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Ghazipur News: 12 घंटे में ही आईसीयू से वार्डों में शिफ्ट कर रहे गंभीर मरीज

Thu, 21 Nov 2024 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 12:24 AM IST
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Serious patients being shifted from ICU to wards within 12 hours
गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के 200 बेड पुरुष अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को 12 घंटे में ही वार्डों में शिफ्ट कर दिया जा रहा है। जबकि कम से कम ऐसे मरीजों को 24 आईसीयू में रखा जाता है। दस बेड के आईसीयू में सर्जरी के मरीजों को भर्ती करने के नाम पर खाली करा दिया जा रहा है। ऐसे में तीमारदारों को कभी 200 बेड के पुरुष तो कभी 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
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शहर व ग्रामीण इलाकों के अलावा गैर जनपदों व सटे प्रांत के कुछ जिलों से मरीज उपचार कराने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि अगर रोज की ओपीडी पर नजर डाली जाए तो 2000 से 2500 मरीज अस्पताल आ रहे हैं। वहीं आपातकक्ष पहुंचने वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन करीब 25-30 है। इधर, ठंड का मौसम शुरू होते ही उच्च रक्तचाप और हृदयरोग संबंधित मरीजों का भी आंकड़ा बढ़ गया है। गंभीर बीमारी के 5-6 मरीज रोज पहुंच रहे, जिन्हें तत्काल आईसीयू की आवश्यकता होती है। इसके अलावा रोज विभिन्न बीमारियों की 8 से 10 सर्जरी भी हो रही है। ऐसे में गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को काफी प्रयास के बाद आईसीयू में बेड मिल पाता है, वह भी सुबह होते ही स्वास्थ्य कर्मी उन्हें दूसरे वार्ड में यह कहकर शिफ्ट करने लगते हैं कि सर्जरी वाले मरीजों को भर्ती करना है। ऐसे में गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर तीमारदारों में चिंता बनी रहती है।
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गंभीर और सर्जरी वाले मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराया जाता है। अभी 6 बेड का अतिरिक्त आईसीयू भी बन रहा है। हालांकि गंभीर मरीजों के लिए बेड सुरक्षित है। बिना चिकित्सक की सलाह के मरीजों को वार्ड में भर्ती किया जाएगा तो संबंधित स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।- प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कालेज गाजीपुर।
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महिला मरीज के गले का आपरेशन हुआ था। शाम में साढ़े तीन बजे आईसीयू में भर्ती किया गया और दूसरे दिन सुबह 10.30 बजे उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि उनकी स्थिति ठीक नहीं थी।- अभिषेक राय, तीमारदार
आईसीयू में गंभीर मरीज भर्ती करने में तो इधर-उधर भागदौड़ करनी पड़ती है। किसी तरह अगर मरीज भर्ती हो जाता है तो उन्हें सुबह होते ही दूसरे वार्ड में भर्ती कराया जाता है।- दीपक वर्मा , तीमारदार
शहर की लालदरवाजा स्थित उर्मिला देवी की हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें किसी तरह आईसीयू भर्ती कराए। सुबह होते ही स्वास्थ्यकर्मी उन्हें नवनिर्मित वार्ड में भेजने लगे। काफी कहने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। तीमारदार ओमप्रकाश ने बताया कि स्थिति ये ह है कि डॉक्टर के अनुसार वार्ड का भी बंटवारा किया गया है।

वार्डों में नहीं जाते डॉक्टर
वाॅर्डों में शिफ्ट होने वाले गंभीर मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि आईसीयू में जो डॉक्टर मरीज को देखते हैं वे ही वार्ड में मरीज को देखने आते हैं। लेकिन कई बार डॉक्टर राउंड पर नहीं आते हैं। 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल के महिला वार्ड में अक्सर डॉक्टर राउंड पर नहीं जाते। ऐसे में मरीज को कई परेशानी होती है तो कोई जूनियर डॉक्टर भी नहीं देखता। ऐसे में तीमारदार मरीज को लेकर यहां-वहां भटकता है।
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