, पखंडी, चंद्रशेखर, बाबू सिंह, रामबदन सिंह, कैलाश नाथ सिंह प्रमुख हैं। वर्ष 1965 के भारत पाक युद्ध में शहीद
जवानों में रामलखन सिंह, भानू प्रताप सिंह, परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद, मुख्तार तिवारी, रामदास सिंह, मुहम्मद निजामुद्दीन, ह्दय नारायण उपाध्याय, रामजी, कैलाश सिंह, चंद्रदेव सिंह, मुहम्मद निसार, ब्रह्मदेव सिंह,
मनबांके पांडेय, रामजन्म राय शामिल हैं। वर्ष 1971 के भारत पाक युद्घ में ब्रह्मानंद पांडेय, माना सिंह, जीतन सिंह, हरिशंकर, रामध्यान सिंह, मनबहाल उपाध्याय, राजकुमार सिंह, विश्वनाथ सिंह, मुहम्मद सलीम खान, अब्दुल गफ्फार
शाह, विजय नारायण सिंह, शौकत अली अंसारी, मुहम्मद फौजदार खान, छेदी खां, शिवपूजन राय, कैलाश नाथ तिवारी, वशिष्ठ नारायण दूबे, राम केवल, वशिष्ठ सिंह, अनंत सिंह, रामचंद्र मिश्र तथा महाबीर चक्र विजेता रामउग्रह
पांडेय, राजनाथ सिंह, मुहम्मद सफीउल्लाह, राजनारायण प्रमुख हैं। आपरेशन पवन में रामनवल सिंह, आरेशन मेघदूत में श्रीपति, सत्येन्द्र यादव, मंगला राय, रंजीत सिंह शामिल रहे। आपरेशन ब्लू स्टार में राधेश्याम सिंह आपरेशन
रक्षक में विक्रमा राम, बलवंत सिंह, राजनारायण सिंह चौहान, सुभाष चंद्र राय, धर्मदेव प्रसाद भारती, राजेश सिंह यादव, हीरा सिंह यादव, रामभरत सिंह यादव, अनिल कुमार गिरी, सुनील पांडेय तथा राजेन्द्र सिंह यादव शहीद हुए।
कारगिल युद्घ (आपरेशन विजय) में शहीद हुए जवानों में कमलेश सिंह, शेषनाथ सिंह यादव, संजय कुमार यादव, मुहम्मद इश्तियाक खां, रामदुलार यादव, जय प्रकाश यादव, अश्विनी कुमार, रामविलास सिंह यादव तथा आपरेशन
रिहानों में दिनेश कुमार शहीद हुए। इसके अलावा गणेश सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह यादव, प्रमोद कुमार यादव, शिवा जी सिंह, मनोज कुमार सिंह, धनंजय कुमार यादव, आरके सिंह के अलावा कुछ अन्य जवान भी देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं।
वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध में शहीद हुए रामउग्रह पांडेय को मरणोपरांत सेना के दूसरे सर्वोच्च सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। देश की रक्षा करते हुए शहादत देने वाले रामउग्रह पांडेय के परिवार को तमाम
आश्वासन दिए गए लेकिन सेना या सरकार की ओर से प्रदत्त तमाम सुविधाएं उन्हें नहीं दी गईं। शहीद के परिवार की दुश्वारियां आज तक कम होने का नाम नही ले रही हैं। हालांकि तमाम दुश्वारियों के बावजूद शहीद रामउग्रह
पांडेय की धर्मपत्नी श्यामा देवी से आर्मी दिवस पर बातचीत की गई तो उन्होंने तपाक से कहा की सेना को सौंपने के लिए मेरा कोई बेटा तो नहीं है लेकिन अगर मेरे एक एक कतरे खून की आवश्यकता भी पड़ी तो अपना सौभाग्य समझूंगी।
सेना के जवानों को नमन करते हुए श्यामा देवी ने कहा कि सरकार, सत्ता एवं तमाम बड़े ओहदों पर बैठे लोग यह भूल जाते हैं कि देश के सच्चे सपूत देश की सीमाओं पर तमाम कष्ट सहते हुए राष्ट्रसेवा में प्राणों की आहुति दे देते
हैं। ऐसे में उनके परिवार की समस्याओं का निदान उनका परम कर्तव्य बनता है। यदि सत्ता, सरकार, बड़े अधिकारी एवं नामी गिरामी नेताओं के बच्चे सेना में होते तो सैनिकों के परिवार वालों को अपने हक हुक़ूक़ के लिए संघर्ष नही
करना पड़ता। आज भी भारतीय सेना में सबसे अधिक किसान के बेटे ही हैं। उन्होंने कहा कि जब नेता का बेटा राजनीति में उतरकर मंच से देश सेवा का दंभ भरता है तो दूसरी तरफ किसान का बेटा सेना में भर्ती होकर देश
सेवा करने के लिए लालायित नजर आता है, जो पूजनीय है। सेना के जवानों एवं भर्ती तैयारी में लगे नौजवानों को संदेश देते हुए कहा कि वे भारत माता के सच्चे सपूत हैं। ऐसे नौजवान जिनके कंधे पर राष्ट्र रक्षा का दायित्व है, हम उनको नमन करते हैं।
उल्लेखनीय है कि 1971 भारत पाक युद्ध में लांस नायक रामउग्रह पाण्डेय ने दुश्मनों के तीन बंकरों को तबाह कर दिया था। वह दुश्मन के बंकर में ही घुस गए और उनके बंकरों को तबाह कर वीर गति को प्राप्त हुए। रामउग्रह
पांडेय को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 26 जनवरी 1972 को तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने शहीद की धर्मपत्नी वीरनारी श्यामा देवी को दिल्ली में महावीर चक्र सौंपा था।