फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   sawan month

सावन विशेष- आस्था का केंद्र बना असावर बुढ़वा महादेव मंदिर

Sun, 19 Jul 2020 09:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2020 09:15 PM IST
विज्ञापन
sawan month
सावन-असावर बुढवा महादेव शिवलिंग का पूजन-अर्चन करते श्रद्घालु। - फोटो : GHAZIPUR
करीमुद्दीनपुर। क्षेत्र के असावर गांव स्थित बुढ़वा महादेव का अति प्राचीन मंदिर लोगों में श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस शिवलिंग की उत्पत्ति जमीन फाड़कर हुई थी। इसकी गिनती अति दुर्लभ शिवलिंगों में की जाती है। महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि असावर बुढवा महादेव दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है। गाजीपुर-बलिया जिले की सीमा पर टोंस नदी के किनारे लट्ठुडीह-रसड़ा मार्ग पर हरदासपुर से दो किलोमीटर पश्चिम दिशा में और परसा-तिराहिपुर मार्ग पर सिउरी अमहट से एक किलोमीटर पूरब असावर गांव में बुढ़वा महादेव का भव्य मंदिर है। किंवदंतियों के अनुसार पहले एक घना जंगल था, जहां चरवाहे अपने पशुओं को चराते थे। एक दिन चरवाहे एक स्थान पर पशुओं को चराते हुए आराम कर रहे थे कि थोड़ी दूर पर जमीन फटकर चमकता हुआ शिवलिंग निकलता दिखाई दिया। यह बात क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई और लोगों की भारी भीड़ कीर्तन पूजा करने लगी। लोगों के अनुसार, एक समय चार की संख्या में चोर उस शिवलिंग को रात में खोदने लगे और जमीन खोदते-खोदते भोर होने लगा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। चोर निराश होकर भागने लगे। इसी बीच चारों चोर अपनी आंखों की ज्योति खो दिये और वे शिवलिंग के ईर्द-र्गिद ही चक्कर काटने लगे। गलती का एहसास होने पर चोर शिवलिंग के पास पहुंच कर क्षमा याचना करने लगे। तब कहीं जाकर उनकी आंखों की रौशनी दोबारा लौट आई। स्थानीय नागरिक बताते हैं कि इलाके के लोगों ने मंदिर बनाने की योजना बनायी तो बाबा ने एक व्यक्ति को स्वप्न दिखाया कि हमारे ऊपर मंदिर नहीं बनना चाहिए। संभवत: इसी वजह से भगवान शिव सालों से खुले आसमान के नीचे ही रहे। लेकिन करीब तीन साल पहले लोगों के मन में फिर मंदिर बनाने की सोच उठी। इसी बीच एक संत का आगमन हुआ और फिर उस स्थान पर एक वृहद यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। इसी मंदिर से सटे एक धर्मशाला का भी निर्माण करवाया गया। असावर बुढवा महादेव मंदिर में सावन माह में तथा महाशिवरात्रि पर भव्य मेला का आयोजन किया जाता है। यहां काफी दूर-दराज से श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन पूजन के लिए आती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर या पूरी करने के लिए 24 तथा 48 घंटे तक शुद्ध घी का अखंड दीप प्रज्वलित करते हैं। इस साल सावन माह में कोराना महामारी के चलते मंदिर प्राय: बंद रहता है। केवल गांव और आसपास के श्रद्धालु ही काफी कम संख्या में दर्शन कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed