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बीमार हूं तो क्या नागरिक नहीं हूं
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:31 AM IST
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एचआईवी
- फोटो : amar ujala
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बीमार हूं तो क्या नागरिक नहीं हूं। भारत में एचआईवी का पहला मामला उजागर होने के तीन दशक बाद जखनिया का एक परिवार यही सवाल हुक्मरानों से पूछ रहा है। एक एचआईवी संक्रमित दंपती को उसके आठ साल के मासूम बेटे का परिवार वालों ने बहिष्कार कर रखा है। यहां तक कि विद्यालय ने भी बच्चे को स्कूल से निकाल दिया।
जखनियां तहसील क्षेत्र के एक गांव की 32 वर्षीया महिला 2006 में ही गर्भावस्था के दौरान सिरिंज से एचआईवी संक्रमित हो गई। गर्भस्थ शिशु में भी बीमारी का संक्रमण हो गया। महिला से उसके पति भी संक्रमण हो गया। वर्ष 2010 में इलाज के दौरान दंपती के संक्रमित होने की जानकारी मिली। डाक्टरों ने बच्चे की जांच कराई तो उसमें भी संक्रमण पाया गया। इस दंपति का काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में रेट्रो वायरल थेरेपी चल रही है।
बीमारी की जानकारी होने पर परिवार वालों ने माता-पिता के संग बच्चे को भी घर से बाहर कर दिया। बाद में जांच में बच्चा भी संक्रमित पाया गया। परिवार वाले उनका छुआ हुआ कुछ नहीं खाते। जब परिवार ही साथ नहीं रहा तो समाज ने भी उनको बहिष्कृत कर दिया।
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समाज से अलग होने के बाद यह परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजरने लगा। प्रशासन की बेकद्री देखिए कि इस परिवार को गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड तक नहीं जारी हुआ। उनके बच्चे के एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी मिलने पर पिछले दिनों निजी स्कूल से यह कहते हुए बाहर कर दिया कि उससे दूसरे बच्चे संक्रमित हो जाएंगे। इसकी जानकारी होने पर बीते शुक्रवार को समग्र विकास इंडिया के अध्यक्ष ब्रजभूषण दूबे के साथ कई सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित परिवार के साथ भोजन किया। बच्चे के शिक्षा के अधिकार के लिए जखनिया में जुलूस निकाला। आंदोलन के बाद खंड शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश तिवारी स्कूल गए और प्रबंधक ने खेद जताया और छात्र का प्रवेश लिया। बृजभूषण दूबे का कहना है कि पीड़ित परिवार को आवास, हैंडपंप, पेंशन और राशन कार्ड की सुविधा मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। इस मामले को वे मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक ले जाएंगे।
एचआईवी पीड़ित महिला ने खंड विकास अधिकारी ओमप्रकाश तिवारी से स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के रूप में नियुक्ति का अनुरोध किया है। खंड शिक्षा अधिकारी ने अप्रैल में प्रक्रिया पूरी कर नियुक्त करने का भरोसा दिलाया। जब सामाजिक कार्यकर्ता शनाउल्लाह ने खंड शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश तिवारी से पूछा कि पीड़ित छात्र को सर्व शिक्षा अभियान के तहत चिह्नित क्यों नहीं किया गया तो वह निरुत्तर हो गए।
एचआईवी संक्रमित परिवार को यूनिट के हिसाब से अनाज मिलता है। लेखपाल को निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार में अनाज की कमी न होने पाए। बीएचयू में परिवार का सरकारी खर्च पर इलाज चल रहा है। देखरेख के लिए स्थानीय डाक्टरों की टीम लगाई गई है। जो भी सरकारी सुविधाएं होंगी मुहैया कराई जाएंगी।- सत्यप्रकाश मिश्र, एसडीएम, जखनिया
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जखनियां तहसील क्षेत्र के एक गांव की 32 वर्षीया महिला 2006 में ही गर्भावस्था के दौरान सिरिंज से एचआईवी संक्रमित हो गई। गर्भस्थ शिशु में भी बीमारी का संक्रमण हो गया। महिला से उसके पति भी संक्रमण हो गया। वर्ष 2010 में इलाज के दौरान दंपती के संक्रमित होने की जानकारी मिली। डाक्टरों ने बच्चे की जांच कराई तो उसमें भी संक्रमण पाया गया। इस दंपति का काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में रेट्रो वायरल थेरेपी चल रही है।
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बीमारी की जानकारी होने पर परिवार वालों ने माता-पिता के संग बच्चे को भी घर से बाहर कर दिया। बाद में जांच में बच्चा भी संक्रमित पाया गया। परिवार वाले उनका छुआ हुआ कुछ नहीं खाते। जब परिवार ही साथ नहीं रहा तो समाज ने भी उनको बहिष्कृत कर दिया।
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समाज से अलग होने के बाद यह परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजरने लगा। प्रशासन की बेकद्री देखिए कि इस परिवार को गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड तक नहीं जारी हुआ। उनके बच्चे के एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी मिलने पर पिछले दिनों निजी स्कूल से यह कहते हुए बाहर कर दिया कि उससे दूसरे बच्चे संक्रमित हो जाएंगे। इसकी जानकारी होने पर बीते शुक्रवार को समग्र विकास इंडिया के अध्यक्ष ब्रजभूषण दूबे के साथ कई सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित परिवार के साथ भोजन किया। बच्चे के शिक्षा के अधिकार के लिए जखनिया में जुलूस निकाला। आंदोलन के बाद खंड शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश तिवारी स्कूल गए और प्रबंधक ने खेद जताया और छात्र का प्रवेश लिया। बृजभूषण दूबे का कहना है कि पीड़ित परिवार को आवास, हैंडपंप, पेंशन और राशन कार्ड की सुविधा मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। इस मामले को वे मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक ले जाएंगे।
एचआईवी पीड़ित महिला ने खंड विकास अधिकारी ओमप्रकाश तिवारी से स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के रूप में नियुक्ति का अनुरोध किया है। खंड शिक्षा अधिकारी ने अप्रैल में प्रक्रिया पूरी कर नियुक्त करने का भरोसा दिलाया। जब सामाजिक कार्यकर्ता शनाउल्लाह ने खंड शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश तिवारी से पूछा कि पीड़ित छात्र को सर्व शिक्षा अभियान के तहत चिह्नित क्यों नहीं किया गया तो वह निरुत्तर हो गए।
एचआईवी संक्रमित परिवार को यूनिट के हिसाब से अनाज मिलता है। लेखपाल को निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार में अनाज की कमी न होने पाए। बीएचयू में परिवार का सरकारी खर्च पर इलाज चल रहा है। देखरेख के लिए स्थानीय डाक्टरों की टीम लगाई गई है। जो भी सरकारी सुविधाएं होंगी मुहैया कराई जाएंगी।- सत्यप्रकाश मिश्र, एसडीएम, जखनिया