फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Sawan Special: Blood started coming out due to shoveling on Shivling, even today there is a scar

Sawan Special: शिवलिंग पर फावड़ा लगने से निकलने लगा था खून, आज भी है निशान, अद्भुत है ये कहानी

Thu, 27 Jul 2023 09:54 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 27 Jul 2023 09:54 AM IST
सार

13वीं शताब्दी में यहां के गंगा तट का गोलाघाट व्यापारिक ठहराव का प्रमुख केंद्र था। उस समय आवागमन व व्यापार का प्रमुख मार्ग जलमार्ग था। आसपास उस समय केवल घना जंगल था। जहां चरवाहे नियमित अपने पशुओं को चराने के लिए लेकर आया करते थे। एक दिन एक चरवाहे ने जंगल में धुआं निकलते देखा तो उसने इसकी जानकारी साथियों और आसपास के लोगों को दी।

विज्ञापन
Sawan Special: Blood started coming out due to shoveling on Shivling, even today there is a scar
सोमेश्वर महादेव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुहम्मदाबादनगर से सटे बैजलपुर के महादेवा स्थित सोमेश्वर महादेव का ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र है। दूर-दूर से लोग दर्शन-पूजन, जलाभिषेक और रूद्राभिषेक करने के लिए आते हैं। इस धाम में स्थापित शिवलिंग का इतिहास 13वीं शताब्दी से जु़ड़ा है। बताते हैं कि खुदाई के दौरान उस समय फावड़ा से शिवलिंग पर चोट लग गया था, जिससे खून निकलने लगा था। यह निशान आज भी सोमेश्वर महादेव के शिवलिंग पर साफ दिखाई देता है।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें- Varanasi: वाराणसी से लेह, श्रीनगर व धर्मशाला की कनेक्टिंग फ्लाइट, जानिए- कब से भरेगी उड़ान?
विज्ञापन

इस प्राचीन स्थान को लोग महादेवा के नाम से जानते हैं और शिवलिंग को सोमेश्वर नाथ महादेव के नाम से पुकारते हैं। यहां भक्त मनोकामना पूर्ण होने पर सोमवार और शुक्रवार को बाबा सोमेश्वर नाथ महादेव के अरघे को गुड़, चीनी के सरबत,गन्ने का रस, दूध ,अन्न व फल आदि से भरते हैं। हर सोमवार को जलाभिषेक करने वालों की भीड़ लगती है। आचार्य पंडित अभिषेक तिवारी के मुताबिक मुहम्मदाबाद प्राचीन काल में धारानगर के नाम से जाना जाता था।

विज्ञापन
विज्ञापन

Sawan Special: Blood started coming out due to shoveling on Shivling, even today there is a scar
सोमेश्वर महादेव - फोटो : अमर उजाला

13वीं शताब्दी में यहां के गंगा तट का गोलाघाट व्यापारिक ठहराव का प्रमुख केंद्र था। उस समय आवागमन व व्यापार का प्रमुख मार्ग जलमार्ग था। आसपास उस समय केवल घना जंगल था। जहां चरवाहे नियमित अपने पशुओं को चराने के लिए लेकर आया करते थे। एक दिन एक चरवाहे ने जंगल में धुआं निकलते देखा तो उसने इसकी जानकारी साथियों और आसपास के लोगों को दी। लोगों ने उस स्थान की सफाई करने के साथ-साथ खुदाई करनी शुरू कर दी। इस दौरान लोगों को वहां शिवलिंग दिखाई दिया, लेकिन शिवलिंग अपने स्थान पर जमीन में नीचे की तरफ खिंसकने लगा। कहते हैं इस दौरान फावड़े की चोट उस शिवलिंग पर पड़ी तो उसमें से रक्त की धारा निकलने लगी। लोग इस घटना से डर गए और महादेव से क्षमा प्रार्थना की। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। मंदिर में सामने नंदी की प्रतिमा स्थापित की गई। निर्माण के पश्चात दर्शन पूजन प्रारंभ कर दिया गया। आज भी सोमेश्वर महादेव के शिवलिंग पर फावड़े के चोट का निशान साफ दिखाई देता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed