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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Sawan Special Nageshwar Mahadev Temple is more than 400 years old

Sawan Special: 400 साल पुराना है नागेश्वर महादेव मंदिर, दस फीट तक गर्भगृह की कराई गई खुदाई, नहीं मिला अंत

Sat, 15 Jul 2023 03:12 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर Published by: किरन रौतेला Updated Sat, 15 Jul 2023 03:12 PM IST
सार

Sawan Special: ऊंचाडीह स्थिति शिवलिंग के इतिहास के बारे में पुजारी नर्वदेश्वर मिश्र बताते हैं कि 400 साल पहले जंगल में आसपास के चरवाहे अपनी पशुओं को लेकर आते और छोड़कर चले जाते। शाम को सभी पशु वापस चले जाते।

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Sawan Special Nageshwar Mahadev Temple is more than 400 years old
नागेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजीपुर में करीमुद्दीनपुर रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थापित नागेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां सावन मास में दूरदराज से आकर लोग शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। इस स्थल का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। बताते हैं कि पहले यहां तक राजा नल का राज्य होता था।

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ऊंचाडीह स्थिति शिवलिंग के इतिहास के बारे में पुजारी नर्वदेश्वर मिश्र बताते हैं कि 400 साल पहले जंगल में आसपास के चरवाहे अपनी पशुओं को लेकर आते और छोड़कर चले जाते। शाम को सभी पशु वापस चले जाते। लेकिन, कुछ दिन से उन पशुओं में एक ऐसी गाय थी, जो वापस नहीं आती। चरवाहे ने पता किया तो जानकारी हुई कि वह जंगल में बैठीं रहती है।
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ये प्रक्रिया कुछ दिन चलने के बाद शाम को चरवाहे जिज्ञासा वश उस स्थान पर पहुंचे तो देखा गाय एक झाड़ में खड़ी थी और उसके थन से सारा दूध स्वत: निकल रहा था। उस झाड़ में चरवाहे ने देखा तो धरती से निकला हुआ शिवलिंग दिखाई दिया। शिवलिंग के अगल-बगल कुछ सर्प भी बैठे थे, तभी से इनका नाम नागेश्वर महादेव पड़ा।
 

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शिवलिंग गर्भगृह से तीन फीट ऊपर है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि दस फीट तक गर्भगृह की खुदाई कराई गई। लेकिन उसका अंत न मिलने पर खुदाई बंद करा दी गई। मंदिर के बगल में तालाब है। बताते हैं कि इसे राजा नल ने बनवाया। पुजारी बताते हैं कि इस तालाब के अंदर चार कुएं हैं, जो अब मिट्टी से पट चुके हैं। उस कुएं को ढूंढ़ने के लिए तालाब में खुदाई कराई गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया।
तालाब का नाम नागेश्वर महादेव के नाम पर नाग कुंड पड़ा। बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं की त्रेतायुग में ये क्षेत्र राजा नल के राज्य में आता था। जब भी राजा नल इधर आते इसी जगह पर आराम करते थे। यही नहीं, जब भी कोई युद्ध में विजय पाते तो राज्य की धन संपदा इसी जगह रख देते। ताकि उनके राज्य में प्रजा को तकलीफ न हो।

मूर्ति खंडित करने की कोशिश करने वालों की हो गई मौत

लोगों का कहना है कि मुगल बादशाह औरंगजेब सभी हिंदू मंदिरों को खंडित करते हुए यहां भी आ पहुंचा था। शिवलिंग को उसके सैनिक तोड़ने लगे, लेकिन शिवलिंग खंडित नहीं हुआ। पुजारी ने बताया की जितने सैनिक शिवलिंग को तोड़ रहे थे उन सभी की तत्काल मौत हो गई। यही नहीं, आज भी हैं शिवलिंग पर तोड़ने के तीन निशान पड़े हैं, जिसमें एक निशान एक इंच का बाकी आधे-आधे इंच के हैं।
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